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लेकसाइड विद बर्च ट्रीज़, गुस्ताव क्लिम्ट Lakeside With Birch Trees, Gustav Klimt |
मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ
और मुझे वह याद नहीं है
मैं कोशिश करता हूँ
जानता हूँ कि वह वही प्रश्न है
जो हमेशा था
असल में
लगता है उसके बारे में
करीब-करीब सब कुछ जानता हूँ
जो सब उस की याद दिलाता है
खींच ले जाता है मुझे
भोर में या सांझ में
झील के किनारे और उसके पास
वह जो कुछ भी खड़ा है
प्रश्न के साथ
जैसे देह खड़ी होती है
छाया के साथ
मगर यह प्रश्न कोई छाया नहीं है
अगर मैं जानता
कि किसने की है शून्य की खोज
तो शायद पूछ लेता
कि उस से पहले क्या था

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़