सोमवार, फ़रवरी 18, 2013

कविताएँ लिखते-लिखते

वुमन राइटिंग, एदुआर माने
Woman Writing, Edouard Manet


कविताएँ लिखते-लिखते, कागज़ के
किनारे से ज़रा-सी कट गयी
मेरी हथेली.
कटे की लकीर से बढ़ गयी
लगभग एक-चौथाई  

मेरी जीवन-रेखा. 


-- वेरा पाव्लोवा 



 वेरा पाव्लोवा ( Vera Pavlova ) रूस की सबसे प्रसिद्द समकालीन कवयित्री हैं. उनका जन्म मॉस्कोमें हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की व संगीत के इतिहास विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की. कुछ समय बाद ही उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई और उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ किया. उनके 14 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व रूस में उनकी किताबें खूब बिकती हैं. उन्होंने चार ओपेरा लिबेरेतोज़ के लिए संगीत लिखा है व कुछ बोल भी. उनकी कविताएँ 18भाषाओँ में अनूदित की गयी हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन 'इफ देयर इज़ समथिंग टू डिजायर: वन हंड्रेड पोएम्ज़ ' से है.

इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीवन सेमूर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (20-02-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  2. गजब -

    बधाइयां



    काटे कागद कोर ने, कवि के कितने अंग ।

    कविता कर कर कवि भरे, कोरे कागज़ रंग

    कोरे कागज़ रंग, रोज ही लगे खरोंचे ।

    दिल दिमाग बदहाल, याद बामांगी नोचे ।

    रविकर दायाँ हाथ, एक दिन गम जब बांटे ।

    जीवन रेखा छोट, कोर कागज़ की काटे ।।

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  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

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