शनिवार, अक्टूबर 13, 2012

हम धनी हैं...

कपल ऑन रेड बैकग्राउंड,
मार्क शगाल
Couple on Red background,
Marc Chagall



हम धनी हैं: खोने के लिए कुछ नहीं है हमारे पास.
हम बूढ़े हैं: उतावली में दौड़ कर हमें कहीं नहीं जाना.
हम फुला लेंगे अतीत के तकिये,
आने वाले दिनों के अंगारों को हवा देंगें,
और जैसे-जैसे कम होगी दिन की आलसी रोशनी,
बात करेंगे उसके बारे में जो सबसे अधिक मायने रखता है.
हम दफ़ना देंगे अपने अमर मृतकों को:
मैं तुम्हें दफ़नाउंगी, तुम मुझे दफ़नाओगे.



-- वेरा पाव्लोवा 




 वेरा पाव्लोवा ( Vera Pavlova) रूस की सबसे प्रसिद्द समकालीन कवयित्री हैं. उनका जन्म मॉस्कोमें हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की व संगीत के इतिहास विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की. कुछ समय बाद ही उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई और उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ किया. उनके 14 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व रूस में उनकी किताबें खूब बिकती हैं. उन्होंने चार ओपेरा लिबेरेतोज़ के लिए संगीत लिखा है व कुछ बोल भी. उनकी कविताएँ 18भाषाओँ में अनूदित की गयी हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन 'लेटर्ज़ टू अ रूम नेक्स्ट डोर : 1001 कन्फेशंज़ ऑफ़ लव ' से है.
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीवन सेमूर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, अक्टूबर 11, 2012

कम चाहोगे...

एक्सेंट ऑन रोज़, वैसिली कैँडिनस्की
Accent on Rose, Wassily Kandinsky



कम चाहोगे: सब होगा तुम्हारे पास
कुछ नहीं चाहोगे: तुम मुक्त हो जाओगे.
वही प्रेम जिस से हमें प्रेम किया जाता है
पीड़ित करता है हमें अपने चाहने से.




-- फेर्नान्दो पेस्सोआ ( रिकार्दो रेइस)



 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने रिकार्दो रेइस ( Ricardo Reis )के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग  जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ  के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने  मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'ओड्ज़' से है.
इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

मंगलवार, अक्टूबर 09, 2012

सांझ

ऑटम लैंडस्केप एट डस्क,
विन्सेंट वान गोग
Autumn Landscape at Dusk
Vincent van Gogh


सांझ गले से पकड़ लेती है समय को
    और लटका देती है उस गढ्ढे के ऊपर
    जहाँ अध-घुटी
    छटपटाती हैं मेरे प्रेम की भविष्यवाणियाँ

वे सूर्य जिन्हें अभी भी खोजता है जीवन  
    छुपे हैं उस बच्चे के चेहरे में
    जो उत्पन्न होता है अपने स्वप्नों के नारीत्व से



-- अदुनिस




Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके 2003 के संकलन 'बिगिनिन्ग्ज़ ऑफ़ द बॉडी, एंडज़ ऑफ़ द सी' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

रविवार, अक्टूबर 07, 2012

मेरे घर

स्टिल लाइफ विद पेप्पर्ज़ ऑन अ व्हाइट लैकर्ड टेबल,
फीलिक्स वालोतों
Still Life with Peppers on a White Lacquered Table,
Felix Vallottan
कभी तो आओगी तुम मेरे घर
हालाँकि यह घर मेरा नहीं है  
नहीं जानता किसका है
मैं तो यूँ ही घुस आया था एक दिन
यहाँ कोई नहीं था
सिर्फ थी कुछ लाल मिर्चें
सफ़ेद दीवार पर लटकी हुईं
बहुत दिनों से रह रहा हूँ इस घर में
और कभी कोई नहीं आया
मगर हर रोज़ हर दिन
मैंने तुम्हारा इंतज़ार किया है

कभी तो आओगी तुम मेरे घर
मैं और कुछ भी सोचता हूँ
मगर कुछ और नहीं सोच पाता
सिवा इसके
और जब तुम 
रखोगी कदम मेरे घर में  
धीरे से तुम उतार दोगी
जो भी तुमने पहना होगा
और तुम खड़ी रहोगी वैसे ही
बिना कुछ पहने
और तुम्हारे होंठ वैसे लाल होंगे
जैसी लाल मिर्चें
सफ़ेद दीवार पर लटकी हुईं
और फिर तुम लेट जाओगी
और मैं भी लेट जाऊँगा
तुम्हारे पास
और बस
तुम आओगी मेरे घर
यह घर जो मेरा नहीं है



-- याक प्रेवेर




 याक प्रेवेर  ( Jacques Prévert )फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है. 
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शुक्रवार, अक्टूबर 05, 2012

जब मैं होता हूँ तुम्हारे साथ

द फेंस, जॉन सिंगर सार्जेंट
The Fence, John Singer Sargent
जब मैं होता हूँ तुम्हारे साथ, सरोद के दो स्वर
ले जाते हैं मुझे ऐसी जगह जहाँ मैं नहीं होता.
सारे खेत हवा हो गए हैं.

वे बाड़े के लकड़ी के खम्बे,
जो जब मैं बच्चा था मुझे अच्छे लगते थे --
उनकी लकड़ी में से मैं देख सकता हूँ अपने पिता का चेहरा,
और उनके चेहरे में से गहाई के अंत के समय का आकाश.

यह सुनना कितनी बड़ी कृपा है कि हम मर जायेंगे.
भौंकने की दस हज़ार आवाजें एक लाख बन जाती हैं;
मैं जानता था यह स्वयं से मेरी दोस्ती हमेशा नहीं चलने वाली.

छेड़ो एक बार फिर सरोद के तार को, ताकि वह उंगली
जिसने क्षण भर पहले छुआ था मेरी देह को
बन पाए एक वज्रपात जो बंद कर दे द्वार.

अब जान गया हूँ कि 'तुम' शब्द की ओर मैं क्यों करता हूँ संकेत --
तुम का स्वर मुझे ले जाता है सीमा पार.
हम वैसे ही गायब हो जाते हैं जैसे जन्मता है एक बच्चा.

पूरी दोपहर मेरे नाम का कोई पागल
कोशिश करता रहा है बाड़े के ठोस पटरों में से
झाँकने की. उस बच्चे से कहो अभी समय नहीं हुआ है.


--  रोबर्ट ब्लाए



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, अक्टूबर 03, 2012

गहरा दुःख

हेड ऑफ़ लोरेट, ऑनरी मातीस
Head of Lorette, Henri Matisse
गहरा दुःख, तुम्हारा उपहार, खुला हुआ,
मेरे खाली हाथ भारी हो गए हैं,
जैसे होते थे तब जब तुम्हें थामती थी
एक पीड़ की तरह; अप्रत्याशित,
हालाँकि अब मेरी आँखें भीतर देखती हैं एकटक
वहीँ जहाँ होते थे तुम, मेरे सितारे, मेरे सितारे;
और मैं योग्य नहीं थी, तुम थे, जिसके पास सब है
उसके लिए, उचित चुनाव, मेरे मन को
नम्रता से भरते; अनचाहा था, मेरी अंतर्मन की
आवाज़ के पास
आभारी होने के लिए शब्दों का ना होना;
असाधारण है कैसे वह, मानो प्रदत्त,
बढ़ती है भरने के लिए
एक दिन, एक रात, एक सप्ताह, एक माह,
सिखाती अपने सूत्र,
यह प्रेम की कुंवारी जुड़वाँ बहन,
मेरा सर झुका है,
और मैं सीख रही हूँ, सीख रही हूँ; समझ गयी.


-- कैरल एन डफ्फी



 कैरल एन डफ्फी ( Carol Ann Duffy )स्कॉट्लैंड की कवयित्री व नाटककार हैं. वे मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन युनिवेर्सिटी में समकालीन कविता की प्रोफ़ेसर हैं. 2009 में वे ब्रिटेन की पोएट लॉरीअट नियुक्त की गईं. वे पहली महिला व पहली स्कॉटिश पोएट लॉरीअट हैं. उनके स्वयं के कई कविता संकलन छ्प चुके हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों को सम्पादित भी किया है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान व अवार्ड मिल चुके हैं. सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं व स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी हैं. यह कविता उनके 2005 में छपे संकलन ' रैप्चर ' से है, जिसे टी एस एलीअट प्राइज़ मिला था.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

सोमवार, अक्टूबर 01, 2012

संवाद

रेड सर्कल ऑन ब्लैक, जीरो योशिहारा
Red Circle On Black, Jiro Yoshihara
ये न कहो कि मेरा प्रेम था
कोई अंगूठी या कंगन.
मेरा प्रेम है एक घेराबंदी,
है निर्भीक और हठी.
उनकी तरह जो खोजते हुए
बहा ले जाते हैं 

अपनी नौका मृत्यु की ओर.

ये न कहो कि मेरा प्रेम था
चाँद.
मेरा प्रेम है चिंगारियों की बौछार.



-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.यह कविता उनके संकलन "वन हंड्रेड लव लेटर्ज़"से है .
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के फ्रंगिया ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़