सोमवार, नवंबर 21, 2011

रोशनी का आना



वुमन बाए अ लैम्प, पॉल सीन्याक
Woman By A Lamp, Paul Signac

इतनी देर से भी ऐसा होता है :
प्यार का आना, रोशनी का आना.
तुम जाग जाते हो 
और जैसे दिये अपनेआप ही जल जाते हैं,
तारे इकट्ठे हो जाते हैं, 
सपने उड़ेल देते हैं अपनेआप को तुम्हारे तकियों में,
ऊपर की ओर छोड़ते हैं गुनगुनी हवा के गुलदस्ते.
इतनी देर से भी 
देह की अस्थियाँ चमकने लगती हैं 
और साँसें धधक उठती हैं
कल की होनेवाली मिट्टी में. 


--  मार्क स्ट्रैन्ड






 मार्क स्ट्रैन्ड ( Mark Strand )एक अमरीकी कवि, लेखक व अनुवादक हैं. 1990 में वे अमरीका के 'पोएट लौरेएट ' थे. वे कई जाने-माने विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी पढ़ा चुके हैं और आजकल  कोलम्बिया  युनिवेर्सिटी में अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं. उन्हें 'पुलित्ज़र प्राइज़ ' सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं. अब तक उनकी कविताओं, लेखों व अनुवादों के 30 से भी अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शनिवार, नवंबर 19, 2011

कुछ हमेशा खोया ही रहता है

सेल्फ पोर्ट्रेट, मार्क शगाल
Self Portrait, Marc Chagall

ठण्ड के मारे खोपड़ी झनझना रही है.
कोई बेधड़क होकर मुंह नहीं खोलता.
तुम्हारे जूते की ऐड़ी की तरह 
समय मुझे घिस देता है.

जीवन पा लेता है विजय जीवन पर.
आवाज़ मंद होती जाती है.
कुछ हमेशा खोया ही रहता है.
उसे याद करने की फुर्सत बिलकुल नहीं है.

तुम जानते हो, पहले सब बेहतर था.
लेकिन कोई तुलना नहीं की जा सकती 
कि पहले खून कैसे फुसफुसाता था 
और अब कैसे फुसफुसाता है.

साफ़ है कि कोई तो प्रयोजन है
जो हिला रहा है इन होंठों को.
पेड़ की फुनगी खिलखिलाती है 
और खेल जाती है
कुल्हाड़ियों के दिन से.


-- ओसिप मंदेलश्ताम 



Osip Mandelstam ओसिप मंदेलश्ताम  ( Osip Mandelstam )रूसी कवि व निबंधकार थे और विश्व साहित्य में भी उनकी गीतात्मक कविताओं का विशिष्ट स्थान है. वे यहूदी थे और उनका परिवार पोलिश मूल का था, मगर वे सेंट पीटर्सबर्ग में बड़े हुए. स्कूल के समय से ही वे कविता लिखने लगे थे. उन्होंने अपने समकालीन रूसी कवियों के साथ मिल कर 'एक्मेइज़म'  ( Acmeism ) की स्थापना की. 22 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ -- द स्टोन. जब उनकी कविताओं में रूसी क्रांति के दिग्भ्रमित होने का दुःख छलकने लगा, तो स्तालिन ने उन्हें निर्वासित कर दिया. उनके अनेक कविता व निबंध संग्रह प्रकाशित हुए व उनकी कविताओं का खूब अनुवाद भी किया गया है.
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद क्लेरन्स ब्राउन व डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, नवंबर 17, 2011

इतना कम

लिवाइअथन (जॉब 40 :21) , सेल्वाडोर डाली
Leviathan (Job 40:21), Salvador Dali

मैंने इतना कम कहा.
दिन छोटे थे.

छोटे दिन.
छोटी रातें.
छोटे साल.

मैंने इतना कम कहा.
मैं पिछड़ गया.

थक-हार गया मेरा मन 
आनंद से,
निराशा से,
उत्साह से, 
आशा से.

जकड़ रहे थे मुझे 
भीमकाय लिवाइअथन के जबड़े.

नग्न लेटा था मैं
निर्जन टापुओं के तट पे.

घसीट ले गई मुझे
दुनिया की यह सफ़ेद व्हेल मछली
अपने गहरी खाई में.

और अब मैं नहीं जानता
कि यथार्थ क्या था उस सब में.



-- चेस्वाफ़ मीवोश 



चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद चेस्वाफ़ मीवोश और लिलियन वाली ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

मंगलवार, नवंबर 15, 2011

मुझे लगता है तब सर्दियाँ होंगी...

द रोड टू वथई, स्नो एफ्फेक्ट, क्लौद मोने
The Road To Vetheuil, Snow Effect, Claude Monet 
मुझे लगता है तब सर्दियाँ होंगी
जब वह आएगा.
एक बिंदु उभरेगा,
सड़क की असहनीय सफेदी से,
इतना स्याह कि आँखें धुंधला जाएँगी,
और बहुत, बहुत समय तक
वह आता रहेगा समीप,
अपनी अनुपस्थिति और आगमन को
सम्मेय करता हुआ, 
और बहुत, बहुत समय तक
वह एक बिंदु ही रहेगा.
धूल का एक कण? आँख की जलन?
और बर्फ,
बर्फ के सिवाय कुछ भी नहीं होगा,
और बहुत, बहुत समय तक कुछ भी नहीं होगा,
और फिर वह बर्फीला पर्दा हटायेगा,
और वह पा लेगा आकार और तीनों आयाम,
वह आता रहेगा पास, और पास...
बस ये रही हद, वह और पास नहीं आ सकता,
मगर वह आता जा रहा है, आता जा रहा है,
अब हो गया है वह किसी नाप से भी बहुत बड़ा...


-- वेरा पाव्लोवा



वेरा पाव्लोवा ( Vera Pavlova ) रूस की सबसे प्रसिद्द समकालीन कवयित्री हैं. उनका जन्म मॉस्कोमें हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की व संगीत के इतिहास विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की. कुछ समय बाद ही उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई और उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ किया. उनके 14 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व रूस में उनकी किताबें खूब बिकती हैं. उन्होंने चार ओपेरा लिबेरेतोज़ के लिए संगीत लिखा है व कुछ बोल भी. उनकी कविताएँ 18भाषाओँ में अनूदित की गयी हैं. यह तीन कविताएँ उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन 'देयर इज समथिंग टू डिज़ायर' से हैं.
इन कविताओं का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीवन सेमूर ने किया है.

इन कविताओं का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, नवंबर 13, 2011

बचपन का उत्सव

रेड वाल डेस्टिनी, वैसिली कैनडिनस्की
Red Wall Destiny, Wassily Kandinsky

हवा भी चाहती है बनना
वह गाड़ी
जो तितलियाँ खींचतीं हैं.

मुझे याद है पागलपन:
मन के तकिये पर
टेक लगा कर पहली बार,
मैं अपनी देह से बातें कर रहा था.

मेरी देह बस एक ख्याल थी
जो मैंने लाल रंग से लिखा था.

सूरज का सबसे सुन्दर सिंहासन लाल था 
और बाकी सब रंग
लाल दरियों पर प्रार्थना करते थे.

रात एक और दीपक है.

हर टहनी में एक बाजू,
अंतरिक्ष में ले जाया गया एक सन्देश 
जो हवा की देह से गुंजित होता.

सूरज की हठ है कि वह धुंध ही पहनेगा 
जब भी मुझसे मिलेगा:
क्या मैं रोशनी से डांट खा रहा हूँ?

ओह, मेरे बीते दिन,
वे नींद में चलते थे 
और मैं उनका सहारा लेता था.

प्यार और स्वप्न दो कोष्ठक हैं.
उनके बीच में रखता हूँ मैं अपनी देह
और खोजता हूँ दुनिया को.

कई बार मैंने 
हवा को उड़ते देखा दो घास-पैरों से 
और सड़क को नाचते देखा हवा के बने पैरों से.

मेरी इच्छाएं फूल हैं
जो दाग लगा रहीं हैं मेरी देह पर.

मैं जल्दी घायल हुआ था,
और जल्दी सीखा था मैंने
कि घावों ने ही बनाया है मुझे.

जो मेरे भीतर चलता है
मैं अभी भी करता हूँ उस बच्चे का पीछा.

वह अब खड़ा है एक रोशनी से बनी सीढ़ी पर.
एक कोना ढूंढता हुआ,
करने के लिए आराम  
और पढने के लिए रात का चेहरा.

अगर चाँद एक घर होता 
मेरे पाँव उसकी देहरी छूने से मना कर देते.
धूल उन्हें ले जाती है
और मुझे लिए जाती है मौसमों की हवा के पास.

मैं चलता हूँ,
एक हाथ हवा में,
दूसरा हाथ सपनों में.

एक सितारा भी 
अंतरिक्ष के मैदानों में बस एक पत्थर है.

केवल वही
जो जुड़ा है क्षितिज से 
बना सकता है नए रास्ते.

क्या कहूँ मैं उस देह को जिसे 
छोड़ आया था मलबे में
उस घर के जहाँ मैं पैदा हुआ था?
कोई नहीं बता सकता मेरा बचपन 
सिवाय उन तारों के 
जो टिमटिमाते हैं उस के ऊपर 
और छोड़ जाते हैं पैरों के निशान
शाम के पथ पर.

मेरा बचपन पैदा हो रहा है अभी भी 
जुड़ी हथेलियों में एक रोशनी की 
जिसका नाम मैं नहीं जानता
और जो मुझे नाम देती है.

उस नदी को उसने बनाया एक आईना
और पूछा अपने दुःख के बारे में.
उसने बादलों की नक़ल की और अपनी 
उदासी में से बारिश बरसा दी.

तुम्हारा बचपन एक गाँव था.
चाहे तुम कितना भी दूर जाओ 
उसकी हदें तुम कभी पार नहीं कर पाओगे.
उसके दिन हैं झीलें
उसकी यादें तैरती लाशें.

तुम जो उतर रहे हो 
बीते कल के पर्वतों से,
तुम इन पर दोबारा कैसे चढ़ पाओगे,
और क्यों?

समय एक द्वार है
जो मैं खोल नहीं सकता.
मेरा जादू घिस गया है
मेरे मंत्र सो चुके हैं.

मैं एक गाँव में पैदा हुआ था,
जो था गर्भ की तरह छोटा और रहस्यभरा.
मैं उसको कभी छोड़ कर नहीं गया.
मुझे प्यार है सागर से, किनारों से नहीं.


-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शुक्रवार, नवंबर 11, 2011

चकित करती सांझ

द सेन एट बूज्यिवाल इन द ईवनिंग, क्लौद मोने
The Seine At Bougival In The Evening, Claude Monet
कोई अनजानी धूल है 
कहीं हमारे पास ही 
एकदम पहाड़ी के दूसरी ओर
किनारों पर बिखरती हुई लहरें
जो हमने कभी नहीं देखे,
ऐसे पंछियों से भरे हुए पेड़ 
गहरे रंग की मछलियों से भरे,
ऊपर खिचे हुए जाल.

सांझ आती है;
हम ऊपर देखतें हैं और वह वहां है 
वह आई है छन के तारों के जाल में से  
घास की मलमल में से 
चुपचाप चलती हुई पानी के आश्रयों पर.

हम सोचते हैं कि कभी नहीं होगा दिन का अंत :
हमारे बाल ऐसे हैं जो लगते हैं
कि रोशनी के लिए ही बने हैं;
मगर अंततः रात का शांत पानी चढ़ेगा 
और जैसा कि पानी के तले वह करती है 
हमारी खाल देखेगी दूर, बहुत दूर तक.



--- रोबर्ट ब्लाए 



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, नवंबर 09, 2011

रात्रि विवाह

लवर्स ओवर सेंट-पॉल, मार्क शगाल
Lovers Over Saint-Paul, Marc Chagall

जब मैं बत्ती बुझा देती हूँ 
और हमारे बीच के अँधेरे मील 
ढह जाते हैं, गिर जाते हैं,
तुम स्वयं से सरक आते हो 
मेरी नींद में मेरी प्रतीक्षा करने,
चाँद का चेहरा बादल में छिप जाता है;

या मैं जागती हूँ 
तुम्हारे सपनों में बिताये 
लम्बे घंटों से वंचित-सी,
जंगल में एक पंछी 
रोता है अपने धीमे स्वर,
गहरे-रंग की मछलियाँ 
तैरती हैं नदी की खाल तले.

रात्रि विवाह, ये चंद घंटे जो जोड़ते हैं हमें,
एक दूसरे की ओर चेहरा किए
जब हम सोते हैं और देखते हैं स्वप्न;
यह लम्बी रात, पूरी की पूरी 
हमारा कमरा होती है.



-- कैरल एन डफ्फी



कैरल एन डफ्फी ( Carol Ann Duffy )स्कॉट्लैंड की कवयित्री व नाटककार हैं. वे मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन युनिवेर्सिटी में समकालीन कविता की प्रोफ़ेसर हैं. 2009 में वे ब्रिटेन की पोएट लॉरीअट नियुक्त की गईं. वे पहली महिला व पहली स्कॉटिश पोएट लॉरीअट हैं. उनके स्वयं के कई कविता संकलन छ्प चुके हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों को सम्पादित भी किया है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान व अवार्ड मिल चुके हैं. सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं व स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी हैं. यह कविता उनके 2005 में छपे संकलन ' रैप्चर ' से है, जिसे टी एस एलीअट प्राइज़ मिला था.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़