सोमवार, अप्रैल 23, 2012

घास

वुमन सिटिंग इन द ग्रास, विन्सेंट वां गोफ
Woman Sitting in the Grass, Vincent Van Gogh


घास के मैदान.
उनको फूलते देखने का आश्चर्य 
और इतनी सुन्दर घास 
और इतनी तीक्ष्ण चाह.

एक द्रुत अनुक्रम में 
फिसल जाती है दुनिया 
हमारी उँगलियों के बीच से. 



-- विवियान चाम्पी



 विवियान चाम्पी इटली की कवयित्री व अनुवादक हैं. उनका जन्म फ्रांस में लियों में हुआ था. आजकल वे इटली के ज्नोआ शहर में रहती हैं. उन्होंने फ्रेंच से इतालियन में व इतालियन से फ्रेंच में खूब अनुवाद किया है जिस  में दोनों भाषाओं के कवियों व निबंधकारों के पूरे संकलन भी शामिल हैं. उनके इतालियन से फ्रेंच में किये गए असंख्य अनुवाद दुनिया भर की साहित्य पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं. वे 'इकार' व 'फिली द'आकिलोन' नामक दो ऑनलाइन पत्रिकाओं की संपादक हैं व एक कला और संस्कृति आधारित पत्रिका 'प्रोजेत्तो जेउम' की सह-संस्थापक भी हैं. 1998 से वे ज्नोआ के इंटरनैशनल पोएट्री फेस्टिवल से बतौर अनुवादक, इंटरप्रेटर व रीडर जुड़ी हुई हैं. अब तक  उनके 5 कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं. य ह कविता उनके संकलन 'इनचाम्पी' से है.
इस कविता का मूल इतालियन से फ्रेंच में अनुवाद रेमों फारिना ने किया है.
इस कविता का फ्रेंच से हिंदी मे अनुवाद -- रीनू तलवाड़

2 टिप्‍पणियां:

  1. एक द्रुत अनुक्रम में
    फिसल जाती है दुनिया
    हमारी उँगलियों के बीच से. shandaar :)

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  2. अद्भुत कविता .............सौंदर्य का एक एक विस्मयकारी क्षण कौंध कर चला जाता है ,और हम हतप्रभ ,लुटे हुए खड़े रह जाते हैं !
    बधाई और आभार ,अनुवाद और प्रस्तुति के लिए !

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