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शनिवार, मार्च 08, 2014

सहेली का तलाक़

इन द गार्डन, चाइल्ड हासम
In the Garden, Childe Hassam
मैं चाहती हूँ 
कि वह उखाड़ ले 
अपने बागीचे का 
हर पौधा 
पैन्ज़ी 
पेंटा फूल 
गुलाब 
रैननकुलेसी 
थाइम और लिली 
वे भी जिनका नाम 
कोई नहीं जानता 
उतार ले मॉर्निंग ग्लोरी
की बेल जो चढ़ी है 
बाड़ पर 
ले जाए वे फूल जो खिले हुए हैं 
और जो खिलने को हैं 
और जो अभी खिले नहीं, सो रहे हैं  
ख़ास तौर पर वे जो सो रहे हैं 
और फिर 
और फिर 
बो दे उन्हें अपने नए आँगन में 
शहर के
दूसरे छोर पर  
और फिर देखे कि 
वे कैसे साँस लेते हैं  


-- नाओमी शिहाब नाए 




 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन ''फ़ुएल " से है. 

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

बुधवार, फ़रवरी 05, 2014

मेरे पास अभी भी वह सब है जो तुमने मुझे दिया था

वुमन विद अ रोज, पियेर ओगयूस्त रनोआ
Woman with a Rose, Pierre-Auguste Renoir

उसके किनारों पर धूल जमी है.

थोड़ा सड़ गया है.

बिन सोचे मैं उसका ख्याल रखती हूँ.

साल में एक बार उस पर देती हूँ ध्यान
जब धूप में सुखाती हूँ.

अब मैं तरसती नहीं.

उसके बदले कुछ ले नहीं पाऊँगी.


-- नाओमी शिहाब नाए 




 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन ''फ़ुएल " से है. 

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

शनिवार, जनवरी 04, 2014

खुला दरवाज़ा

द ब्लू बर्ड, मार्क शगाल
The Blue Bird, Marc Chagall
मैं  करती हूँ कड़ी मेहनत
ताकि मेरे पास हो खाली समय.

पंछी चढ़ते हैं अपने वृन्दगीतों के 
सोपान.

वे चख चुके हैं पेड़ की फुनगी,
मगर वे ठहर नहीं रहे.

सारा आकाश कहता है,
अब तुम्हारी चाल.  


-- नाओमी शिहाब नाए 




 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन ''फ़ुएल " से है. 


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

सोमवार, जुलाई 15, 2013

सवार

सॉलीट्यूड, डाइयैन जॉनसन
Solitude, Diane Johnson
एक लड़के ने मुझे बताया था 
कि अगर वह अपने स्केट्स पर बहुत तेज़ी से दौड़ता है 
तो उसका अकेलापन उसे पकड़ नहीं पाता,

चैंपियन बनने का प्रयास करने के लिए 
इस से अच्छा कारण मैंने आज तक नहीं सुना.

किंग विलियम मार्ग पर तेज़ी से साइकिल चलाते हुए 
आज रात मैं जानने को उत्सुक हूँ कि 
क्या यह बात साइकलों पर भी लागू होती है.

कैसी विजय हो वह भी! अपने अकेलेपन को
कहीं पीछे, किसी गली के मोड़ पर हांफता छोड़ आना
जबकि उन्मुक्त बहते हुए तुम खो जाओ 
अचानक खिले एज़ेलिया फूलों के एक बादल में,
उन गुलाबी पंखुड़ियों के बीच जिन्होनें 
चाहे वे कितनी ही धीमी गति से झड़ी हों, 
कभी अकेलापन नहीं जाना है.


-- नाओमी शिहाब नाए 



 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन ''फ़ुएल " से है. 

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, मई 14, 2013

तुम जानते हो तुम कौन हो

मोन्यूमेंट इन द प्लाज़ा, न्यू यॉर्क,
जॉन फ्रेंच स्लॉन
Monument in the Plaza, New York,
John French Sloan

तुम्हारी कविताएँ मुझे ढाढस क्यों देती हैं, स्वयं से पूछती हूँ.
क्योंकि वे सीधी हैं, ऊँची पीठ की कुर्सियों जैसी.
मैं उनमें बैठ कर देख सकती हूँ दुनिया को जैसे कि 
वह भी सीधी और सरल है. 

क्योंकि कभी-कभी मैं जीती हूँ शब्दों के अंधड़ में
और उनमें से एक भी मुझे बचा नहीं सकता.
तुम्हारी कविताएँ एक बेड़े की तरह आती हैं,
एक साथ बंधे लठ्ठे, जो तैरते हैं.
मैं तुम्हें उस दोपहर के बारे में बताना चाहती हूँ 
जब तुम्हारी कविताओं पर मैं ड्यूरैंगो स्ट्रीट
से ब्रॉडवे तक पूरे रास्ते बही थी.

पिता अपने छोटे बेटों के साथ नदी में नौका चला रहे थे.
पुस्तकालय के बाहर तीन मेक्सिको के लड़के एक-दूसरे के
पीछे भाग रहे थे.
लगता था सभी के पास कोई काम है, कोई कारोबार,
जबकि मैं निरुद्देश्य-सी फिर रही हूँ
उन सडकों पर जिनसे मैं दावा करती हूँ कि मुझे प्यार है. 

अचानक ही अपने नीचे मुझे महसूस हुई तुम्हारी कविताओं की स्पष्ट देह,
एक बेड़े-सी, एक बार फिर शब्द वहनीय लगने लगे मुझे,
जैसे कि एक कप, एक अखबार, एक सुई.
जो कुछ हो रहा था वह एक प्रकाश से घिरा था,
जो किसी अलौकिक चमत्कार-सा नहीं था,
बल्कि था एक शनिवार की दोपहरी का रूखा-सा उजाला.
ऐसी दुनिया का उजाला जो हमें साथ लिए या बगैर लिए
बस तेज़ी से आगे भागती रहती है.
मैं रुक कर पीछे छूटे भवन-समूहों को इस उजाले में
एकत्रित करना चाहती थी, मगर ऐसा हो नहीं पाता.
तुम चलते रहते हो, उठाते हो एक पैर, फिर दूसरा,
यह कहते हुए कि "मुझे यही याद रखने की ज़रुरत है"
और फिर उम्मीद करते हो की तुम रख सको.


-- नाओमी शिहाब नाए 



 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन 'वर्ड्स अंडर द वर्ड्स'' से है. 


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, अप्रैल 14, 2013

जब हमें चाहिए होते हैं शब्द

डौन, मार्क शगाल
Dawn, Marc Chagall

इस आरंभिक पल से पहले,
एक पल और था, बारिश से सिक्त,
अपने पूर्ण आकार की गंध लिये.

हर दिन वह मुर्गा
जिसे हमने कभी नहीं देखा
करता है पहला अभिवादन
और अँधेरा, जिसने रात भर
रखा था अपनी ढीली जेब में,
अब हमें नीचे धर देता है.

और हम चलते हैं,
कमरों को जगाते हुए
बत्तियां जलाते हुए.
हम जाते हैं उस सांस में जो 
शब्दहीन है मगर है शब्दों की
सभी संभावनाओं से पूर्ण भी,
पूर्ण है उन संदेशों से जो अभी
न एकत्रित किये गए हैं 
न भेजे गए हैं.

सुबह मंडराती है
सबसे अच्छे मित्र से भी
अच्छी मित्र हो कर.

हम कह सकते हैं, अभी भी. 


-- नाओमी शिहाब नाए 



 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. 


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, मार्च 25, 2013

अब क्या होगा?

जब तुम छोटी थीं,
हम सोते हुए देखते थे तुम्हें,
साँसों की लहरें
भरती थीं तुम्हारी छाती को.
कभी-कभी हम छिप जाते थे
तुम्हारी बच्ची-दीवार की, तुम्हारी
बच्ची आवश्यकताओं के नर्म पालने की
ओट में.
मुझे कितना अच्छा लगता था,
अपनी देह और दुनिया के बीच
तुम्हें उठा कर चलना.

अब तुम पेंसिलें छीलने लगी हो,
कदम रखने लगी हो
टिफ़िन बॉक्सों और छोटे डेस्कों के जंगल में.
जिन लोगों को मैंने कभी देखा तक नहीं
वे नाम से पुकारते हैं तुम्हें
और तुम हाथ हिल देती हो.

एक कमी सी लगने लगी है मुझे,
एक सिकुड़न,
जैसे-जैसे तुम्हारा गुलाबों भरा मैदान
फैल रहा है, फैलता जा रहा है...

अब समझ पा रही हूँ इतिहास को.
अब समझ पा रही हूँ अपनी माँ की
प्राचीन आँखें.


-- नाओमी शिहाब नाए 



 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. 


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, मार्च 23, 2013

गीत

स्टिल लाइफ विद लैंप, मार्क शगाल
Still Life with Lamp, Marc Chagall
कहीं से
आता है संगीत का एक शांत स्वर.
तुम संभालते हो उसे जीभ पर,
अँगूर के एक पके दाने की तरह,
जब तक कि
दमकने न लगे तुम्हारी पूरी देह.
दो साँसों के बीच के अन्तराल में
तुम लगाते हो उसे किसी घाव पर
और घाव भरने लगता है.

कुछ दिनों में रातें लम्बी होने लगेंगी,
आरे की तरह गुनगुनाते
तुम झुक जाओगे साल पर.
तुम भरोगे लालटेनों में मिट्टी का तेल,
मन में कहीं यह जानते हुए
कि टूटेगा बिजली का तार कहीं,
शहर अँधेरे में डूब जाएगा,
लोग खोजेंगे मोमबत्तियाँ निचले दराजों में.
तुम तैयार रहोगी. तुम अपने गीत को
इस्तेमाल करोगी माचिस की तीली की तरह.
वह भर देगा तुम्हारे कमरों को,
खोलेगा अपने स्वयं के कमरे
ताकि तुम गाती रहो, मुझे नहीं पता था
कि मेरा घर इतना बड़ा है.


-- नाओमी शिहाब नाए 



 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. 


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, फ़रवरी 22, 2013

बहुत-सी उम्मीदें

कैट्स, फ्रैंज मार्क
Cats, Franz Mark
ऐसा भी नहीं कि वे बहुत थीं,
ऊँची भी नहीं, वास्तव में,
वे कम थीं,
नीची, ज़मीन के पास-पास,
मैं सहला सकती थी उनको
जैसे कोई सहलाता है उस बिल्ली को
जो तुम्हारी न होने पर भी
पैरों से लिपटने लगती है.

हाँ, मुझे अकेला लगता है उनके बिना.
अब जब मैं जानती हूँ यह सत्य
कि वह मेरा स्वप्न ही था कि कोई मुझे पसंद करता है,
घर की दीवार की ओट में पत्तों के बिछौने पर 

बिल्ली स्वयं से लिपट कर सो गई है और मुझे अभी भी
वह सब करना है जो पहले करना था...
भीतर की छिपी-
छिपी गुनगुनाहट 
के बिना.


-- नाओमी शिहाब नाए 

 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन "वर्डज़ अंडर द 
वर्डज़" से है.  


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, जनवरी 03, 2013

पुराने वर्ष का दहन

फायर पेंटिंग, ईव क्लाइन
Fire painting, Yves Klein
पत्र स्वयं को निगल जाते हैं पल-भर में.
सन्देश जो दोस्तों ने फंसाये थे दरवाज़े में,
पारदर्शी लाल कागज़,
सरसराता है पतंगे के पंखों की तरह,
कर लेता है हवा से ब्याह.

किसी भी वर्ष का कितना कुछ होता है प्रज्वल्य,
सब्जियों की फहरिस्त, अधपकी कविताएँ.
दिनों की घुमावदार नारंगी लौ,
कितना कम है जो पत्थर है.

जब कुछ था और अचानक नहीं रहा,
एक अनुपस्थिति शोर करती है, उत्सव मनाती है,
छोड़ती है जगह.
मैं फिर से करती हूँ आरम्भ सबसे छोटी संख्या से.

त्वरित नृत्य, विफलताओं और पत्तियों के हेर-फेर,
वह सब जो मैं नहीं कर पायी, केवल वही
चिटकता है धधकती आग के बुझ जाने के बाद.


-- नाओमी शिहाब नाए 


 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन "वर्डज़ अंडर द 
वर्डज़" से है.  


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, अगस्त 12, 2012

समस्याएँ

 फायर पेंटिंग, ईव क्लाईन  
Fire Painting, Yves Klein
वे तुम्हारी नहीं होतीं.

बिना उन्हें अपना माने तुम उन्हें ध्यान से देख सकते हो.

द्वन्द और अव्यवस्था यात्रा पर जाना चाहते थे.

उन से बच के निकलने की हमेशा एक राह थी.

प्रायः एक कठिन राह.

तुम उन्हें कोशिश करने पर भी ठीक नहीं कर सकते थे.

और कोशिश तुमने ज़रूर की.

यह सोचना धृष्टता थी कि तुम उन्हें ठीक कर सकते हो.

विलियम गोयेन कहते थे
कि उनका लेखन 'मुसीबत' से शुरू होता था.
कुछ जो उसका तुम कर सकते थे,
जो तुम्हें उस से निकाल देता था,
या तुम्हें उसे देखने देता था.

कुछ ना कहते लोगों का बल.
तुम मेरी समस्याएँ नहीं जानते, मैं तुम्हारी नहीं जानता.

मेरी कोई समस्याएँ नहीं हैं.

जब मेरे पास सिलाई का कुछ काम होता है, मैं खुश होती हूँ.

मातीस ने कहा था, " जिस पल मेरे हाथों में वह रंगों का डिब्बा था
मुझे लगा था जैसे मेरा जीवन वहीं है..."

बिना समस्याओं के उस पर झुकाव के तुम्हारा जीवन कहाँ है?

तुम्हारे बिना क्या कहीं जाएगा वो?

वह कुछ नापसंद करने को ढूंढ ही लेगा, यहाँ भी.
मगर उसे अच्छा करना तुम्हारे हाथ में नहीं है.

अग्नि को कोई अच्छा नहीं कर पाया.
उसके निकल जाने के पश्चात सुशुप्त बीज चटखने लगे.


-- नाओमी शिहाब नाए 


 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन " यू एंड युअर्ज़ " से है.  

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, जुलाई 23, 2012

दूरी रखना

फ्रोग, एंडी वारहोल
Frog, Andy Warhol
दुनिया के लोगों, जो तुम सब से अच्छा कर सकते हो 
अगर वह यही है,
तो मैं सब छोड़, बनना चाहती हूँ एक पंछी, एक तितली,
गर्मियों की छाया, फड़फड़ाता पत्ता,
पानी में इधर-उधर तैरता पंडुक.
आज एक मेंढक ने प्रतीक्षा की, बेला के पौधे के तले,
भोर से पहले की ठंडी गीली बूंदों की.
कितनी शान से वह उठा था
जब पानी ने छुआ था उसकी खाल को --
एक और सुबह के सामने उसका सहज-सा आनंद --
तुलना करो इसकी बमबारी,
गोलीबारी, तोड़-फोड़ और आतंकवाद से
जो लोग करते आ रहे हैं
जितने हम गिन भी ना पायें उस से अधिक देशों में
और पूछो स्वयं से -- मानव या मेंढक?



-- नाओमी शिहाब नाए 




 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन " यू एंड युअर्ज़ " से है.  

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, जून 17, 2012

नया

सनराइज़, यान स्लयुटरज़
Sunrise, Jan Sluyters
आसानी से
आगे बढ़ना.
कहीं और होने की
आवश्यकता ना होना.
किसी भी दुकान से
कुछ भी ना चाहना.
उठाना ऐसी चीज़ को
जो पहले-से पास थी
और उसे दोबारा रखना
नई जगह पर.
जागी हुई आँख का
नयी तरह से देखना.
ये सब क्या करता है
पुराने रक्त को जो बहता रहता है
अपनी वाहिकाओं में? 




-- नाओमी शिहाब नाए 



नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन " यू एंड युअर्ज़ " से है.  

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, मई 17, 2012

कंधे

मैन कैरिंग बॉय, पिएर-ओग्यूस्त रनोआ 
Man Carrying Boy, Pierre-Auguste Renoir
बारिश में एक आदमी सड़क पार करता है 
कदम सावधानी से रखता, दो-दो बार उत्तर-दक्षिण देखता,
क्योंकि उसके कंधे पर उसका बेटा सो रहा है.

किसी गाड़ी से उस पर छींटे नहीं पड़ने चाहिए.
कोई  गाड़ी नहीं निकलनी चाहिए उस की छाया के भी पास से.

आदमी ढो रहा है दुनिया का सब से प्यारा माल 
मगर उस पर नहीं बना हुआ  कोई  चिन्ह. 
उसकी जैकिट पर कहीं नहीं लिखा -- फ्रैजाइल,
हैंडल विद केयर.

चलती साँसों का स्वर आदमी के कानों में भर जाता है.
वह सुनता है एक बच्चे के स्वप्न की गुंजन
अपने ही भीतर गहरे कहीं. 

इस दुनिया में 
हम रह नहीं पाएंगे
अगर हम एक-दूसरे के साथ 
नहीं तैयार वह करने को जो यह आदमी कर रहा है.

सड़क चौड़ी ही रहेगी.
बारिश कभी गिरनी बंद नहीं होगी.


-- नाओमी शिहाब नाए 



 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन " रेड सूटकेस " से है.  

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, फ़रवरी 19, 2012

दो देश

दानैद, ओग्यूस्त रोदें
Danaid, Auguste Rodin

देह को याद है कितने लम्बे खिंच जाते हैं साल 
जब देह को कोई नहीं छूता, अकेलेपन की
एक धूसर सुरंग, पंछी की पूंछ से धीमे-धीमे 
चक्कर खाकर नीचे सीढ़ी पर गिरा पंख, जो 
किसी ने हटा दिया, बिना देखे कि वह एक पंख था.
देह खाती रही, चलती रही, सोती रही अपने-आप ही,
हिलाती रही अपना 'मिलते हैं' कहने वाला हाथ.
मगर देह को लगा कि वह कभी दिखी ही नहीं, कभी 
नक़्शे पर जानी नहीं गयी किसी देश की तरह,
एक शहर जैसे नाक, एक शहर जैसी कमर, 
मस्जिद का चमकता गुम्बद, 
और दालचीनी व रस्सी के सैंकड़ों-सैंकड़ों गलियारे.

देह को उम्मीद थी, यही तो देह करती है.
घाव पूरी तरह भर देती है, रास्ता बनाती है.
प्यार का अर्थ है की तुम दो देशों में सांस लेते हो.
और देह याद रखती है -- रेशम, नुकीली घास,
अपनी निजी गुप्त जेब में गहरे कहीं.
अब भी, जब देह अकेली नहीं है,
उसे याद है अकेले होना, और वो आभारी है 
किसी विशालता की, इसलिए, कि यात्री होते हैं,
कि लोग जाते हैं उन जगहों पर,
जो उनसे कहीं विशाल, कहीं बृहद होती हैं.


-- नाओमी शिहाब नाए


                                                                                                                                                                                                                     
    

नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन "वर्डज़ अंडर द वर्डज़ " से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, जनवरी 22, 2012

सोना और जागना


द वेव, पॉल गोगें
The Wave, Paul Gauguin
सारी रात कोई तुम्हें कुछ बताने की कोशिश करता रहा.
वह आवाज़ एक आश्रय थी, तुम्हें भीतर से खींचती हुई.

मैं कहाँ हूँ, तुम कहती हो, ये सब क्या है और तुम कौन हो?

वह आवाज़ तुम्हें अपने जीवन के तट पर बहा लाती है.
तुम्हें पता ही नहीं था कि यहाँ थल है.

                               
सुबह तुम्हें जगाती हैं समुद्री काक की पुकार.
खिड़की पर पंख फड़फड़ाती, वे चाहती हैं तुमसे दाना.
तुम्हारी पलकें झपकती हैं, तुम्हारे ही हाथ तुम्हें पीछे खींचते हैं.

दिनभर तुम रोटी के छोटे-छोटे टुकड़े करती हो,
बन जाती हो अपनी सीधी साफ़ राह को मिटाने वाली लहर.


-- नाओमी शिहाब नाए


                                                                                                                                                                                                                     
    

नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन "वर्डज़ अंडर द वर्डज़ " से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, सितंबर 22, 2011

निगाहें

द विंडो, मार्क शगाल
The Window, Marc Chagall

इतने समय बाद अभी भी 
मुझे खोजना पड़ता है कभी-कभी 
"पाना" शब्द शब्दकोष में.
मैंने पाई उसकी गहरी आकृष्ट निगाहें.

मीठी बोलों की बारिश में एक सेम की बेल पनपती है.
बताओ क्या सोचती हो तुम? -- मैं सुन रहा हूँ.

कहानी ने अपने बीस पत्ते फड़फड़ा डाले.

                                ---

एक बार मेरी अध्यापिका ने 
मुझे हंसने का दंड दिया
एक ऊंची मेज़ पर बिठा दिया.
उन्होंने सोचा 
कि मुझे छांट के रख देंगी 
क्लास के बच्चों की निगाहें.
मगर वे तो कुछ और ही कह रही थीं.

हम भी हँसते अगर हमें आता हँसना.

मैंने अपनी आँखें खिड़की के बाहर 
आकाश की पूर्ण रेखा पर गड़ा दी.

वहीँ तो जा रही थी मैं.


-- नाओमी शिहाब नाए



                                                                                                                                                                                                                     
    

नाओमी शिहाब नाए एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, मई 31, 2011

छिपा हुआ

ईस्टर्न वुमंज़ हेड, जोर्जिओ द किरीको
Eastern Woman' Head, Giorgio De Chirico
अगर तुम एक फ़र्न को 
एक पत्थर के नीचे रख दोगे
तो अगले ही दिन
वह मुरझा, 
अदृश्य-सा हो जायेगा,
मानो पत्थर उसे निगल गया हो.

जिसे तुम प्यार करते हो,
अगर तुम उसका नाम 
बिन बोले बहुत समय 
दबा के रख लेते हो 
ज़ुबान के नीचे 
तो वह खून बन जाता है,
आह बन जाता है.
वह हौले-से अन्दर खींची हवा
तुम्हारे हर शब्द के पीछे 
छिपी होती है. 

जिस से तुम्हारी लौ जलती है 
उसे कोई देख नहीं सकता.


-- नाओमी शिहाब नाए



                                                                                                                                                                                                                     
    

नाओमी शिहाब नाए एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़