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मॉर्निंग ऑन द सेन इन द रेन, क्लोद मोने Morning on the Seine in the Rain, Claude Monet |
पंछी
गाते हैं अन्धकार में
भीगी-सी है भोर
--
उठ रही है महक
गीली मिट्टी की --
झुकना क्या?
-- जैक केरुयक
कविता पढ़ना नदी को पुल से पार करना है. अनुवाद करना कवि के साथ उस नदी में डूब जाना है…
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मॉर्निंग ऑन द सेन इन द रेन, क्लोद मोने Morning on the Seine in the Rain, Claude Monet |