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द फैक्ट्री एट आसनिऐर, विनसेंट वान गोग The Factory at Asnieres, Vincent van Gogh |
ठिठकते हैं अचानक मज़दूर के कदम
सुहावना मौसम खींचता है पीछे से
उसकी कमीज और
जब वह मुड़ कर देखता है
गोल-गोल और लाल सूरज को
उसकी कमीज और
जब वह मुड़ कर देखता है
गोल-गोल और लाल सूरज को
मुस्कुराते हुए अपने धूसर आकाश में
एक आँख दबाकर
बड़े अपनेपन में पूछ बैठता है
कहो कामरेड सूरज
क्या तुम्हें नहीं लगता
है ये बहुत बड़ा घोटाला
कि ऐसा सुहावना बासंती दिन
मिल के मालिक को मिला?
-- याक प्रेवेर

इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़