सोमवार, दिसंबर 24, 2012

प्रेम ना करना

इन द वुडज़ एट विंटर, आइसाक लेवितान
In the Woods at Winter, Isaac Levitan
जाड़ों के पेड़ों से सीखो, कैसे
वे अपनी पत्तियों को चूम कर फ़ेंक देते हैं,
फिर अपनी हथेलियों में छुपा अपना व्यथित
चेहरा, बर्फ हो जाते हैं;
           
                   या घड़ियों से,
नज़रें फेर लेना, प्रेम न करती रोशनी , छोटे दिन
कहने के लिए कुछ न बचना; एक गिरजाघर
सांझ के सागर पर जैसे एक भुतहा जहाज़.
 
एक पत्थर से सीखो,
उसकी अर्थहीन दिल जैसी आकृति,
अनवरत ठण्ड से सिद्ध; या उस से बड़े चाँद से,
अडिग हो आकाश में घुलना, या सितारों से,
जो निर्जीव हैं लातिनी क्रियाओं की तरह.

                               नदी से सीखो,
हमेशा कहीं और बहना, उसके नाम का भी,
बदलना, बदलते रहना; रस्सी से सीखो
जो लटकी है टहनी से फंदे की तरह, एक कोसता कौवा,

एक मरे हुए बगुले का शोक मनाती मक्खियों की सभा.
सीखो भौंचक्के बाग़ से, गर्मियों की कब्र,
जहाँ कुछ नहीं उगता, जाल के फटे हुए घूंघट से
किसी बीस्ट* का गुलाब तक नहीं;

                                       हमारी रोज़ की रोटी से:
निरंतर बारिश, आंसुओं जैसी नहीं, जो त्यागती है बादलों का प्रेम;
भाषा से जो त्यागती है प्रेम के प्रेम को; यह बासी हवा भी नहीं करती प्रेम 
अब उन सब जगहों से, जहाँ तुम होते थे.


-- कैरल एन डफ्फी



 कैरल एन डफ्फी ( Carol Ann Duffy )स्कॉट्लैंड की कवयित्री व नाटककार हैं. वे मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन युनिवेर्सिटी में समकालीन कविता की प्रोफ़ेसर हैं. 2009 में वे ब्रिटेन की पोएट लॉरीअट नियुक्त की गईं. वे पहली महिला व पहली स्कॉटिश पोएट लॉरीअट हैं. उनके स्वयं के कई कविता संकलन छ्प चुके हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों को सम्पादित भी किया है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान व अवार्ड मिल चुके हैं. सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं व स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी हैं. यह कविता उनके 2005 में छपे संकलन ' रैप्चर ' से है, जिसे टी एस एलीअट प्राइज़ मिला था.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  


* 'ब्यूटी एंड द बीस्ट' कथा में बीस्ट गुलाब तोड़ने की सज़ा के रूप में जान मांगता है 

शनिवार, दिसंबर 22, 2012

उनींदेपन का उपचार

पोर्ट्रेट ऑफ़ अ वुमन, अमेदेओ मोदिग्लियानी
Portrait of a Woman, Amedeo Modigliani
पहाड़ से उतरती भेड़ें नहीं
न ही छत में पड़ी दरारें --
गिनों उन्हें जिनसे प्रेम किया है तुमने,
तुम्हारे सपनों के भूतपूर्व किरायेदार
जो तुम्हें सोने नहीं देते थे,
जो कभी तुम्हारी पूरी दुनिया थे,
झुलाया था जिन्होनें तुम्हें अपनी बाहों में,
जिन्होनें तुमसे प्रेम किया था...
सो जाओगी तुम, भोर होने तक,
नयनों में अश्रु लिए.



-- वेरा पाव्लोवा 




 वेरा पाव्लोवा ( Vera Pavlova) रूस की सबसे प्रसिद्द समकालीन कवयित्री हैं. उनका जन्म मॉस्कोमें हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की व संगीत के इतिहास विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की. कुछ समय बाद ही उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई और उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ किया. उनके 14 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व रूस में उनकी किताबें खूब बिकती हैं. उन्होंने चार ओपेरा लिबेरेतोज़ के लिए संगीत लिखा है व कुछ बोल भी. उनकी कविताएँ 18भाषाओँ में अनूदित की गयी हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन 'लेटर्ज़ टू अ रूम नेक्स्ट डोर : 1001 कन्फेशंज़ ऑफ़ लव ' से है.

इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीवन सेमूर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, दिसंबर 20, 2012

क्या चाह ने तुम्हें सदा विचलित नहीं किया?

गेब्रिएल मुनटः, वैसिली कैनडिनस्की
Gabriele Munter, Wassily Kandinsky 
क्या चाह ने तुम्हें सदा विचलित नहीं किया,
मानो कोई प्रेमी अभी प्रकट होने ही वाला हो?

स्वयं को महसूस करने दो इस चाह को.
वह उनसे जोड़ती है तुम्हें 
जिन्होंने सदियों से गाया है इसे,
और गाया है विशेषतः अनुत्तरित प्रेम.
इस प्राचीनतम दुःख का अंततः
क्या फल नहीं मिलना चाहिए हमें?




-- रायनर मरीया रिल्के 




 रायनर मरीया रिल्के ( Rainer Maria Rilke ) जर्मन भाषा के सब से महत्वपूर्ण कवियों में से एक माने जाते हैं. वे ऑस्ट्रिया के बोहीमिया से थे. उनका बचपन बेहद दुखद था, मगर यूनिवर्सिटी तक आते-आते उन्हें साफ़ हो गया था की वे साहित्य से ही जुड़ेंगे. तब तक उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित भी हो चुका था. यूनिवर्सिटी की पढाई बीच में ही छोड़, उन्होंने रूस की एक लम्बी यात्रा का कार्यक्रम बनाया. यह यात्रा उनके साहित्यिक जीवन में मील का पत्थर साबित हुई. रूस में उनकी मुलाक़ात तोल्स्तॉय से हुई व उनके प्रभाव से रिल्के का लेखन और गहन होता गुया. फिर उन्होंने पेरिस में रहने का फैसला किया जहाँ वे मूर्तिकार रोदें के बहुत प्रभावित रहे.यूरोप के देशों में उनकी यात्रायें जारी रहीं मगर पेरिस उनके जीवन का भौगोलिक केंद्र बन गया. पहले विश्व युद्ध के समय उन्हें पेरिस छोड़ना पड़ा, और वे स्विटज़रलैंड में जा कर बस गए, जहाँ कुछ वर्षों बाद ल्यूकीमिया से उनका देहांत हो गया. कविताओं की जो धरोहर वे छोड़ गए हैं, वह अद्भुत है. यह अंश उनकी "दुईनो एलेजीज़ " से है। 

इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़ ने किया है. 
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़