बुधवार, जुलाई 11, 2012

मैं ऐसा क्या कह सकती हूँ?

फोरेस्ट , पॉल सेज़ान
Forest, Paul Cezanne
मैं ऐसा क्या कह सकती हूँ
जो मैंने पहले नहीं कहा होगा?
तो मैं एक बार फिर कहती हूँ.
हर पत्ते में एक गीत होता है.
पत्थर का चेहरा सहनशील होता है.
नदी में होती है कभी न अंत होने वाली एक कहानी
और उस में कहीं तुम होते हो
और उसका अंत कभी नहीं होगा
जब तक न हो जाए सब कुछ का अंत.

अपने व्यस्त ह्रदय को कला संग्रहालय ले जाओ
और ले जाओ व्यापार-मण्डल
मगर उसे जंगल में भी ले जाओ.
पत्ते का जो गीत तुमने सुना था
अपने बचपन में
पत्ता वह गीत अभी भी गा रहा है.
मैंने जी लिए हैं, अब तक, चौहत्तर बरस,
और पत्ता अभी भी गा रहा है, गाता जा रहा है.


-- मेरी ओलिवर


Mary Oliver मेरी ओलिवर ( Mary Oliver )एक अमरीकी कव्यित्री हैं, जो 60 के दशक से कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. उनके 25 से अधिक कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और बहुत सराहे गए हैं. उन्हें अमरीका के श्रेष्ठ सम्मान 'नेशनल बुक अवार्ड' व 'पुलित्ज़र प्राइज़' भी प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताएँ प्रकृति की गुप-चुप गतिविधियों के बारे में हैं, जैसे वो धरती और आकाश के बीच खड़ीं सब देख रहीं हैं. और  उनकी कविताओं में उनका अकेलेपन  से प्यार, एक निरंतर आंतरिक एकालाप व स्त्री का प्रकृति से गहरा सम्बन्ध भी दिखाई देता है.. यह कविता उनके संकलन 'स्वैन ' से है.

इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

1 टिप्पणी:

  1. पत्ते के गीत को सुनना सिखाने वाली कविता.प्रेम प्रकृति और हम -सब आपस में बहुत गहराई से जुडे हुए हैं.

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