शुक्रवार, फ़रवरी 07, 2014

हास्यास्पद

द लव लेटर, यूजीन द ब्लास
The Love Letter, Eugene de Blaas
सभी प्रेम-पत्र होते हैं 
हास्यास्पद. 
वे प्रेम-पत्र न होते अगर न होते
हास्यास्पद.

अपने समय में लिखे हैं मैंने भी 
प्रेम-पत्र जो थे निस्संदेह उतने ही 
हास्यास्पद.

अगर प्रेम है, तो प्रेम-पत्र 
होंगे ही 
हास्यास्पद. 

मगर असल में 
नहीं लिखे कभी जिन्होंने 
प्रेम-पत्र 
केवल वे ही हैं 
हास्यास्पद.

काश मैं लौट पाता उस समय में 
जब लिखे थे मैंने प्रेम-पत्र 
बिन सोचे कि वे हैं कितने 
हास्यास्पद.

सच तो यह है कि आज 
उन प्रेम-पत्रों 
की मेरी स्मृतियाँ 
ही हैं जो हैं 
हास्यास्पद.

(तीन से अधिक अक्षरों के सभी शब्द,
साथ ही ये असंख्य भावनाएँ 
स्वाभाविक है, कि हैं 
हास्यास्पद.


  -- फेर्नान्दो पेस्सोआ  (आल्वरो द कम्पोस )





 
फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने  आल्वरो द कम्पोस (  Álvaro de Campos ) के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नाम या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो ये है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, स्वभाव, दर्शन, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्ररी में उन पन्नों की एडिटिंग का काम आज तक जारी है. यह कविता उनके संकलन 'अनकलेक्टिड पोइम्ज़ ' से है.
इस कविता का मूल पुर्तगाली से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़           

2 टिप्‍पणियां:

  1. वह पल बीत जाने के बाद प्रेम और प्रेम पत्र -दोनों हास्यास्पद लगते हैं मगर मन में गुदगुदी करते रहते हैं. अब प्रेम पत्र इतने त्वरित हो गए कि उन्हें सहेज कर नहीं रखा जाता. हमारा बेहतरीन साहित्य इनमें सिमटा हुआ है. सुन्दर कविता का सहज अनुवाद.

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  2. प्रेमास्वाद के क्षण को मन फिर फिर जीना चाहता है लेकिन उसकी हर कोशिश हो कर रह जाती है -हास्यास्पद |...बहुत गहरी कविता |

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