सोमवार, जनवरी 16, 2012

बुला लो मुझे

व्हीटफील्ड विद क्रोज़, विन्सेंट वान गोग
Wheatfield With Crows, Vincent Van Gogh

एक ठंडी हवा बहती है मक्का के खेतों पर; 
काले पंछियों के बेड़े 
डूबते-उतराते हैं उस समुद्र में.
मैं होना चाहता हूँ वहां उस निरंकुश में, 
बाहर खुले में, रहना चाहता हूँ हवा में कहीं.

ओसारी की दीवार से पीठ टिका कर 
बैठ जाता हूँ मैं आराम से
यहाँ मुझे कोई ढूंढ नहीं सकता.
मैं एकटक देखता हूँ एल्डर पेड़ के पत्तों को 
लहराते हुए इस रहस्यमय पानी में.

आखिर वह क्या है जो मैं चाहता हूँ? पैसा नहीं,
ना ही बड़ी-सी डेस्क या दस कमरों वाला घर.
जो मैं करना चाहता हूँ वह यही है, बस यूँ ही बैठना,
बिना भाग लिए, और हवा का मुझे बुला ले जाना.


--- रोबर्ट ब्लाए 



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है. यह कविता उनके संकलन 'ईटिंग द हनी ऑफ़ वर्डज़ ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

1 टिप्पणी:

  1. आखिर वह क्या है जो मैं चाहता हूँ? पैसा नहीं,
    ना ही बड़ी-सी डेस्क या दस कमरों वाला घर.
    जो मैं करना चाहता हूँ वह यही है, बस यूँ ही बैठना,
    बिना भाग लिए, और हवा का मुझे बुला ले जाना.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिये आभार

    vikram7: महाशून्य से व्याह रचायें......

    उत्तर देंहटाएं