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सेवेरल सर्क्ल्ज़, वैसिली कैन्डिन्सकी Several Circles, Wassily Kandinsky |
हम न मिलते हैं न अलग होते हैं.
वांछित परिणाम: हम अनुपस्थिति में मिलते हैं.
प्रमाण: जैसे तनाव लोगों को वृतांशों में बदल देता है,
हम दो वृतांश हैं.
हम न मिलते हैं न अलग होते हैं (परिकल्पना)
तो, हम अवश्य ही समानांतर होंगे.
अगर दो रेखाओं को
तीसरे रेखा द्वारा द्विभाजित किया जाता है
( जो यहाँ पर, तनाव की रेखा है)
उनके संगत कोण बराबर होंगे ( एक ज्यामितिय प्रमेय).
तो, हम समनुरूप हैं
( क्योंकि जब उनके कोण बराबर होते हैं
आकार समनुरूप होते हैं )
और हम एक वृत्त बनाते हैं ( चूंकि दो
समनुरूप वृतांशों का जोड़
एक वृत्त होता है).
इसलिए हम मिलते हैं अनुपस्थिति में
(चूंकि एक वृत्त की परिधि
होती है संस्पर्शी बिन्दुओं का जोड़
और हर एक को समझा जा सकता है
स्पर्श-बिंदु).
-- दून्या मिखाइल

वे 1996 से अमरीका में रहती हैं व अरबी पढ़ाती हैं.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद इलीज़ाबेथ विन्ज्लो ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़