बुधवार, जुलाई 20, 2011

बंजारन बांसुरी

द बॉय विद द विलो फ्लूट, क्रिस्तियाँ स्क्रेडज़विग
The Boy With The Willow Flute, Christian Skredsvig

तुम 
जो पहले कभी गीत सुनाती थे मुझे 
अब भी सुनाओ ना
सुनने दो मुझे 
तुम्हारा वही लम्बा आरोही स्वर  
जियो मेरे साथ
तारा डूब रहा है 
मैं उससे आगे सोच सकता हूँ 
मगर मैं भूल रहा हूँ
सुन पा रही हो मुझे 

अब भी सुन पा रही हो मुझे 
क्या तुम्हारी हवा 
तुम्हें याद रखती है 
ओ सुबह की सांस 
रात का गीत सुबह का गीत 
जो कुछ भी मुझे नहीं पता है 
वो सब मेरे पास है 
मैंने उसमे से कुछ भी नहीं खोया है 

मगर अब मैं ठीक नहीं समझता 
तुमसे पूछना 
कि तुमने यह संगीत कहाँ से सीखा 
कि वह थोडा-सा भी आया कहाँ से 
कभी चीन में शेर होते थे 

जब तक बांसुरी रुक ना जाए
और रोशनी पुरानी न पड़ जाए 
मैं सुनता रहूँगा 



-- डब्ल्यू एस मर्विन


W.S. Merwinडब्ल्यू एस मर्विन ( W S Merwin )अमरीकी कवि हैं व इन दिनों अमरीका के पोएट लॉरीअट भी हैं.उनकी कविताओं, अनुवादों व लेखों के 30 से अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं .उन्होंने दूसरी भाषाओँ से अंग्रेजी में बहुत अनुवाद किया है व अपनी कविताओं का भी स्वयं ही दूसरी भाषाओँ में अनुवाद किया है.अपनी कविताओं के लिए उन्हें अन्य सम्मानों सहित पुलित्ज़र प्राइज़ भी मिल चुका है.वे अधिकतर बिना विराम आदि चिन्हों के मुक्त छंद में कविता लिखते हैं.यह कविता उनके संकलन 'द शैडो ऑफ़ सिरिअस ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

सोमवार, जुलाई 18, 2011

सर्वनाम

प्रियेर, मार्क शगाल 
Prière, Marc Chagall


खेल-खेल में
वह बनता है रेल. 
वह सीटी बनती है. 
वे निकल पड़ते हैं.

वह बनता है रस्सी. 
वह पेड़ बनती है. 
वे झूल जाते हैं. 

वह बनता है सपना.
वह पंख बनती है.
वे उड़ जाते हैं. 

वह बनता है सेनापति.
वह सेना बनती है.
खेल-खेल में
वे कर देते हैं युद्ध की घोषणा.


-- दून्या मिखाइल 


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 दून्या मिखाइल ( Dunya Mikhail )एक इराकी-अमरीकी कवयित्री हैं. वे अरबी में लिखतीं हैं व उनकी कविताएँ इराक के हालात , युद्ध, युद्ध से प्रभावित जीवन व विस्थापन के बारे में हैं. अरबी में उनकी कविताओं के पांच संकलन प्रकाशित हुए हैं. उनकी अंग्रेजी में अनूदित कविताओं के दो संकलन प्रकाशित हुए हैं, जिन में 'द वार वर्क्स हार्ड' को PEN ट्रांसलेशन अवार्ड मिला व 'डायरी ऑफ़ अ वेव आउटसाइड द सी' को अरब अमेरिकेन बुक अवार्ड मिला है. 2001 में उन्हें यू एन ह्यूमन राइट्स अवार्ड फॉर फ्रीडम ऑफ़ राइटिंग प्राप्त हुआ.
वे 1996 से अमरीका में रहती हैं व अरबी पढ़ाती हैं.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद इलीज़ाबेथ विन्ज्लो ने किया है.    
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शनिवार, जुलाई 16, 2011

दुनिया के अंत पर एक गीत

रोज़िज़ एंड बीटल, विन्सेंट वान गोग
Roses And Beetle, Vincent Van Gogh

जिस दिन दुनिया का अंत होता है 
एक मधुमक्खी तिपतिया घास के चक्कर लगाती है, 
एक मछुआरा चमकते जाल को ठीक करता है.
समुद्री जीव ख़ुशी से उछलते हैं समुद्र में,
जहाँ से बारिश का पानी निकलता है 
नन्ही चिड़ियाँ खेलती हैं वहां
और सांप की छाल सुनहरी है जैसी होनी चाहिए हमेशा.

जिस दिन दुनिया का अंत होता है 
औरतें चलती हैं खेतों में अपनी छतरियों तले,
एक पियक्कड़ घास के किनारे निंदासा होता है,
सब्ज़ीवाले चिल्लाते हैं गली में
और एक पीले पाल वाली नाव आ जाती है द्वीप के और पास,
एक वायलिन की आवाज़ ठहर-सी जाती है हवा में 
और ले जाती है तारों भरी रात की ओर.

और जिन्होंने सोचा था की बिजली चमकेगी, 
बादल गरजेंगे, वे निराश हो जाते हैं.
और जिन्हें उम्मीद थी संकेतों की, महादूतों की तुरही की 
उन्हें नहीं लगता कि अंत अब हो रहा है.
जब तक सूरज और चाँद ऊपर हैं,
जब तक भौंरा गुलाब के पास जाता है 
जब तक गुलाबी-से बच्चे पैदा हो रहे हैं
किसी को नहीं लगता की अंत अब हो रहा है.

केवल एक पके बालों वाला बूढ़ा, 
जो पैगम्बर हो सकता था, मगर पैगम्बर नहीं है,
क्योंकि वह कुछ अधिक ही व्यस्त है,
अपने टमाटर के पौधे बांधते हुए दोहराता है:
दुनिया का और कोई अंत नहीं होगा,
और कोई अंत नहीं होगा दुनिया का.



--चेस्वाफ़ मीवोश 



चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद एंथनी मीवोश ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, जुलाई 14, 2011

खुद से बातें

सेल्फ पोर्ट्रेट इन फ्रंट ऑफ़ द ईज़ल, विन्सेंट वान गोग
Self Portrait In Front Of The Easel, Vincent Van Gogh

ऐसा भी होता है 
कि कोई केवल अपने लिए 
बोलता है कुछ शब्द
अकेले इस अजीब धरती पर 
और फिर वह छोटा सफ़ेद फूल
वह कंकड़ जिसके जैसे बहुत
गुज़र चुके हैं पहले भी 
वह ठूंठ-सी टहनी 
एक बार फिर
मिला हुआ पाते हैं
एक-दूसरे से खुद को 
उस द्वार के सामने
जिसे कोई खोलता है धीरे-से
मिटटी के घर में प्रवेश के लिए 
जबकि कुर्सियाँ, मेज़, अलमारी
दमकते हैं वैभव के सूर्य में.


-- यौं फोलें 


 
यौं फोलें ( Jean Follain ) फ्रांस के कवि, लेखक व मजिस्ट्रेट थे और फ्रेंच के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं. बहुत समय तक वे दोहरी ज़िन्दगी जीते रहे, एक ओर सरकारी अफसर और दूसरी ओर कवि जो साहित्यिक गोष्ठियों में जाता था, पत्रिकाओं में लेख लिखता था. फिर उन्होंने एक दिन नौकरी छोड़ दी और अनेक देशों का भ्रमण किया. ऐसा लगता था मानो वे नौकरी में गवाएँसाल वापिस अर्जित करना चाहते थे. उनके अनेक कविता व गद्य संकलन प्रकाशित हुए व उनका दूसरी भाषाओँ में अनुवाद भी हुआ. उनकी कविताएँ छोटी, रहस्यमय और लगभग चीनी-जापानी बौद्ध कविताओं-सी लगती है.
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, जुलाई 12, 2011

एक छोटे कैफे-सा...ऐसा है प्यार

द नाईट कैफे इन द प्लास लामारतीन इन आर्ल, विन्सेंट वान गोग 
The Night Cafe In The Place Lamartine In Arles, Vincent Van Gogh

अजनबियों की गली में 
एक छोटे कैफे-सा -- ऐसा है प्यार
...सब के लिए दरवाज़े खोले.
ऐसा कैफे जो मौसम के साथ-साथ
बढ़ता है, घटता है :
अगर खूब बारिश होती है 
तो ग्राहक बढ़ जाते हैं,
मौसम ठीक होता है 
तो कम होते हैं, सुस्त हो जाते हैं...
मैं यहाँ हूँ, अजनबी,
एक कोने में बैठा हुआ.
( तुम्हारी आँखों का रंग कैसा है? 
तुम्हारा नाम क्या है?
मैं यहाँ तुम्हारे इंतज़ार में बैठा हूँ,
तुम पास से गुज़रोगी तो तुम्हें कैसे पुकारूं ?)
एक छोटा कैफे, ऐसा ही है प्यार.
मैं वाइन के दो प्याले मंगवाता हूँ 
और तुम्हारी और अपनी सेहत का जाम पीता हूँ.
मैं दो टोपियाँ लिए हूँ
और एक छतरी. बारिश हो रही है.
अब और भी तेज़ हो रही है बारिश, 
और तुम यहाँ नहीं आती.
आखिर में अपनेआप से कहता हूँ : 
शायद वह, मैं जिसका इंतज़ार कर रहा था 
मेरा इंतज़ार कर रही थी, 
या किसी और का इंतज़ार कर रही थी,
या हम दोनों का इंतज़ार कर रही थी, 
और न उस को ढूंढ पाई, न मुझ को.
वह कहती : यहाँ इंतज़ार कर रही हूँ तुम्हारा.
( तुम्हारी आँखों का रंग कैसा है? तुम्हारा नाम क्या है?
कैसी वाइन पसंद है तुम्हें? तुम पास से गुजारोगे
तो तुम्हे कैसे पुकारूं? )
एक छोटा कैफे, ऐसा ही है प्यार...


-- महमूद दरविश


 महमूद दरविश ( Mahmoud Darwish )एक फिलिस्तीनी कवि व लेखक थे जो फिलिस्तीन के राष्टीय कवि भी माने जाते थे. उनकी कविताओं में अक्सर अपने देश से बेदखली का दुःख प्रतिबिंबित होता है. उनके तीस कविता संकलन व आठ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. अपने लेखन के लिए, जिसका बीस भाषाओँ में अनुवाद भी हो चुका है, उन्हें असंख्य अवार्ड मिले हैं. फिलिस्तीनी लोगों के 'वतन' के लिए संघर्ष के साथ उनकी कविताओं का गहरा नाता है. जबकि उनकी बाद की कविताएँ मुक्त छंद में  लिखी हुईं और कुछ हद तक व्यक्तिगत हैं, वे राजनीती से कभी दूर नहीं रह पाए.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद मोहम्मद शाईन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, जुलाई 10, 2011

कल भोर होते ही

ऐवन्यू ऑफ़ पोप्लर्ज़ एट सनसेट, विन्सेंट वान गोग
Avenue Of Poplars At Sunset, Vincent Van Gogh 
कल, भोर होते ही, 
जिस घड़ी सब उजला होने लगता है, 
मैं निकल पडूंगा. 
देखो, मैं जानता हूँ की तुम मेरी राह देख रही हो.
मैं जंगल से गुज़रुंगा, मैं पर्वत पार करूँगा
अब मैं तुमसे और दूर नहीं रह पाऊंगा.


आँखें अपनी सोच पर स्थिर किए 
मैं चलता रहूँगा,
बिना बाहर कुछ देखे, बिना कोई आवाज़ सुने,
अकेला, अपरिचित, पीठ झुकी, हाथ बंधे हुए,
उदास, 
और दिन मेरे लिए रात जैसा ही होगा.

ढलती सांझ का सोना नहीं देख पाऊंगा मैं,
न ही दूर आरफ्लर शहर पर गिरते धुंध के पर्दों को,
और जब मैं पहुँच जाऊँगा, 
तो हरे हॉली के पत्ते और फूलती हेदर
रख दूंगा तुम्हारी कब्र पर.


-- विक्टर ह्यूगो 





विक्टर ह्यूगो ( Victor Hugo ) उन्नीसवीं सदी के फ्रांसीसी कवि, नाटककार, उपन्यासकार व निबंधकार थे. हालाँकि वे कवि के रूप में अधिक जाने जाते हैं, 20 वर्ष की आयु में ही उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हो चुका था, मगर उनके उपन्यासों का भी साहित्य में अपना ही स्थान है. और किसी लेखक ने अपने जीवन काल में शायद ही इतना लेखन किया हो जितना विक्टर ह्यूगो ने किया -- 22 से अधिक कविता संकलन; 8 उपन्यास, जिसमे से 'ले मिज़ेराब्ल' और 'द हंचबैक ऑफ़ नोत्र दाम' खूब प्रसिद्द हुए;10 नाटक जो उस समय के बदलते राजनैतिक माहौल पर केन्द्रित थे; और इस के इलावा अनेक निबंध व लेख. यह कविता उनके संकलन 'ले कोंतोंपलासियों' से है. यह कविता उन्होंने अपने बेटी लिओपोलडीन के लिए लिखी थी जिसका 19 वर्ष की आयु में देहांत हो गया था.
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, जुलाई 08, 2011

आज सवेरे

ए विंड बीटन ट्री, विन्सेंट वान गोग 
A Wind beaten Tree, Vincent Van Gogh

आज बहुत सवेरे मैं घर से निकल पड़ा 
क्योंकि मैं उस से भी जल्दी उठ बैठा था, 
और कुछ करने का मन भी नहीं था.

मैं नहीं जानता था किस ओर जाऊं,
मगर हवा बहुत ज़ोर से एक ओर को चल रही थी,
और जिस ओर वह धकेलती गयी, मैं चलता गया.

हमेशा ऐसा ही रहा है मेरा जीवन,
और हमेशा ऐसा ही रहे, यही चाहता हूँ --
मैं उधर ही जाऊं जिधर हवा मुझे बहा ले जाए
और कुछ सोचने की कभी आवश्यकता न हो.


--  फेर्नान्दो पेस्सोआ ( अल्बेर्तो काइरो )



 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने अल्बेर्तो काइरो ( Alberto Caeiro )के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नाम या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो ये है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, स्वभाव, दर्शन, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्ररी में उन पन्नों की एडिटिंग का काम आज तक जारी है. यह कविता उनके संकलन 'अनकलेक्टिड पोइम्ज़ ' से है.
इस कविता का मूल पुर्तगाली से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़