बुधवार, मई 30, 2012

बत्तियाँ गुल

बर्निंग द डार्क, निकोलाई ररीह
Burning the Dark, Nicholas Roerich

बूढ़ा दुखित पतझड़ बुलाता जा रहा है
अपनी गर्मियों को
घाटी बुलाती जा रही है पर्वत के पार
अन्य घाटियों को
हर सितारा अपने अँधेरे में अकेला गरजता है
पूरी रात में नहीं है किसी आवाज़ की आहट भी 




-- डब्ल्यू एस मर्विन



W.S. Merwin डब्ल्यू एस मर्विन ( W S Merwin )अमरीकी कवि हैं व इन दिनों अमरीका के पोएट लॉरीअट भी हैं.उनकी कविताओं, अनुवादों व लेखों के 30 से अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं .उन्होंने दूसरी भाषाओँ के प्रमुख कवियों के संकलन, अंग्रेजी में खूब अनूदित किये हैं, व अपनी कविताओं का भी स्वयं ही दूसरी भाषाओँ में अनुवाद किया है.अपनी कविताओं के लिए उन्हें अन्य सम्मानों सहित पुलित्ज़र प्राइज़ भी मिल चुका है.वे अधिकतर बिना विराम आदि चिन्हों के मुक्त छंद में कविता लिखते हैं.यह कविता उनके संकलन 'द शैडो ऑफ़ सिरिअस ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

1 टिप्पणी:

  1. ........... रात क्यूँ किसी को बुलाये ,वह तो डरती है कहीं कोई जुगनू न चमक जाए !

    बहुत अच्छी कविता ! सुंदर अनुवाद के लिए बधाई !

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