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सोमवार, जून 11, 2012

उम्मीद

द गार्डन गेट, क्लौद मोने
The Garden Gate, Claude Monet
उम्मीद तुम्हारे साथ है जब तुम विश्वास करते हो
कि यह धरती स्वप्न नहीं है, जीती-जागती देह है,
कि दृष्टि, स्पर्श और श्रवण झूठ नहीं बोलते,
कि यहाँ जो सब तुमने कभी देखा है,
फाटक के बाहर से देखे बगीचे जैसा है.

तुम अन्दर नहीं जा सकते. 

मगर तुम्हें पूर्ण विश्वास है कि वह है. अगर 
हम थोड़ा और ध्यान और समझदारी से देख सकते
तो बगीचे में कहीं हम खोज निकालते
एक अनोखा नया फूल और एक अनाम नक्षत्र.

कुछ लोग कहते हैं कि हमें नहीं करना चाहिए 

अपनी आँखों पर विश्वास,
कि कुछ वास्तव में है ही नहीं, केवल एक प्रतीति है,
ये वहीं लोग हैं जिन्हें कोई भी उम्मीद नहीं.
वे सोचते हैं कि जिस पल हम मुँह फेर लेते हैं,
हमारी पीठ के पीछे 

दुनिया का अस्तित्व ही नहीं रहता,
मानो चोरों के हाथों ने हर लिया हो. 




-- चेस्वाफ़ मीवोश 




चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट हास व रोबेर्ट पिन्सकी ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, दिसंबर 19, 2011

श्रद्धा

लेंथनिंग शैडोज़, विलर्ड मेटकाफ़
Lengthening Shadows, Willard Metcalfe 

श्रद्धा का अर्थ है 
कि कोई देखता है 
ओस की बूँद को या तैरते पत्ते को 
और जानता है 
कि वे हैं, क्योंकि उन्हें होना ही है.
और चाहे तुमने देखे हों सपने,
या आँखें मूँद के मांगी हो मन्नत, 
यह दुनिया फिर भी वही रहेगी जो वह थी,
और नदी फिर भी पत्ते को बहा ले जाएगी.

इस का अर्थ है कि जब नुकीले पत्थर से 
आहत होता है किसी का पैर  
वह जानता है कि पत्थर होते ही हैं
ताकि कर सकें पैरों को आहत.
देखो, देखो वह पेड़ की लम्बी छाया;
और फूलों की और लोगों की छाया भी
धरती पर है पड़ती :
जिसकी कोई छाया नहीं
उस में नहीं है जीवन जीने की शक्ति.


-- चेस्वाफ़ मीवोश 



चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट हास व रोबेर्ट पिन्सकी ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, नवंबर 17, 2011

इतना कम

लिवाइअथन (जॉब 40 :21) , सेल्वाडोर डाली
Leviathan (Job 40:21), Salvador Dali

मैंने इतना कम कहा.
दिन छोटे थे.

छोटे दिन.
छोटी रातें.
छोटे साल.

मैंने इतना कम कहा.
मैं पिछड़ गया.

थक-हार गया मेरा मन 
आनंद से,
निराशा से,
उत्साह से, 
आशा से.

जकड़ रहे थे मुझे 
भीमकाय लिवाइअथन के जबड़े.

नग्न लेटा था मैं
निर्जन टापुओं के तट पे.

घसीट ले गई मुझे
दुनिया की यह सफ़ेद व्हेल मछली
अपने गहरी खाई में.

और अब मैं नहीं जानता
कि यथार्थ क्या था उस सब में.



-- चेस्वाफ़ मीवोश 



चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद चेस्वाफ़ मीवोश और लिलियन वाली ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, सितंबर 18, 2011

अर्थ

पाइन ट्रीज़ अगेंस्ट अ रेड स्काए एंड सेटिंग सन,
विन्सेंट वान गोग
Pine Trees Against a Red Sky and Setting Sun,
Vincent Van Gogh

जब मैं मरूँगा, मैं देखूंगा दुनिया की गूढ़ परत.
पंछी, पर्वत, सूर्यास्त के परे, वह दूसरा किनारा.
अपने भेद खोलने को तैयार सच्चे अर्थ. 
जो असंगत था, संगत लगने लगेगा.
जो कभी समझ नहीं आया था, आने लगेगा समझ.
-- और अगर दुनिया की कोई गूढ़ परत न हुई तो? 
अगर डाल पर बैठा पंछी कोई संकेत नहीं,
बल्कि डाल पर बैठा पंछी ही हुआ तो? 
अगर रात और दिन
एक-दूसरे का पीछा अकारण ही करते हुए तो?
और इस धरती पर, 
धरती के सिवाय और कुछ भी न हुआ तो?
-- अगर ऐसा हुआ भी, 
तो भी रहेगा, नश्वर होंठों द्वारा जागृत शब्द,
एक अथक दूत, 
जो तारों के बीच,
घूमती आकाशगंगाओं के बीच,
भागता रहता है, भागता रहता है, 
और पुकारता है, विरोध करता है, चिल्लाता है.


-- चेस्वाफ़ मीवोश 




चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद चेस्वाफ़ मीवोश और रोबर्ट हासा ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शनिवार, जुलाई 16, 2011

दुनिया के अंत पर एक गीत

रोज़िज़ एंड बीटल, विन्सेंट वान गोग
Roses And Beetle, Vincent Van Gogh

जिस दिन दुनिया का अंत होता है 
एक मधुमक्खी तिपतिया घास के चक्कर लगाती है, 
एक मछुआरा चमकते जाल को ठीक करता है.
समुद्री जीव ख़ुशी से उछलते हैं समुद्र में,
जहाँ से बारिश का पानी निकलता है 
नन्ही चिड़ियाँ खेलती हैं वहां
और सांप की छाल सुनहरी है जैसी होनी चाहिए हमेशा.

जिस दिन दुनिया का अंत होता है 
औरतें चलती हैं खेतों में अपनी छतरियों तले,
एक पियक्कड़ घास के किनारे निंदासा होता है,
सब्ज़ीवाले चिल्लाते हैं गली में
और एक पीले पाल वाली नाव आ जाती है द्वीप के और पास,
एक वायलिन की आवाज़ ठहर-सी जाती है हवा में 
और ले जाती है तारों भरी रात की ओर.

और जिन्होंने सोचा था की बिजली चमकेगी, 
बादल गरजेंगे, वे निराश हो जाते हैं.
और जिन्हें उम्मीद थी संकेतों की, महादूतों की तुरही की 
उन्हें नहीं लगता कि अंत अब हो रहा है.
जब तक सूरज और चाँद ऊपर हैं,
जब तक भौंरा गुलाब के पास जाता है 
जब तक गुलाबी-से बच्चे पैदा हो रहे हैं
किसी को नहीं लगता की अंत अब हो रहा है.

केवल एक पके बालों वाला बूढ़ा, 
जो पैगम्बर हो सकता था, मगर पैगम्बर नहीं है,
क्योंकि वह कुछ अधिक ही व्यस्त है,
अपने टमाटर के पौधे बांधते हुए दोहराता है:
दुनिया का और कोई अंत नहीं होगा,
और कोई अंत नहीं होगा दुनिया का.



--चेस्वाफ़ मीवोश 



चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद एंथनी मीवोश ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, मई 05, 2011

बस यही

द गोल्डन ऑटम, लिओनिद पास्तरनाक 
एक घाटी और ऊपर पतझड़-रंगे जंगल. 
एक यात्री आता है, 
एक नक्शा उसे वहां लाता है. 
या शायद स्मृति. 
बहुत समय पहले एक दिन, 
जब पहली बर्फ गिर रही थी,
इस तरफ आते हुए उसे ख़ुशी महसूस हुई थी, 
इतनी ख़ुशी, अकारण, आँखों से छलकती.
सब कुछ हिलते पेड़ों की लय में था,
उड़ते पंछी की लय में 
पुल पार करती रेलगाड़ी की लय में... 
एक गतिशील उत्सव.
फिर वो बहुत सालों बाद लौटता है,
अब उसे कुछ नहीं चाहिए.
बस केवल एक चीज़, कुछ अनमोल:
एक दृष्टि -- सीधी, साफ़, नाम बिना,
अपेक्षा, उम्मीद, डर बिना,
एक दृष्टि...उस कगार पर 
जहाँ कोई मैं नहीं, जहाँ मैं नहीं.


-- चेस्वाफ़ मीवोश 


चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट हास ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़