शुक्रवार, सितंबर 21, 2012

चाँद

ईवनिंग लैंडस्केप विद राइज़िंग मून,
विन्सेंट वान गोग
Evening Landscape with Rising Moon,
Vincent Van Gogh
जिस तरह वह चाँद, विस्मयकारी, उद्देश्यपूर्ण,
अचानक पर्वत के उस-पार से बाहर कदम रखता है,
और रात को लाता है एक शांत पूर्णता पर,
वैसे ही मेरा स्वर उठता है निर्मल
'जो नहीं है' के पर्वतों के उस-पार से.
और वे ठगी-सी जगहें जहाँ तुम बसे और चले गए
और खुल के दुखती हैं तुम्हारे लिए.



-- रायनर मरीया रिल्के




 रायनर मरीया रिल्के ( Rainer Maria Rilke ) जर्मन भाषा के सब से महत्वपूर्ण कवियों में से एक माने जाते हैं. वे ऑस्ट्रिया के बोहीमिया से थे. उनका बचपन बेहद दुखद था, मगर यूनिवर्सिटी तक आते-आते उन्हें साफ़ हो गया था की वे साहित्य से ही जुड़ेंगे. तब तक उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित भी हो चुका था. यूनिवर्सिटी की पढाई बीच में ही छोड़, उन्होंने रूस की एक लम्बी यात्रा का कार्यक्रम बनाया. यह यात्रा उनके साहित्यिक जीवन में मील का पत्थर साबित हुई. रूस में उनकी मुलाक़ात तोल्स्तॉय से हुई व उनके प्रभाव से रिल्के का लेखन और गहन होता गुया. फिर उन्होंने पेरिस में रहने का फैसला किया जहाँ वे मूर्तिकार रोदें के बहुत प्रभावित रहे.यूरोप के देशों में उनकी यात्रायें जारी रहीं मगर पेरिस उनके जीवन का भौगोलिक केंद्र बन गया. पहले विश्व युद्ध के समय उन्हें पेरिस छोड़ना पड़ा, और वे स्विटज़रलैंड में जा कर बस गए, जहाँ कुछ वर्षों बाद ल्यूकीमिया से उनका देहांत हो गया. कविताओं की जो धरोहर वे छोड़ गए हैं, वह अद्भुत है. यह कविता उनके संकलन 'अनकलेकटिड पोएम्ज़' से है.
इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़ ने किया है. 
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

1 टिप्पणी:

  1. कुछ कविताएं ऐसी होती हैं कि जिनके शब्दों की छुअन उंगलियों की पोरों पर महसूस की जा सकती हैं.. जरा ठहर कर पढ़ें इसे... "विस्मयकारी","उद्देश्यपूर्ण", "शांत पूर्णता"..."निर्मल"...."ठगी-सी जगहें", "और खुल के दुखती"...यहाँ तक की 'जो नहीं है' उसका
    स्पर्श भी आप अपनी उंगलियों पर महसूस कर सकते हैं.

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