मंगलवार, मार्च 06, 2012

आत्मा से बात-चीत

व्हीट-फील्ड विद अ लार्क, विन्सेंट वान गोग
Wheat-Field with a Lark, Vincent Van Gogh

आत्मा ने कहा,
" मुझे देखने के लिए कुछ दो."
तो मैंने उसे दिए खेत और बाड़ी. उसने कहा,
" ये तो बहुत बड़े है." 
तो मैंने उसे दिया एक खेत.
हम दोनों बैठ गए.

कभी मुझे प्यार हो जाता एक झील से
कभी देवदार के फल से. मगर मुझे 
सबसे ज्यादा वह पसंद थी. 
वह यह बात जानती थी.
"लिखते रहो," वह कहती.

और मैंने वही किया. जब भी नई बर्फ़ गिरती थी,
हम दोनों फिर से शादी कर लेते थे.
पवित्र पूर्वज आकर बैठ जाते हमारे बिस्तर के पास.
ऐसा कितने ही साल होता रहा.

"यह खेत बहुत छोटा पड़ रहा है, " उसने कहा.
"तुम किसी और को नहीं जानते 
जिस से तुम प्यार कर सको?"
अब तुम उस से क्या कहते?


--- रोबर्ट ब्लाए 



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है. यह कविता उनके संकलन 'ईटिंग द हनी ऑफ़ वर्डज़ ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

3 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर कविता !! किस तरह प्रेम हमारी दृष्टि को और हृदय को व्यापक कर देता है कि जो है वह छोटा लगने लगता है ! आभार रेनू जी ! सुंदर अनुवाद किया आपने !

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  2. कहाँ से चुन -चुन कर लाती हो कवितायें? फिर अनुवाद के गजरों से सजाती हो...

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