पाइन ट्रीज़ अगेंस्ट अ रेड स्काए एंड सेटिंग सन, विन्सेंट वान गोग Pine Trees Against a Red Sky and Setting Sun, Vincent Van Gogh |
जब मैं मरूँगा, मैं देखूंगा दुनिया की गूढ़ परत.
पंछी, पर्वत, सूर्यास्त के परे, वह दूसरा किनारा.
अपने भेद खोलने को तैयार सच्चे अर्थ.
जो असंगत था, संगत लगने लगेगा.
जो कभी समझ नहीं आया था, आने लगेगा समझ.
-- और अगर दुनिया की कोई गूढ़ परत न हुई तो?
अगर डाल पर बैठा पंछी कोई संकेत नहीं,
बल्कि डाल पर बैठा पंछी ही हुआ तो?
अगर रात और दिन
एक-दूसरे का पीछा अकारण ही करते हुए तो?
और इस धरती पर,
धरती के सिवाय और कुछ भी न हुआ तो?
-- अगर ऐसा हुआ भी,
तो भी रहेगा, नश्वर होंठों द्वारा जागृत शब्द,
एक अथक दूत,
जो तारों के बीच,
घूमती आकाशगंगाओं के बीच,
भागता रहता है, भागता रहता है,
और पुकारता है, विरोध करता है, चिल्लाता है.
-- चेस्वाफ़ मीवोश
चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद चेस्वाफ़ मीवोश और रोबर्ट हासा ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़