रविवार, अप्रैल 01, 2012

माथे पर चुम्बन

द किस, ओग्यूस्त रोदें
The Kiss, Auguste Rodin

माथे पर किया चुम्बन -- मिटा देता है दुःख.
मैं तुम्हारा माथा चूमती हूँ.

आँखों पर किया चुम्बन -- उड़ा देता है उनींदापन.
मैं तुम्हारी आँखें चूमती हूँ.

होंठों पर किया चुम्बन -- है पानी पीने जैसा.
मैं तुम्हारे होंठ चूमती हूँ.

माथे पर किया चुम्बन -- मिटा देता है स्मृति.



-- मारीना स्व्ताएवा 


 मारीना स्व्ताएवा ( Marina Tsvetaeva ) बहुत प्रसिद्द रूसी लेखिका व कवयित्री थीं और उनको 20 वीं सदी के बेहतरीन रूसी साहित्यकारों में गिना जाता है. 18 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन 'ईवनिंग एल्बम' प्रकाशित हुआ. वे रूसी क्रांति व उसके बाद मास्को में पड़े अकाल के समय वहीँ थी. क्योंकी वे क्रांति के खिलाफ थी उन्हें निर्वासित कर दिया गया. कई साल वे अपने परिवार के साथ गरीबी की हालत में पेरिस, बेर्लिन्र व प्राग में रहीं. मास्को लौटने के बाद भी उन्हें शक की नज़र से देखा जाता रहा व उनके परिवार को कसी न किसी कारण से सताया जाता रहा, उनकी बेटी कई वर्ष जेल में रहीं, व पति को मार डाला गया. बिना किसी आर्थिक सहारे के व नितांत अकेलेपन में, उन्होंने आत्महत्या कर ली.
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद इल्या कामिन्सकी व यौं वालोंतीन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

5 टिप्‍पणियां:

  1. कविता पढ़ने में बहुत अच्छी लग रही है. मार्मिक भी है पर यह समझ में नहीं आया कि माथे का चुम्बन जो दुःख को मिटा देता है वही स्मृति को भी कैसे मिटा देता है...

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  2. रमाकांत जी, पहले चुम्बन की स्मृति :)

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  3. बहुत सुन्दर और मन को छूने वाली है ये रीनू!

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