गुरुवार, अप्रैल 25, 2013

स्मृतियों का अपना कोई स्थान नहीं होता...

ब्रेतों लैंडस्केप ट्रीज़ एंड मूर, पिएर ओग्यूस्त रेनोआ
Breton Landscape Trees and Moor. Pierre Auguste Renoir

स्मृतियों का अपना कोई स्थान नहीं होता, न
ही होती है उनके बचाव के लिए किलाबंदी
और जब हमने उन्हें रहने दिया होता है
लम्बे समय के लिए
कोई, हमारे भीतर कहीं, व्याकुल होने लगता है
और खदेड़ने लगता है उन्हें
मगर कोई और, वह जो मरना नहीं
चाहता, प्रयास करता है
फिर से कुछ खोजने का, चाहे वह कोई गंध
ही क्यों न हो, या झाड़ियों की सरसराहट
या उँगलियों में उलझा
ख़ुशी का आभास 


-- क्लौद एस्तेबान



 क्लौद एस्तेबान (Claude Esteban) एक फ्रेंच कवि , निबंधकार व अनुवादक थे। वे फ्रेंच व स्पेनिश दोनों भाषाओं में सिद्धहस्त थे। पिछली सदी के दूसरे हिस्से के प्रमुख कवियों में से एक, वे अपने पीछे महत्वपूर्ण कृति छोड़ गए हैं। उन्होंने कला व कविता पर असंख्य निबंध लिखे व स्पैनिश भाषा के प्रमुख कवियों ओक्टावियो पास, बोर्खेस, लोर्का इत्यादि की कविताओं व लेखन का अनुवाद किया। आरम्भ में वे फ्रेंच कला व साहित्य की पत्रिकाओं में लेख लिखते रहे। 1968 में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ --'ला सेजों देवास्ते '.इसके बाद उनके कई संकलन प्रकशित हुए, वे प्रसिद्द कलाकारों के लिए उनकी प्रदर्शनियों के कैटालोग के लिए प्रस्तावनाएँ लिखते रहे। स्पेनी कवि होर्खे गुइयें से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई व उन्होंने उनके कृत्य का  फ्रेंच में खूब अनुवाद किया। 1984 में उन्हें अपनी गद्य कविताओं के लिए मालार्मे पुरूस्कार प्राप्त हुआ। कला में उन्हें गहरी रूचि रही और 1991 में उन्हें एडवर्ड हापपर के चित्रों से प्रेरित कविता संकलन '
सोलई दौन्ज़ युन पीएस वीद ' के लिए फ्रांस कल्चर प्राइज़ प्राप्त हुआ। उनके 13 कविता संकलन, कई निबंध व अनेक अनुवाद प्रकाशित हुए,. यह कविता उनके संकलन 'ल मौर आ दिसतौंस' से है. 

इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

2 टिप्‍पणियां:

  1. स्मृतियों का अपना कोई स्थान नहीं होता,
    न ही होती है उनके बचाव के लिए किलाबंदी
    जब हमने उन्हें रहने दिया होता है
    लम्बे समय के लिए
    कोई, हमारे भीतर कहीं, व्याकुल होने लगता है स्मर्तियाँ ऐसी ही होती हैं,ऐसा ही करती हैं,यदि उन्हें बनाये रखो तो, अच्छी अनुपम रचना

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