गुरुवार, जून 07, 2012

आधी रात का वर्तन-बिंदु

फर, इवान शिशकिन

Fir, Ivan Shishkin


बिना हिले, जंगल में चींटी ताकती है
शून्य में. और गहरी हरियाली की 
टिक-टिक के सिवाय कुछ भी सुनाई 
नहीं देता, रात भर गर्मी की गहरी खाई 
में गहरे कहीं से आती है मंद-सी ध्वनि.

देवदार का पेड़ एक बिंदु पर है, घड़ी की नुकीली
सुई की तरह. पर्वत की छाया में चींटी प्रदीप्त है.
एक पंछी करता है कर्कश कलरव. अंततः
बादलों का रथ धीरे-धीरे आगे लुढ़कने लगता है.

 
-- तोमास त्रांसत्रोमर 



तोमास त्रांसत्रोमर ( Tomas Tranströmer )स्वीडन के लेखक, कवि व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में, बल्कि दुनिया भर में सराही गयीं हैं. उन्हें 2011 का नोबेल पुरुस्कार प्राप्त हुआ है. उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक  कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओँ में अनूदित की गईं हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए है जिनमे इंटरनैशनल पोएट्री फोरम का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए कई वर्षों से नामित किये जा रहे थे. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पड़ा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता है, मगर दूसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं. यह कविता उनके संकलन ' द सैड गोंडोला' से है.

इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद उनके कवि रोबेर्ट फुल्टन ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, जून 05, 2012

प्रवसन

लवर्ज़ विद फ्लार्ज़, मार्क शगाल
Lovers with Flowers, Marc Chagall


अँधेरे में शुरू होता है दुनिया का प्रवसन:
उसके पेड़ टहलते हैं रात की धरती के साथ-साथ,
उसके अंगूरी गुछ्छे भर जाते हैं सुनहरी सुरा से,
उसके सितारे घर-घर भटकते फिरते हैं,
उसकी नदियाँ बहने लगती हैं पीछे की ओर!
और तुम्हारी छाती पर सर टिकाये -- 

सोना चाहती हूँ मैं.




-- मारीना स्व्ताएवा 



  मारीना स्व्ताएवा ( Marina Tsvetaeva ) बहुत प्रसिद्द रूसी लेखिका व कवयित्री थीं और उनको 20 वीं सदी के बेहतरीन रूसी साहित्यकारों में गिना जाता है. 18 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन 'ईवनिंग एल्बम' प्रकाशित हुआ. वे रूसी क्रांति व उसके बाद मास्को में पड़े अकाल के समय वहीँ थी. क्योंकी वे क्रांति के खिलाफ थी उन्हें निर्वासित कर दिया गया. कई साल वे अपने परिवार के साथ गरीबी की हालत में पेरिस, बेर्लिन्र व प्राग में रहीं. मास्को लौटने के बाद भी उन्हें शक की नज़र से देखा जाता रहा व उनके परिवार को कसी न किसी कारण से सताया जाता रहा, उनकी बेटी कई वर्ष जेल में रहीं, व पति को मार डाला गया. बिना किसी आर्थिक सहारे के व नितांत अकेलेपन में, उन्होंने आत्महत्या कर ली.
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद इल्या कामिन्सकी व यौं वालोंतीन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, जून 03, 2012

यह प्रेम

डांस इन द कंट्री, पिएर-ओग्यूस्त रनोआ
Dance in the Country, Pierre-Auguste Renoir
यह प्रेम
इतना प्रचण्ड
इतना कोमल
इतना मधुर
इतना निराश
यह प्रेम
दिन-सा अच्छा
मौसम सा ख़राब
जब ख़राब होता है मौसम
यह प्रेम इतना सच्चा
यह प्रेम इतना सुन्दर
इतना आनंदित
इतना मग्न
इतना उपहासपूर्ण
डरा हुआ सहमा हुआ अँधेरे में बच्चे-सा
और एकदम निडर
आधी रात में आराम से घूमते आदमी-सा
यह प्रेम जो दूसरों को डराता है
अफवाहें उड़वाता है
चेहरों से रंग उड़ाता है
यह प्रेम यह शिकार
जिसके लिए हम घात लगाये बैठते हैं
जिसका पीछा करते हैं
यह आहत प्रेम चोट खाया, रौंदा, नकारा, भूला हुआ

क्योंकि हम इसे चोट पहुंचाते हैं पैरों तले रौंदते हैं  
मार देते हैं नकार देते हैं भूल जाते हैं
यह सारा प्रेम
अभी भी कितना जीवित
अभी भी पूरा उजला
यह तुम्हारा है
यह मेरा है
यह जो हमेशा था
यह जो रोज़ नया है
और जो कभी नहीं बदला
एक पौधे-सा असली
एक पंछी-सा काँपता हुआ
वसंत-सा गुनगुना और जीवित
हम दोनों
जा सकते हैं और लौट सकते हैं
हम भूल सकते हैं
और फिर सो सकते हैं
जाग सकते हैं तड़प सकते हैं बूढ़े हो सकते हैं  
सोए रह सकते हैं
सपने देखते रह सकते हैं
मरने तक
जाग सकते हैं मुस्कुरा सकते हैं हंस सकते हैं
और फिर जवान हो सकते हैं
हमारा प्यार वैसा ही रहेगा
टट्टू-सा अड़ियल
चाह-सा जीवंत
यादों-सा निर्मम
यादों-सा कोमल
पछतावे-सा बेतुका
संगमरमर-सा ठंडा
बच्चे-सा नाज़ुक
अच्छे दिन-सा
हमें मुस्कुरा कर देखेगा
हम से बिना कुछ कहे बात करेगा
और मैं काँपते हुए सुनूंगा
और मैं पुकार उठूंगा
मैं तुम्हारे लिए पुकारूँगा
मैं अपने लिए पुकारूँगा
मैं तुमसे भीख मांगूंगा
तुम्हारे लिए
अपने लिए
उन सब के लिए जो प्यार करते हैं
एक दूसरे को
हाँ मैं उसे पुकारूँगा
तुम्हारे लिए अपने लिए
और बाकी सब के लिए
जिन्हें मैं जानता तक नहीं
वहीँ रहो
वहीँ जहाँ तुम हो
जहाँ तुम हमेशा से थे
वहीँ रहो
हिलो नहीं
कहीं जाओ नहीं
हम जो प्रेम करते हैं
तुम्हे भूल गए थे
तुम हमें मत भूलो
तुम्हारे सिवा हमारा यहाँ कोई नहीं है
हमें एक-दूसरे से उदासीन मत होने दो
हर रोज़ दूर मत जाने दो
और हम जहाँ भी हों
हमें जीने का संकेत दो
और बहुत देर बाद किसी वन के किसी कोने में
यादों के जंगल में
अचानक मिल जाना
हाथ बढ़ा कर
बचा लेना
हमें 



-- याक प्रेवेर 



  याक प्रेवेर  ( Jacques Prévert )फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है.
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शुक्रवार, जून 01, 2012

प्यार रहेगा मेरा मालिक

बूलेवार मोंमार्त्र, स्प्रिंग रेन, कामील पिस्सार्रो
Boulevard Montmartre, Spring Rain,
Camille Pissarro
मैंने तुमसे वादा किया था
कि जाने की कोई भी जगह नहीं है फिर भी 
मैं पांच मिनट में गायब हो जाऊँगा?
बारिश अभी भी
सड़क पर पानी की चादरें बिछा रही है
कहीं पर कोई आश्रय नहीं है, फिर भी?
शहर के कॉफ़ी-बार करते हैं
ऊब को परिभाषित,
यूँ अकेला मैं किस ओर निकल जाऊं?
जब तुम समुद्र हो
तुम्हीं हो पाल
और तुम ही यात्रा
क्या ऐसा हो सकता है कि
जब तक बारिश न रुक जाए
मैं दस मिनट के लिए और रुक जाऊं?
निश्चित है कि मैं चला ही जाऊंगा
बादलों के आगे बढ़ जाने के बाद
और हवाओं के थम जाने के बाद
नहीं तो, सुबह तक मैं रहूँगा
तुम्हारा मेहमान



-- निज़ार क़ब्बानी



निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और जेरेमी रीड ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, मई 30, 2012

बत्तियाँ गुल

बर्निंग द डार्क, निकोलाई ररीह
Burning the Dark, Nicholas Roerich

बूढ़ा दुखित पतझड़ बुलाता जा रहा है
अपनी गर्मियों को
घाटी बुलाती जा रही है पर्वत के पार
अन्य घाटियों को
हर सितारा अपने अँधेरे में अकेला गरजता है
पूरी रात में नहीं है किसी आवाज़ की आहट भी 




-- डब्ल्यू एस मर्विन



W.S. Merwin डब्ल्यू एस मर्विन ( W S Merwin )अमरीकी कवि हैं व इन दिनों अमरीका के पोएट लॉरीअट भी हैं.उनकी कविताओं, अनुवादों व लेखों के 30 से अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं .उन्होंने दूसरी भाषाओँ के प्रमुख कवियों के संकलन, अंग्रेजी में खूब अनूदित किये हैं, व अपनी कविताओं का भी स्वयं ही दूसरी भाषाओँ में अनुवाद किया है.अपनी कविताओं के लिए उन्हें अन्य सम्मानों सहित पुलित्ज़र प्राइज़ भी मिल चुका है.वे अधिकतर बिना विराम आदि चिन्हों के मुक्त छंद में कविता लिखते हैं.यह कविता उनके संकलन 'द शैडो ऑफ़ सिरिअस ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, मई 28, 2012

बस और नहीं रूढोक्तियाँ

हेड ऑफ़ ए वुमन, डेविड बर्ल्यूक
Head of a Woman, David Burliuk
दिव्य चेहरा
जो गुलबहार जैसे खोल देता है अपनी पंखुड़ियाँ सूरज की ओर
वैसे ही तुम खोल देती हो
अपना चेहरा मेरी ओर जब मैं पन्ना पलटता हूँ.

मोहक मुस्कान
कोई भी आदमी हो सकता है तुम्हारे जादू में गिरफ्त,
ओ पत्रिका की सुंदरी.

कितनी कविताएँ लिखी गयी हैं तुम्हारे लिए?
कितने दांते तुम्हें पत्र लिख चुके हैं, बेआत्रीस?
तुम्हारी सम्मोहनी माया को
तुम्हारी निर्मित फंतासी को.

मगर आज एक और रूढोक्ति के तहत
यह कविता मैं तुम्हारे लिए नहीं लिखूंगा.
नहीं. और रूढोक्तियाँ नहीं.

यह कविता समर्पित है उन स्त्रीयों को
जिनका सौंदर्य है उनकी सौम्यता में,
उनकी बुद्धि में,
उनके चरित्र में
न कि उनके बनाये हुए रूप में.

यह कविता तुम्हारे लिए है

तुम जो शहरज़ाद की तरह
रोज़ उठती हो एक नई कहानी के साथ,
कहानी जो गाती है बदलाव का गीत
जो करती है संघर्ष की उम्मीद
संघर्ष दो देहों के एक होने के प्रेम के लिए
संघर्ष नए दिन के संग जागे नए आवेशों के लिए
संघर्ष उपेक्षित अधिकारों के लिए
या संघर्ष केवल एक और रात जीवित रहने के लिए.

हाँ, यह तुम्हारे लिए है,
तुम जो जीती हो दुःख की दुनिया में
तुम जो हो हर पल नष्ट होते ब्रह्माण्ड का चमकता सितारा,
तुम जो हो एक-हज़ार-एक लड़ाइयों की योद्धा,
तुम्हारे लिए, मेरे मन की मीत.

अब से, मेरा सिर झुक कर नहीं देखेगा कोई पत्रिका,
बल्कि उठ कर निहारेगा रात को,
और उसके चमकते सितारों को,
तो अब और रूढोक्तियाँ नहीं.




-- ओक्तावियो पास 




ओक्तावियो पास ( Octavio Paz )मेक्सिको के लेखक व कवि थे. वे कुछ साल भारत में मेक्सिको के राजदूत भी रहे. उनके लेखन पर मार्क्सवाद, स्यूरेयालीज्म, एग्ज़िस्टेन्शलिज़म के साथ हिन्दू व बौध धर्मों का भी बहुत प्रभाव रहा. उनकी कविताओं व निबंधों के असंख्य संकलन प्रकाशित हुए हैं व अनेक भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है. सैम्युएल बेकेट, एलीजाबेथ बिशप, मार्क स्ट्रैंड जैसे जाने-माने कवियों-लेखकों ने उनके लेखन का अंग्रेजी में अनुवाद किया है. सर्वंतेस प्राइज़ व 1990 के नोबेल पुरस्कार सहित उन्हें अनेक सम्मान मिले थे.
इस कविता का मूल स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद एलियट वाइनबर्गर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, मई 26, 2012

भेद

आरिस्तीद ब्रुओं ऑन हिज़ बाइसिकल,
ओंरी तूलूज़-लौत्रेक
Arisitide Bruant on His Bicycle,
Henri Toulouse-Lautrec

जब तुम सोफे पर सो रही थीं
तुम्हारे कान से अपना कान लगा कर
सुनता रहा मैं तुम्हारे सपनों की प्रतिध्वनियाँ.

यही है वह महासागर जिसमें डुबकी लगाना चाहता हूँ मैं,
विलीन हो जाना चाहता हूँ सुन्दर मछलियों में,
प्लवक में, समुद्री डाकुओं के जहाज़ों में.

मैं पास जाता हूँ सड़क पर चलते उन लोगों के
जो कुछ-कुछ तुम्हारे जैसे दिखते हैं,
पूछता हूँ उनसे वह सवाल जो मैं तुमसे पूछता.

क्या हम बैठ सकते हैं छत पर और देख सकते हैं तारों को
धुआँरे से निकले धुएँ में घुलते हुए?
तुम्हारी साँसों के जंगल में 

क्या मैं टार्ज़न की तरह झूल सकता हूँ?

मैं नहीं चाहता तुम्हारी बाहों में होना.
मैं बस चाहता हूँ कि वह साईकल चला रहा होता
जो जाती तुम्हारी बाहों की ओर.





--  जेफ्फ्री मकडेनिअल 



जेफ्फ्री मकडेनिअल ( Jeffrey McDaniel ) एक अमरीकी कवि हैं. स्कूल के समय से ही वे साहित्यिक गतिविधियों से जुड़ने लगे थे. कॉलेज में वे कॉलेज की राष्ट्रिय साहित्य पत्रिका के सम्पादक थे. वे पोएट्री थियेटर व पोएट्री स्लेम जैसी गतिविधियों में भाग लेने लगे. पढाई पूरी करने के बाद उनका सारा समय लेखन, कविता और क्रिएटिव राइटिंग पढ़ाने में व उसे लोकप्रिय बनाने में बीतता है. वे पोएट्री इन कम्युनिटी प्रोजेक्ट्स से जुड़े हुए हैं और खासकर स्कूली छात्रों को कविता से जोड़ने के प्रयास में रत हैं. यह कविता उनके संकलन 'द फॉरगिवनेस परेड 'से है.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़