गुरुवार, अक्तूबर 25, 2012

पतझड़ी आकाश

स्टारी नाईट, विन्सेंट वान गोग
Starry Night, Vincent Van Gogh
मेरी परदादी के समय में,
चाहिए होता था केवल एक झाड़ू *
देखने के लिए कोई भी जगह
और करने के लिए
आकाश में बत्तखों का पीछा.

               •

सितारे सब जानते हैं,
तो हम करते हैं कोशिश उनका मन पढने की.
इतने दूरस्थ हैं वो फिर भी,
उनकी उपस्थिति में फुसफुसा के बोलते हैं हम.

               •

ओह सिंथिया,
उस घड़ी को जिसने खो दी हैं अपनी सुइयाँ
घुमाने ले जाओ.
होटल अनंतता में ले देना मुझे एक कमरा
जहाँ समय-समय पर रुकना पसंद है समय को.

               •

अँधेरे कोनों के प्रेमियों, आओ,
कहता है आकाश,
और बैठे मेरे किसी अँधेरे कोने में.
आज मूंगफली के कटोरे में
नन्हे स्वादिष्ट शून्य हैं.


-- चार्लज़ सिमिक 





 चार्लज़ सिमिक (Charles Simic ) एक सर्बियाई-अमरीकी कवि, निबंधकार, अनुवादक व दार्शनिक हैं। उनका जन्म युगोस्लाविया में हुआ और वे युद्ध-त्रस्त यूरोप में बड़े हुए। 1954 में,16 वर्ष की आयु में वे अपने परिवार के साथ अमरीका आ गए। 70 के दशक तक वे कवि के रूप में स्थापित हो गए। उनकी कविताएँ सूक्ष्म व बिम्बों से भरपूर होती हैं। वे पेरिस रिव्यू के सम्पादक रह चुके हैं व अमरीका के 15 वें पोएट लौरियेट भी। आजकल वे अमरीकी साहित्य व क्रिएटिव राइटिंग के प्रोफ़ेसर एमेरिटस हैं, व यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू हेम्पशियर में पढ़ाते हैं। उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताओं के 30 से अधिक संकलन, अनुवादों के 15 संकलन व गद्य के 8 संकलन प्रकाशित हो चुके है।
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

*झाड़ू पर बैठ जादूगरनी उड़ा करती थी, और कहीं भी जा सकती थी.

2 टिप्‍पणियां:

  1. अब न वो झाड़ू रही और न वे बतखें जिनके बहाने हम तुम मिल सकते और सितारों के मन पढ़ने की कोशिश करते !

    बहुत सुन्दर कविताये और उनका अनुवाद !

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  2. कविता नहीं चार पूरी कवितायें हैं एक से बढ़ कर एक...

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