रविवार, फ़रवरी 19, 2012

दो देश

दानैद, ओग्यूस्त रोदें
Danaid, Auguste Rodin

देह को याद है कितने लम्बे खिंच जाते हैं साल 
जब देह को कोई नहीं छूता, अकेलेपन की
एक धूसर सुरंग, पंछी की पूंछ से धीमे-धीमे 
चक्कर खाकर नीचे सीढ़ी पर गिरा पंख, जो 
किसी ने हटा दिया, बिना देखे कि वह एक पंख था.
देह खाती रही, चलती रही, सोती रही अपने-आप ही,
हिलाती रही अपना 'मिलते हैं' कहने वाला हाथ.
मगर देह को लगा कि वह कभी दिखी ही नहीं, कभी 
नक़्शे पर जानी नहीं गयी किसी देश की तरह,
एक शहर जैसे नाक, एक शहर जैसी कमर, 
मस्जिद का चमकता गुम्बद, 
और दालचीनी व रस्सी के सैंकड़ों-सैंकड़ों गलियारे.

देह को उम्मीद थी, यही तो देह करती है.
घाव पूरी तरह भर देती है, रास्ता बनाती है.
प्यार का अर्थ है की तुम दो देशों में सांस लेते हो.
और देह याद रखती है -- रेशम, नुकीली घास,
अपनी निजी गुप्त जेब में गहरे कहीं.
अब भी, जब देह अकेली नहीं है,
उसे याद है अकेले होना, और वो आभारी है 
किसी विशालता की, इसलिए, कि यात्री होते हैं,
कि लोग जाते हैं उन जगहों पर,
जो उनसे कहीं विशाल, कहीं बृहद होती हैं.


-- नाओमी शिहाब नाए


                                                                                                                                                                                                                     
    

नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन "वर्डज़ अंडर द वर्डज़ " से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, फ़रवरी 17, 2012

संगीत

पोप्लर्ज़, विंड इफेक्ट, क्लोद मोने
Poplars, Wind Effect, Claude Monet
कुछ नहीं है, कुछ भी तो नहीं -- 
हवा हौले-से बजा रही है पेड़ों का गिटार.
कुछ नहीं है, कुछ भी तो नहीं.
एक शून्य है. जिसे शब्द कभी भर ही नहीं सकते.

और मैं सपना देखता हूँ, सपना.
और सपना कुछ  और नहीं यथार्थ का बचपन है.
तो पूछो फिर अपने आप से, मुझ से मत पूछो -- 
क्षितिज और तुम्हारे बीच की रूकावट 
केवल तुम्हारे मन में है.
मगर, यह लगभग तय  है
कि कविता जादुई रूप से उभरती है 
मानो आकाश से लटका हुआ कोई घर हो.

इस घर में रहता है एक शरणार्थी और उसका नाम है अर्थ.


-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके संकलन ' प्रिंटर ऑफ़ द प्लेनेट्स बुक्स ' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

बुधवार, फ़रवरी 15, 2012

पुराने मंदिर के खण्डहर में

टेम्पल ऑफ़ अपोलो इन फिगालिया,
कार्ल ब्र्युलोव
Temple of Apollo in Phigalia,
Karl, Bryullov
संग्रहालय का चौकीदार भेड़ों के बाड़े के सामने बीड़ी पी रहा था.
भेड़ें संगमरमर के खण्डहरों के बीच उग आई घास चर रही थीं.
और नीचे नदी किनारे औरतें कपड़े धो रही थीं.
तुम सुन सकते थे लोहार की दुकान से आती हथौड़े की आवाज़.
चरवाहे ने सीटी बजाई थी. और भेड़ें ऐसे दौड़ी थीं उसकी ओर 
मानो संगमरमर के भग्नावशेष उठ कर दौड़ रहे हों.
कनेर के पेड़ों के पीछे 
पानी की मोटी गर्दन ठंडक झलका रही थी.
एक औरत ने अपने धुले कपड़े सुखा दिए थे 
झाड़ियों पर और मूर्तियों पर --
और उसने सुखाया अपने पति का लंगोट हेरा देवी की प्रतिमा के कन्धों पर.

एक अद्भुत शांतिपूर्ण और मौन अंतरंगता चलती आ रही थी सालों से.
नीचे तट पर मछुआरे पास से निकल रहे थे,
सर पर मछलियों से भरी चौड़ी टोकरियाँ लिए 
मानो रोशनी की लम्बी, पतली फांकें लेकर जा रहे हों :
सुनहरी, गुलाबी, जामुनी -- बिलकुल वैसे ही जैसे 
वह जुलूस, ज़री के काम वाली देवी की चूनर लिए था,
वह चूनर जो हमने काट डाली थी उस दिन और 
सजा लिए थे उसके परदे और मेज़पोश अपने खाली घरों में.


--- ज्यानिस रीत्ज़ोज़ 



 ज्यानिस रीत्ज़ोज़ ( Yannis Ritsos ) एक युनानी कवि और वामपंथी ऐक्टिविस्ट थे. टी बी और दुखद पारिवारिक समस्याओं से त्रस्त, अपने वामपंथी विचारों के लिए उत्पीड़ित, उन्होंने ने कई वर्ष सैनटोरीअमों, जेलों व निर्वासन में बिताये मगर पूरा समय वे लिखते रहे और अनेक कविताएँ, गीत, नाटक लिख डाले, कई अनुवाद भी कर डाले. अपने दुखों के बावजूद, समय के साथ उनके अन्दर ऐसा बदलाव आया कि वे अत्यंत मानवीय हो गए और उनके लेखन में उम्मीद, करुणा और जीवन के प्रति प्रेम झलकने लगा. उनकी 117किताबे प्रकाशित हुई जिनमे कविताओं के साथ-साथ नाटक व निबंध-संकलन भी थे.

इस कविता का मूल ग्रीक से अंग्रेजी में अनुवाद एडमंड कीली ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, फ़रवरी 13, 2012

तुम

सेल्फ-पोर्ट्रेट, मार्क शगाल
Self-Portrait, Marc Chagall

बिन बुलाए आया तुम्हारा ख्याल, 
और रहा बहुत देर तक मेरे मन में.
मैं सोने चली गई, 
सपनों में खूब देखा तुम्हें, खूब देखा.
उठी तो होंठों पर तुम्हारा ही नाम था, 
नर्म, नमकीन, आँसुओं-सा,
उसके शब्दांशों का खनकता हुआ स्वर, 
जैसे मंत्र फूंकता, जादू करता हुआ.

प्यार करना है जैसे एक जादुई नरक में जीना,
एक तीखी लपट उठती है तन में,
मन प्यासा-सा, दुबका हुआ, 
शिकारी बाघ की तरह मारने को तैयार हो जाता है.

और इस जीवन में, जीवन से कहीं बृहद, सुन्दर, 
तुम चले आए. 
मैंने छुपा लिया खुद को अपने आम दिनों में, 
दिनचर्या की ऊँची घास में, छलावरण वाले कमरों में.
तुम पसर गए मेरी निगाहों में, घूरते रहे मुझे 
कभी किसी के चेहरे से, कभी बादलों के आकार से,

धरती को तरसते चाँद से, जो मुँह बाये मुझे देखता है 
जब मैं खोलती हूँ बेडरूम का दरवाज़ा.
परदे हिलते हैं. जैसे एक उपहार, 
एक छुआ जा सकने वाला स्वप्न,
देखो वो रहे तुम बिस्तर पर.




-- कैरल एन डफ्फी



कैरल एन डफ्फी ( Carol Ann Duffy )स्कॉट्लैंड की कवयित्री व नाटककार हैं. वे मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन युनिवेर्सिटी में समकालीन कविता की प्रोफ़ेसर हैं. 2009 में वे ब्रिटेन की पोएट लॉरीअट नियुक्त की गईं. वे पहली महिला व पहली स्कॉटिश पोएट लॉरीअट हैं. उनके स्वयं के कई कविता संकलन छ्प चुके हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों को सम्पादित भी किया है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान व अवार्ड मिल चुके हैं. सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं व स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी हैं. यह कविता उनके 2005 में छपे संकलन ' रैप्चर ' से है, जिसे टी एस एलीअट प्राइज़ मिला था.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

शनिवार, फ़रवरी 11, 2012

पंख उगाना

फेयरी टेल, मिकालोयुस चिर्लोनिअस
Fairy Tale, Mikalojus Ciurlionis 
ठीक ही है कि सेज़ान एक चित्र को बार-बार बनाता रहे.
ठीक ही है कि हमारे मुंह में रस का स्वाद कड़वा लगे.
ठीक ही है कि बूढ़ा आदमी अपने बेकार पैर को घसीट कर चले. 

जन्नत के पेड़ पर सेब महीनो तक लटका रहता है.
हम गिराव के कगार पर सालों-साल करते रहते हैं प्रतीक्षा.
नीला-स्लेटी पर्वत उगता रहता है काले पेड़ों के पीछे.

ठीक ही है कि मरने तक मैं यही दर्द महसूस करता रहूँ.
एक कमाया हुआ दर्द अधिक पोषण करता है हमारा
बनिस्बत उस आनंद के जो हमने कल रात लॉटरी में जीता था.

ठीक ही है कि तीतर का घोंसला बर्फ़ से भर जाए.
व्याध क्यों शिकायत करे अगर उसका झोला खाली लौटे शाम को? 
इसका अर्थ केवल यही है कि पंछी एक रात और जीवित रहेगा.

ठीक ही है कि हम आज रात अपनी सभी चाबियाँ सौंप दें.
ठीक ही है कि हम त्याग दें अपना कुंडलिनी के लिए मोह 
ठीक ही है कि जिस नाव से मैं प्रेम करता हूँ, कभी न पहुंचे किनारे.

अगर हम पहले ही मृत्यु के इतने पास हैं, तो हम शिकायत क्यों करें?
रॉबर्ट, घोंसलों तक पहुँचने के लिए कितने पेड़ों पर चढ़े हो तुम
ठीक ही है कि नीचे आते-आते तुम्हारे पंख उग आएँ. 


--- रोबर्ट ब्लाए 



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है. यह कविता उनके संकलन 'ईटिंग द हनी ऑफ़ वर्डज़ ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, फ़रवरी 09, 2012

तीन गीत

ब्लू लवर्ज़, मार्क शगाल
Blue Lovers, Marc Chagall

प्रेम रचता है साल को, दिन को 
पल को और उसकी लय को,
प्रेम रचता है प्रेमी को, 
प्रिय को भी. कुछ सिद्ध नहीं हुआ 
कभी प्रेम के विरुद्ध, कि इतनी उत्कटता से 
जो होंठ चूमे थे तुमने, वे सच में थे ही नहीं.


                       ---


हाथपंखे के दो ओर लिखी पंक्तियाँ :
-- मैं तुम्हें चाहता हूँ भूलने के लिए --
-- मैं तुम्हें भूलता हूँ चाहने के लिए --


                      ---


मैं बनाता तुम्हारे अकेले का चित्र, 
पुरानी फ़ोटोग्राफ के 
आधुनिक कलश पर, 
या आईने की झूठी गहराईयों में --
जो होता 
तुम्हारे मन के लिए जीवित,
तुम्हारे कवि के लिए मृत.


-- डान पेटरसन



डान पेटरसन ( Don Paterson ) स्कॉटलैंड के कवि,लेखक  व संगीतकार हैं. वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ सेंट एंड्रूज़ में अंग्रेजी पढ़ाते हैं, लन्दन के प्रकाशक 'पिकाडोर' के लिए पोएट्री एडिटर हैं और एक बेहतरीन जैज़ गिटारिस्ट हैं . अपने पहले कविता संकलन 'निल निल' से ही उन्हें पहचाना जाने लगा व अवार्ड मिलने लगे. अपने संकलन ' गाडज़ गिफ्ट टू विमेन ' के लिए उन्हें टी एस एलीअट प्राइज़ प्राप्त हुआ. उनके एक और संकलन 'लैंडिंग लाईट ' को विटब्रेड पोएट्री अवार्ड व फिर से टी एस एलीअट प्राइज़ प्राप्त हुआ. उन्होंने दूसरी भाषाओँ से अंग्रेजी में बहुत अनुवाद भी किया है जिन में से सबसे उल्लेखनीय स्पेनिश कवि अंतोनियो मचादो व जर्मन कवि रिल्के की रचनाएँ हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों का संपादन किया है, नाटक लिखे हैं व विशेष रूप से रेडियो नाटक लिखे हैं. यह कविता उनके संकलन 'आईज ' से है, जिसे  स्पेनिश कवि अंतोनियो मचादो की कविताओं का अनुवाद भी कहा जा सकता है, या कहा जा सकता है की ये कविताएँ, उनकी कविताओं से प्रेरित हैं.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, फ़रवरी 07, 2012

अग्नि आलेख

ग्रोव ऑफ़ ओलिव ट्रीज़ इन बोरदीगेराह , क्लौद मोने
Grove of Olive Trees in Bordighera, Claude Monet

उन भारी-भरकम महीनों के दौरान 
मेरे जीवन में आग तभी लगती थी 
जब मैं तुम को प्यार करता था.
जुगनू भी जलता है और बुझ जाता है 
जलता है और बुझ जाता है 
-- उसकी बार-बार आती झलक
दिखाती थी हमें उसका रास्ता 
जैतून के पेड़ों के बीच रात के अँधेरे में.

उन भारी-भरकम महीनों के दौरान 
आत्मा बैठी रही, निष्क्रिय और पिटी हुई,
मगर देह ले लेती थी 
तुम तक पहुँचने वाली पहली राह,
रात्रि-आकाश धीमे-धीमे रंभाता था.
हम चुराते थे ब्रह्माण्ड का दूध 
और जीवित रहते थे.


-- तोमास त्रांसत्रोमर 



                               
तोमास त्रांसत्रोमर ( Tomas Tranströmer )स्वीडन के लेखक, कवि व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में, बल्कि दुनिया भर में सराही गयीं हैं. उन्हें 2011 का नोबेल पुरुस्कार प्राप्त हुआ है. उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक  कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओँ में अनूदित की गईं हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए है जिनमे इंटरनैशनल पोएट्री फोरम का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए कई वर्षों से नामित किये जा रहे थे. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पड़ा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता है, मगर दूसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन ' द हाफ -फिनिश्ड हेवन ' से है.


इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद उनके अभिन्न मित्र व अंग्रेजी के प्रख्यात कवि रोबेर्ट ब्लाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़