रविवार, दिसंबर 02, 2012

एक अधूरी कविता

आफ्टर लव, पैट्रिक लॉकार्ट
After Love, Patrick Lockhart
अगर मैं प्रेम के अपने अनुभवों को स्वीकार कर भी लूँ
तो फायदा क्या होगा?
लोगों ने हमेशा लिखा है प्रेम के बारे में,
चित्रित की है अपनी कथा कंदराओं की दीवारों पर
मृद्भांडों पर, उत्कीर्ण किया है उसे भारत से आये
हाथी दांत पर
उकेरा है उसे मिस्र में पपीरस पर
या चीन में चावल पर...
...चढ़ाएँ हैं उस पर चढ़ावे और वचन...

न मैं कोई पुरोहित हूँ न अध्यापक
नहीं मानता मैं
कि गुलाबों के लिए आवश्यक है
समझाना अपनी सुगंध दुनिया को.
तो मैं किस बारे में लिखूं?
यह प्रेम अकेला मेरा ही अनुभव है
तलवार है जो बेधती है मेरे अकेलेपन को,
मृत्यु में अधिक उपस्थित हूँ मैं.

जब मैं यात्रा करता था तुम्हारे समुद्रों पर, प्रिय,
नहीं पढ़ता था मैं कोई समुद्री नक़्शे
नहीं थी मेरे पास कोई सुरक्षा नाव,
न कोई डूबने से बचने का साधन,
और एक बौद्ध भिक्षु की तरह
चुनते हुए अपने भाग्य
आता था मैं तुम्हारी धधकती रोशनी के पास.
मैं तो बस चाहता था
सूरज के आरपार घसीटकर लिखना अपना पता
और तुम्हारी छातियों के बीच बांधना पुलों को.

जब मैं तुमसे प्रेम करता था
मैंने देखा कि हमारे बगीचे की
लाल चेरी अंगारों की तरह दहकने लगीं
वे मछलियाँ जो बच्चों के काँटों में फंसने से रह गईं
लाखों की संख्या में तैर कर आ गईं हमारे किनारों पर
अंडे देने
साइप्रस के पेड़ और ऊंचे हो गए
जीवन और विस्तृत
और ईश्वर
अंततः लौट आया धरती पर.

जब मैं तुमसे प्रेम करता था
मैंने देखा कि गर्मियों का मौसम
दस बार आता था हर साल
हर दिन हमारे खेतों में
गेहूँ पागलों की तरह उगता था
चाँद जो छोड़ कर चला गया था हमारा शहर
लौट आया
और ले लिया किराये पर उसने एक कमरा-बिस्तर
और शक्कर और सौंफ से बनी मदिरा
और भी स्वादिष्ट हो गयी.

जब मैं अपने प्रेम के बारे में लिखने का प्रयास करता
स्वयं को नारकीय पीड़ा में पाता
पूरे समुद्र का बोझ
लद जाता मेरी पीठ पर
वह बोझ जो केवल वे ही पहचानते हैं
जो सदियों से खोये हैं
उसकी गहराइयों में

क्या लिखूं तुम्हारे प्रेम के बारे में, प्रिय?
केवल यही बात याद है मुझे
एक सुबह जागना
और स्वयं को एक राजकुमार हुआ पाना.

समझने का प्रयत्न करो
प्रेम के पंछी दो बार नहीं भरते उड़ान
प्रेम एक यात्री है
जो आता है केवल एक बार...फिर चला जाता है.



-- निज़ार क़ब्बानी





 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और नाओमी शिहाब नाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह प्रेम की गहरी अनुभूति की अत्यंत सुंदर अभिव्यक्ति.इसे हिंदी में गूंगे का गुड कहा गया है.स्वाद को कैसे प्रकट किया जाये या ईश्वर की रचना की हूबहू प्रतिकृति कैसे संभव है.

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  2. अद्भुत कविता ...अद्भुत अनुवाद ...

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