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| मोन्यूमेंट इन द प्लाज़ा, न्यू यॉर्क, जॉन फ्रेंच स्लॉन Monument in the Plaza, New York, John French Sloan |
तुम्हारी कविताएँ मुझे ढाढस क्यों देती हैं, स्वयं से पूछती हूँ.
क्योंकि वे सीधी हैं, ऊँची पीठ की कुर्सियों जैसी.एक साथ बंधे लठ्ठे, जो तैरते हैं.
पीछे भाग रहे थे.
उन सडकों पर जिनसे मैं दावा करती हूँ कि मुझे प्यार है.
जो किसी अलौकिक चमत्कार-सा नहीं था,
बस तेज़ी से आगे भागती रहती है.
-- नाओमी शिहाब नाए
नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन 'वर्ड्स अंडर द वर्ड्स'' से है.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़


