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मंगलवार, अक्टूबर 18, 2011

गीत और कहावतें

स्नो कवर्ड फील्ड्ज़ इन आर्ल, विन्सेंट वान गोग
Snow Covered Fields In Arles, Vincent Van Gogh

1
किसी से बात करना,
तो पहले पूछना सवाल,
फिर -- सुनना.

2
यह हमारा नर्गिस 
आईने में अपना चेहरा देख नहीं सकता 
क्योंकि वह स्वयं ही बन गया है आईना.

3
ढूंढो अपने दूसरे अर्धांश को 
जो हमेशा चलता है तुम्हारे साथ
और अक्सर वो होता है जो तुम नहीं हो.

4
पानी अच्छा है, प्यास भी;
छाया अच्छी है, धूप भी;
रोज़मेरी का शहद 
और शहद खाली खेतों का.

5
जागो, कवियों:
प्रतिध्वनियों का अंत होने दो, 
होने दो आवाजों का आरम्भ.

6
जिन आँखों के लिए तुम तरस रहे हो --
अब सुनो --
जिन आँखों में तुम स्वयं को देखते हो 
वे आँखें हैं क्योंकि वे तुम्हें देखती हैं.

7
अगर कोई कविता आम हो जाती है,
एक हाथ से दूसरे हाथ जाती है, तो ठीक है:
सिक्कों के लिए सोना ही चुना जाता है.

8
जब मैं अकेला होता हूँ
कितने पास होते हैं मेरे दोस्त;
जब मैं उनके साथ होता हूँ,
कितनी दूर होते हैं वे!

9
तो कहो कवि, क्या है तुम्हारी भविष्यवाणी?
" जो मूक है वह बोलेगा कल
मानवीय मन और पत्थर. "

10
मगर कला?
              वह विशुद्ध और गहन खेल है,
तो वह विशुद्ध और गहन जीवन जैसा है,
तो वह विशुद्ध और गहन अग्नि जैसे है.
तुम्हें दिख जायेगा कोयला सुलगता हुआ.




-- अंतोनियो मचादो



  अंतोनियो मचादो ( Antonio Machado )20 वीं सदी के आरम्भ के स्पेनिश कवि थे. युवावस्था में पेरिस में बिताया समय व फ्रांस के सैम्बोलीस्त कवियों से मिलना-जुलना, उनके कवि होने का सबसे बड़ा कारण बना. 20 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन 'सोलेदाद' छप चुका था. उनकी कविताओं में जहाँ एक तरफ अंतर्दृष्टि व अन्तरावलोकन दिखाई देता है, वहीँ दूसरी तरफ स्पेन के लोगों का जीवन व मानसिकता झलकती है. उनके कई कविता संकलन प्रकाशित हुए व अनेक कविताओं का दूसरी भाषाओँ में अनुवाद भी हुआ.
इस कविता का मूल स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद राबर्ट ब्लाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, जून 16, 2011

और क्या वह जादुई दुनिया...

द स्टारी नाईट , विन्सेंट वान गोग 

और क्या वह जादुई दुनिया
तुम्हारे साथ ही ख़त्म हो जाएगी?
जहाँ जीवन की सबसे निर्मल सांसों पर,
पहले प्यार की रोशन छाया पर,
तुम्हारे मन में जो उतर कर बस गयी,
उस आवाज़ पर, 
तुमने सपनों में जो पकड़ना चाहा था,
उस हाथ पर,

और उन सब चीज़ों पर 
जो तुम्हें प्यारी थी, 
जिन्होंने छुआ था तुम्हारी आत्मा को, 
आकाश की गहराईयों को,
जहाँ इन सब पर 
स्मृति का पहरा है, 
क्या वह जादुई दुनिया
तुम्हारे साथ ही ख़त्म हो जाएगी?

तुम्हारे साथ ही ख़त्म हो जाएगा क्या, 
वह पुराना जीवन जो तुमने ठीक कर के 
फिर से नया-सा किया है?
तुम्हारी आत्मा के कल-पुर्जों ने क्या
इतना श्रम किया था 
बस हवा और मिटटी होने के लिए? 


-- अंतोनियो मचादो


  अंतोनियो मचादो 20 वीं सदी के आरम्भ के स्पेनिश कवि थे. युवावस्था में पेरिस में बिताया समय व फ्रांस के सैम्बोलीस्त कवियों से मिलना-जुलना, उनके कवि होने का सबसे बड़ा कारण बना. 20 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन 'सोलेदाद' छप चुका था. उनकी कविताओं में जहाँ एक तरफ अंतर्दृष्टि व अन्तरावलोकन दिखाई देता है, वहीँ दूसरी तरफ स्पेन के लोगों का जीवन व मानसिकता झलकती है. उनके कई कविता संकलन प्रकाशित हुए व अनेक कविताओं का दूसरी भाषाओँ में अनुवाद भी हुआ.
इस कविता का मूल स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद  ए. एस क्लाइन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, अप्रैल 20, 2011

गीत


पेंटर ऑन हिज़ वे टू वर्क, विन्सेंट वान गोग 

सब आगे बढ़ जाता है, 
सब पीछे छूट जाता है.
पर हमें आगे बढ़ना है,
समुद्र में से भी राह 
बनाते जाना है. 

मेरे गीतों ने
कीर्ति नहीं चाही कभी
मेरे लिए ये दुनिया बुलबुला ही थी 
हल्का, जादुई, संवेदी  
और मुझे देखना पसंद था 
नीले आकाश में इन बुलबुलों को
कभी धूप से सुनहरे 
कभी पुते-हुए लाल 
हिलते कांपते फूटते 

मैंने कभी कीर्ति नहीं चाही 

राही, और कुछ नहीं, तुम्हारे
पैरों के निशान ही राह हैं
राही, कोई राह नहीं 
चलना ही राह है 

चलना ही राह बन जाता है 
और पीछे मुड़ कर देखने पर 
जो पथ दिखता है तुम्हें , फिर से  
उस पर कोई नहीं चल पाता है  

राही, हर राह छोड़ जाती है 
समुद्र पे अपने निशान...

उस जगह जहाँ कांटे हैं 
कवि का गीत गूंजा था कभी:
राही, कोई राह नहीं  
चलना ही राह है 
धीरे-धीरे  कदम-कदम  

घर से बहुत दूर दम निकला 
कवि का, किसी अनजान देश 
कि धरती पर, 
और जाते-जाते यही थी पुकार:
राही, कोई राह नहीं 
चलना ही राह है 

जब कोयल गा नहीं पाती
जब कवि भटक जाता है, 
प्रार्थना के पंख टूटे होते हैं 
राही, कोई राह नहीं  
चलना ही राह है 
धीरे-धीरे  कदम-कदम  

-- अंतोनियो मचादो


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अंतोनियो मचादो 20वीं सदी के आरम्भ के स्पेनी कवि थे. उनकी कविताओं मैं जहाँ एक तरफ अंतर्दृष्टि व अन्तरावलोकन दिखाई देता है, वहीँ दूसरी तरफ स्पेन के लोगों का जीवन व मानसिकता झलकती है.

इस कविता का मूल स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद ए. एस कलाईन द्वारा किया गया है. 
हिंदी में अनुवाद  -- रीनू तलवाड़