शनिवार, जनवरी 04, 2014

खुला दरवाज़ा

द ब्लू बर्ड, मार्क शगाल
The Blue Bird, Marc Chagall
मैं  करती हूँ कड़ी मेहनत
ताकि मेरे पास हो खाली समय.

पंछी चढ़ते हैं अपने वृन्दगीतों के 
सोपान.

वे चख चुके हैं पेड़ की फुनगी,
मगर वे ठहर नहीं रहे.

सारा आकाश कहता है,
अब तुम्हारी चाल.  


-- नाओमी शिहाब नाए 




 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन ''फ़ुएल " से है. 


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

6 टिप्‍पणियां:

  1. खुले आकाश में उडती उन्मुक्त कविता,

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  2. रीनू जी! एक बहुत महत्वपूर्ण कार्य इतने सुन्दर तरीके से करने के लिए आपका हृदय से आभार।

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  3. रीनू जी! एक बहुत महत्वपूर्ण कार्य इतने सुन्दर तरीके से करने के लिए आपका हृदय से आभार।

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