शुक्रवार, अप्रैल 19, 2013

जो पढ़ा है...

वाइट एंड ब्लैक, एल्ज़वर्थ केली
White and Black, Ellsworth Kelly
जो पढ़ा है उसके बारे में एक बार फिर सोचता हूँ:
कि अँधेरा और उजाला, अच्छा और बुरा,
सत्य और असत्य, दुनिया में ये सब मिला-जुला हैं.
निस्संदेह जो ऐसा सोचते हैं, उनके लिए
दुनिया बड़ी सक्रीय है: सब कुछ काला या सफ़ेद है,
दैवी है या शैतान का है.
मगर इस दो खेमों में विभाजित दुनिया में
आखिर क्या बचेगा
अगर सब कुछ पूर्ण रूप से विभाज्य हो जाएगा,
चूर-चूर हो कर बन जाएगा अणुओं का चक्रवात,
क्षेत्रों की तिलमिलाहट?
क्या हर अणु में होगा कुछ अँधेरा, कुछ उजाला,
क्या उनके सबसे छोटे हिस्सों में भी विपर्यय होगा,
स्वयं शून्य में भी, जो खंडित होते-होते
अस्तित्वहीनता के और पास और पास आता रहेगा?
जो अजब है, क्या वह भयंकर का स्थान ले लेगा?
क्या तब जीवित रहना और सरल होगा?


-- यान काप्लिन्स्की


यान काप्लिन्स्की ( Jaan Kaplinski )एस्टोनिया के कवि, भाषाविद व दार्शनिक हैं व यूरोप के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं. वे अपने स्वतंत्र विचारों व वैश्विक सरोकारों के लिए जाने जाते हैं. उनके कई कविता-संग्रह, कहानियां, लेख व निबंध प्रकाशित हो चुके हैं. उन्होंने कई भाषाओँ से कई भाषाओँ में अनुवाद किये है व उनके स्वयं के लेखन का भी कई भाषाओँ में अनुवाद हुआ है. यह कविता उनके संकलन 'ईवनिंग ब्रिनग्ज़ एवरीथिंग बैक ' से है.
इस कविता का मूल एस्टोनियन से अंग्रेजी में अनुवाद फियोना सैम्प्सन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

1 टिप्पणी:

  1. विचारणीय कविता ! एक बहस को आमंत्रित करती कविता ! सुन्दर अनुवाद !

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