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बुधवार, जनवरी 09, 2013

लिखा मैंने उसका नाम

एट काप दौन्तीब, मिस्त्राल विंड, क्लौद मोने
At Cap d'Antibes, Mistral Wind, Claude Monet

जिसको मैं प्रेम करता था
लिखा मैंने उसका नाम
हवाओं पर.
पानी पर
लिखा मैंने उसका नाम
जिसको मैं प्रेम करता था.
मगर हवा ठीक सुन नहीं पाती,
पानी याद नहीं रख पाता कोई नाम.



-- निज़ार क़ब्बानी 




 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.

इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के.फ्रंगिये व क्लेमनटीना आर. ब्राउन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, दिसंबर 02, 2012

एक अधूरी कविता

आफ्टर लव, पैट्रिक लॉकार्ट
After Love, Patrick Lockhart
अगर मैं प्रेम के अपने अनुभवों को स्वीकार कर भी लूँ
तो फायदा क्या होगा?
लोगों ने हमेशा लिखा है प्रेम के बारे में,
चित्रित की है अपनी कथा कंदराओं की दीवारों पर
मृद्भांडों पर, उत्कीर्ण किया है उसे भारत से आये
हाथी दांत पर
उकेरा है उसे मिस्र में पपीरस पर
या चीन में चावल पर...
...चढ़ाएँ हैं उस पर चढ़ावे और वचन...

न मैं कोई पुरोहित हूँ न अध्यापक
नहीं मानता मैं
कि गुलाबों के लिए आवश्यक है
समझाना अपनी सुगंध दुनिया को.
तो मैं किस बारे में लिखूं?
यह प्रेम अकेला मेरा ही अनुभव है
तलवार है जो बेधती है मेरे अकेलेपन को,
मृत्यु में अधिक उपस्थित हूँ मैं.

जब मैं यात्रा करता था तुम्हारे समुद्रों पर, प्रिय,
नहीं पढ़ता था मैं कोई समुद्री नक़्शे
नहीं थी मेरे पास कोई सुरक्षा नाव,
न कोई डूबने से बचने का साधन,
और एक बौद्ध भिक्षु की तरह
चुनते हुए अपने भाग्य
आता था मैं तुम्हारी धधकती रोशनी के पास.
मैं तो बस चाहता था
सूरज के आरपार घसीटकर लिखना अपना पता
और तुम्हारी छातियों के बीच बांधना पुलों को.

जब मैं तुमसे प्रेम करता था
मैंने देखा कि हमारे बगीचे की
लाल चेरी अंगारों की तरह दहकने लगीं
वे मछलियाँ जो बच्चों के काँटों में फंसने से रह गईं
लाखों की संख्या में तैर कर आ गईं हमारे किनारों पर
अंडे देने
साइप्रस के पेड़ और ऊंचे हो गए
जीवन और विस्तृत
और ईश्वर
अंततः लौट आया धरती पर.

जब मैं तुमसे प्रेम करता था
मैंने देखा कि गर्मियों का मौसम
दस बार आता था हर साल
हर दिन हमारे खेतों में
गेहूँ पागलों की तरह उगता था
चाँद जो छोड़ कर चला गया था हमारा शहर
लौट आया
और ले लिया किराये पर उसने एक कमरा-बिस्तर
और शक्कर और सौंफ से बनी मदिरा
और भी स्वादिष्ट हो गयी.

जब मैं अपने प्रेम के बारे में लिखने का प्रयास करता
स्वयं को नारकीय पीड़ा में पाता
पूरे समुद्र का बोझ
लद जाता मेरी पीठ पर
वह बोझ जो केवल वे ही पहचानते हैं
जो सदियों से खोये हैं
उसकी गहराइयों में

क्या लिखूं तुम्हारे प्रेम के बारे में, प्रिय?
केवल यही बात याद है मुझे
एक सुबह जागना
और स्वयं को एक राजकुमार हुआ पाना.

समझने का प्रयत्न करो
प्रेम के पंछी दो बार नहीं भरते उड़ान
प्रेम एक यात्री है
जो आता है केवल एक बार...फिर चला जाता है.



-- निज़ार क़ब्बानी





 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और नाओमी शिहाब नाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शुक्रवार, नवंबर 02, 2012

समुद्र के तल से पत्र

ब्लू विलेज, मार्क शगाल
Blue Village, Marc Chagall
अगर तुम मेरी दोस्त हो...
मदद करो मेरी...कि तुम्हें छोड़ सकूँ
और अगर तुम हो मेरी प्रेमिका...
मेरी मदद करो...कि तुम्हारे रोग से अच्छा हो सकूँ...
अगर मैं जानता...
कि समुद्र बहुत गहरा है...मैंने नहीं की होती तैरने की हिम्मत...
अगर मैं जानता...अंत कैसा होगा,
मैंने नहीं किया होता आरम्भ

तुम्हें चाहता हूँ मैं...तो सिखाओ मुझे ना-चाहना
सिखाओ मुझे...
कहीं गहरे से तुम्हारे प्रेम की जड़ें कैसे काटूँ
सिखाओ मुझे...
कैसे अश्रु आँखों में ही दम तोड़ सकें
और प्रेम कर सके अपनी ही हत्या

अगर तुम पैगम्बर हो,
झाड़ कर हटा दो इस जादू-टोने को मुझसे
बचा लो मुझे इस अनीश्वरवाद से...
तुम्हरा प्रेम अनीश्वरवाद ही तो है...इस अनीश्वरवाद से शुद्ध करो मुझे

अगर तुम में बल है...
बचा लो मुझे इस समुद्र से
क्योंकि मुझे तैरना नहीं आता
वे नीली लहरें...तुम्हारी आँखों की...
खींच ले जाती हैं मुझे...गहराइयों में
नीली...
नीली...
कोई रंग नहीं नीले के सिवा
और मेरे पास नहीं है
प्रेम का अनुभव...और न ही नाव है...

अगर मैं तुम्हें प्रिय हूँ
तो लो मेरा हाथ
क्योंकि मैं सर से पैर तक...
चाह ही चाह हूँ

पानी के नीचे सांस ले रहा हूँ मैं!
डूब रहा हूँ मैं...
डूब रहा हूँ...
डूब रहा हूँ...



-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.यह कविता उनके संकलन "वन हंड्रेड लव लेटर्ज़"से है .

इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के फ्रंगिया ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, अक्टूबर 01, 2012

संवाद

रेड सर्कल ऑन ब्लैक, जीरो योशिहारा
Red Circle On Black, Jiro Yoshihara
ये न कहो कि मेरा प्रेम था
कोई अंगूठी या कंगन.
मेरा प्रेम है एक घेराबंदी,
है निर्भीक और हठी.
उनकी तरह जो खोजते हुए
बहा ले जाते हैं 

अपनी नौका मृत्यु की ओर.

ये न कहो कि मेरा प्रेम था
चाँद.
मेरा प्रेम है चिंगारियों की बौछार.



-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.यह कविता उनके संकलन "वन हंड्रेड लव लेटर्ज़"से है .
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के फ्रंगिया ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, सितंबर 01, 2012

क्या तुमने कभी सोचा...

सेलिंग बोट्स, मिकालोयुस चिर्लोनियस
Sailing Boats, Mikalojus Ciurlionis
क्या तुमने कभी सोचा
कि हम कहाँ जा रहे हैं
नावें जानती हैं कि वे किस ओर बह रही हैं,
मछलियाँ जानती हैं कि वे कहाँ तैर रही हैं,
पंछी जानते हैं कि वे किस ओर उड़ रहे हैं
फिर भी हम पानी में छटपटाते हैं
मगर डूबते नहीं
हम पहनते हैं यात्रा के कपड़े
मगर यात्रा नहीं करते
हम पत्र लिखते हैं
मगर उन्हें भेजते नहीं
हम टिकट खरीदते हैं
जाने वाले सभी जहाज़ों का
मगर एअरपोर्ट में ही रह जाते हैं
तुम और मैं
हम दुनिया के सबसे कायर यात्री हैं.


-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.यह कविता उनके संकलन "वन हंड्रेड लव लेटर्ज़"से है .
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के फ्रंगिया ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, अगस्त 04, 2012

मेरी चाह के बाहर...

वुमंज़ हेड, अमादेओ मोदिग्लियानी
Woman's Head, Amadeo Modigliani


मेरी चाह के बाहर
तुम्हारा कोई जीवन नहीं है
मैं तुम्हारा समय हूँ
मेरी बाहों के घेरे के बाहर
तुम्हारा कोई अर्थ नहीं है.
तुम्हारे सभी आयाम मैं ही हूँ,
तुम्हारे कोने और तुम्हारे वृत्त,
तुम्हारे वक्र और रेखाएँ.
जिस दिन  तुमने प्रवेश किया था
मेरी छाती के जंगलों में,
तुम ने अबद्धता में प्रवेश किया था.
जिस दिन तुम चली गईं,
तुम कबीले के सरदार द्वारा खरीदी हुई
दासी बन गई.





-- निज़ार क़ब्बानी






 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.यह कविता उनके संकलन "अरेबियन लव पोएम्ज़ "से है .
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के फ्रंगिया ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, जुलाई 03, 2012

क्या तुम छुट्टी पर जाने दोगी मुझे?

ऑन द बालकनी, बोरिस कुस्तोदियेव
On The Balcony, Boris Kustodiev
स्त्री जो भीतर बसती हो मेरे
क्या तुम
छुट्टी पर जाने दोगी मुझे
और आनंद उठाने दोगी
पहाड़ों का
जैसे दूसरे उठाते हैं?
पहाड़ हैं जैसे
रेशम का स्पेनी हाथ-पंखा
जिस पर तुम बनी हुई हो
तुम्हारी आँखों के पंछी
झुण्ड बना कर आते हैं
समुद्र के किनारे से
जैसे शब्द
एक नीली नोटबुक के
पन्नों से उड़-उड़ जाते हैं.
क्या तुम मेरी स्मृति को
अपनी सुगंध का घेरा
तोड़ कर बाहर आने दोगी
लेने के लिए
बेज़िल और जंगली थाइम की गंध?
क्या तुम बैठने दोगी मुझे
एक गर्मियों की बालकनी पर
बिना तुम्हारी आवाज़
मुझ तक पहुंचे? 





-- निज़ार क़ब्बानी



निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.

इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के.फ्रंगिये व क्लेमनटीना आर. ब्राउन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, जून 01, 2012

प्यार रहेगा मेरा मालिक

बूलेवार मोंमार्त्र, स्प्रिंग रेन, कामील पिस्सार्रो
Boulevard Montmartre, Spring Rain,
Camille Pissarro
मैंने तुमसे वादा किया था
कि जाने की कोई भी जगह नहीं है फिर भी 
मैं पांच मिनट में गायब हो जाऊँगा?
बारिश अभी भी
सड़क पर पानी की चादरें बिछा रही है
कहीं पर कोई आश्रय नहीं है, फिर भी?
शहर के कॉफ़ी-बार करते हैं
ऊब को परिभाषित,
यूँ अकेला मैं किस ओर निकल जाऊं?
जब तुम समुद्र हो
तुम्हीं हो पाल
और तुम ही यात्रा
क्या ऐसा हो सकता है कि
जब तक बारिश न रुक जाए
मैं दस मिनट के लिए और रुक जाऊं?
निश्चित है कि मैं चला ही जाऊंगा
बादलों के आगे बढ़ जाने के बाद
और हवाओं के थम जाने के बाद
नहीं तो, सुबह तक मैं रहूँगा
तुम्हारा मेहमान



-- निज़ार क़ब्बानी



निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और जेरेमी रीड ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, मई 03, 2012

प्रेम क्या है?

लवर्ज़ विद फ्लार्ज़, मार्क शगाल
Lovers with Flowers, Marc Chagall

प्रेम क्या है?
हमने उसपर सैंकड़ों निबंध पढ़ डाले  
और फिर भी नहीं जानते कि पढ़ा क्या है  
पढ़ डाले व्याख्यान, 
कृतियाँ ज्योतिष और चिकित्सा की 
और नहीं जानते शुरू कहाँ से किया था 
हमने रट लिया है पूरा लोक-साहित्य 
कविता और गीत
और एक पंक्ति भी याद नहीं है 
हमने पूछी प्रेम-ज्ञानियों से उनकी अवस्था 
और पाया कि वे हमसे अधिक कुछ नहीं जानते 

प्रेम क्या है?
हमने पूछा उस का हाल-चाल 
जाकर उसकी छिपने की जगह में, 
मगर जब भी उसे पकड़ने लगते, वह हम से छूट जाता 
हमने जंगलों में उसका पीछा किया, सालों साल,
मगर हम रास्ता भूल गए 
हम पीछा करते रहे उसका अफ्रीका तक...बंगाल तक
नेपाल, करिबियन तक, माहोरका 
और ब्राज़ील के जंगलों तक
मगर कभी पहुँच नहीं पाए उस तक 
हमने प्रेम-विद्वानों से पूछे उनके समाचार 
और पाया कि वे हमसे अधिक कुछ नहीं जानते 

प्रेम क्या है? 
हमने संतों से पूछा उसके बारे में, हमने पूछा कथाओं के नायकों से 
उन्होंने कहे कितने सुन्दर शब्द, मगर हमें
नहीं हुआ विश्वास 
एक बार हमने अपने सहपाठियों से पूछा उसके बारे में 
और उन्होंने उत्तर दिया की प्रेम है एक स्वप्निल बच्चा 
जो एक नर्गिस के बारे में लिखता है कविता 
बटोरता है अपनी झोली में चींटियाँ,मूंगफलियाँ और बेर 
सहलाता है प्रताड़ित बिल्ली के बच्चों को 
हमने प्रेम-विशेषज्ञों से उनका अनुभव पूछा 
और पाया कि वे हमसे अधिक कुछ नहीं जानते 

प्रेम क्या है?
हमने पूछा उसके बारे में धर्मनिष्ठ और अच्छे लोगों से...व्यर्थ ही में 
हमने पूछा धर्म से जुड़े लोगों से...व्यर्थ ही में 
हमने प्रेमियों से पूछा उसके बारे में, और उन्होंने कहा:
वह बचपन में ही घर छोड़ कर चला गया था 
हाथ में पंछी और टहनी लिए 
और हमने पूछी उसकी आयु उन सब से जो उसकी आयु के थे 
और उन्होंने उपहास करते हुए कहा 
प्रेम की आयु कब से होने लगी 

प्रेम क्या है?
हमने सुना था कि वह है एक दैवी आज्ञा
जो हमने सुना था हमने मान लिया 
और हमने सुना था कि वह है एक दिव्य सितारा 
तो हम हर रात खोल देते अपनी खिड़कियाँ...और प्रतीक्षा में बैठे रहते
हमने सुना था कि वह बिजली है...कि उसको छू लेंगे तो
हम भस्म हो जाएँगे
हमने सुना था कि वह है एक तेज़ तलवार 
कि अगर निकाला म्यान से तो हम मारे जाएँगे
हमने पूछा प्रेम के राजदूतों से उनकी यात्राओं के बारे में 
और पाया कि वे हमसे अधिक कुछ नहीं जानते 

प्रेम क्या है?
हमने देखा उसका चेहरा आर्किड के फूल में...मगर हम 
कुछ नहीं समझे 
हमने सुनी उसकी आवाज़ कोयल की कूक में...फिर भी
हम नहीं समझे 
झलक देखी उसकी गेहूं की बाली में, हिरन की चाल में, 
अप्रैल के रंगों में 
शोपैं के संगीत में 
मगर हमने नहीं दिया ध्यान 
हमने प्रेम के पैगम्बरों से उनके रहस्य पूछे 
और पाया कि वे हमसे अधिक कुछ नहीं जानते 

और फिर हमने सहायता मांगी इतिहास के प्रेम-राजकुमारों से 
हमने राय ली लैला के पागल प्रेमी से 
हमने राय ली लुबना के पागल प्रेमी से 
और पाया की वे जिन्हें हम समझते थे प्रेम के राजकुमार 
प्रेम में जितने हम खुश थे कभी उस से अधिक खुश न थे.


-- -- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, अप्रैल 05, 2012

मैं लिखता हूँ

मैन ड्राइंग और राइटिंग,
विन्सेंट वान गोग
Man Drawing or Writing,
Vincent Van Gogh

मैं लिखता हूँ 
चीज़ों को विस्फोटित करने के लिए; 
सब लेखन एक विस्फोट है
मैं लिखता हूँ
ताकि रोशनी अँधेरे से जीत जाए 
और कविता की विजय हो 
मैं लिखता हूँ
ताकि गेहूँ की डालियाँ मुझे पढ़ें
और पेड़ मुझे पढ़ें 
मैं लिखता हूँ 
ताकि गुलाब मुझे समझे,
और सितारा, और पंछी,
और बिल्ली, मछली, सीपियाँ और कस्तूरा.
मैं लिखता हूँ 
इस दुनिया को बचाने के लिए हलाकू के कुत्ता-दांतों से 
सेनाओं के शासन से 
गैंग के अगुआ के पागलपन से 
मैं लिखता हूँ
औरतों को बचाने के लिए तानाशाहों की कोठरी से 
मुर्दों के शहरों से 
बहुविवाह की प्रथा से 
दिनों की नीरसता से,
औपचारिकता से, दोहराव से.
मैं लिखता हूँ
शब्द को बचाने के लिए न्यायिक जांच से 
कुत्तों द्वारा सूंघे जाने से 
सेंसर की फांसी से 
मैं लिखता हूँ
जिस औरत को प्यार करता हूँ उसे बचाने के लिए 
उन शहरों से जहाँ कविता नहीं है
जहाँ प्रेम नहीं है
कुंठा और निराशा के शहर 
मैं लिखता हूँ उसे एक धुंध-भरा बादल बनाने के लिए 

केवल औरत और लिखना 
बचाते हैं हमें मरने से.


-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और क्रिस्टोफर मिडल्टन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शुक्रवार, मार्च 02, 2012

वो जो मेरे भीतर चलती है

एट द कैफे-कॉन्सर्ट, एदुआर माने
At the Cafe-Concert, Edouard Manet

ऐसा कोई नहीं है 
जिसने पढ़ा हो मेरे कॉफ़ी के प्याले का तल और
न लगाया हो अनुमान कि तुम ही मेरी प्यार हो,
जिसने देखी हों मेरे हाथ की रेखाएँ 
और न पढ़े हो तुम्हारे नाम के चारों अक्षर,
सबकुछ नकारा जा सकता है,
जिसे हम प्यार करते हैं सिवाय उसकी खुशबू के
सब कुछ छुपाया जा सकता है,
सिवाय हमारे भीतर चलती औरत की पदचाप के 
हर चीज़ पर विवाद हो सकता है,
सिवाय तुम्हारे नारीत्व के.

यूँ इस तरह आने-जाने में 
आखिर क्या होगा हमारा?
जब सभी कॉफ़ी-हॉउस पहचान चुके हैं हमारे चेहरे,
सब होटल दर्ज कर चुके हैं हमारे नाम,
और सारी पटरियां हो चुकी है परिचित 
हमारे क़दमों के संगीत से?
हम दुनिया के सामने अनावृत हैं
किसी समुद्र की ओर खुलती बालकनी की तरह,
कांच के कटोरे में तैरती दो सोन-मछलियों की तरह,
साफ़-साफ़ दिखाई देते हैं.


-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और जेरेमी रीड ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, फ़रवरी 05, 2012

प्यार की तुलना

बूके विद फ़्लाइंग लवर्ज़, मार्क शगाल
Bouquet With Flying Lovers, Marc Chagall


मैं तुम्हारे अन्य प्रेमियों-सा नहीं हूँ, मादाम
अगर कोई और तुम्हें देता है एक बादल 
मैं तुम्हें बारिश देता हूँ
अगर वह तुम्हें दे एक लालटेन, 
मैं दूंगा तुम्हें चाँद 
अगर वह तुम्हें दे एक टहनी 
मैं तुम्हें पेड़ दूंगा 
और अगर कोई और देता है तुम्हें एक जहाज़ 
मैं दूंगा तुम्हें यात्रा.


-- निज़ार क़ब्बानी




 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और क्रिस्टोफर मिडल्टन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

सोमवार, जनवरी 02, 2012

कविता के दोस्तों

ट्री ऑफ़ जेसी, मार्क शगाल
Tree Of Jesse, Marc Chagall

मैं आग का पेड़  हूँ,
और चाह का पुजारी,
पचास लाख प्रेमियों का प्रवक्ता.
अपनी ललक लिए लोग सोते हैं मेरी बाहों में 
और कभी मैं बनता हूँ उनके लिए 
सफ़ेद कबूतर 
कभी चमेली का पेड़.
दोस्तों,
मैं वो घाव हूँ जो
हमेशा है अस्वीकार करता
चाक़ू की सत्ता.



-- निज़ार क़ब्बानी




 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और नाओमी शिहाब नाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, दिसंबर 01, 2011

प्रेम का खेल

कपल एंड फिश, मार्क शगाल
Couple And Fish, Marc Chagall

मैं तुम से प्रेम करता हूँ 
मगर नहीं खेलता 
प्रेम का खेल.
मैं तुमसे लड़ता नहीं हूँ 
जैसे कि बच्चे
समुद्र की मछलियों को लेकर,
तुम्हारे लिए लाल मछली,
मेरे लिए नीली.
तुम सारी लाल और नीली मछलियाँ ले लो 
मगर बनी रहो मेरी प्रेमिका.
समुद्र ले लो,
किश्तियाँ ले लो 
ले लो यात्री,
लेकिन बनी रहो मेरी प्रेमिका.
मेरी सारी संपत्ति ले लो 
केवल एक कवि हूँ मैं 
मेरी सारी संपत्ति 
है मेरी कापियों में 
और है 
तुम्हारी प्यारी आँखों में.


-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ारक़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे. यह कविता उनके संकलन 'वन हंड्रेड लव लेटर्ज़ ' से है.

इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के.फ्रंगिये व क्लेमनटीना आर. ब्राउन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

मंगलवार, नवंबर 01, 2011

तीन कविताएँ

लौरेटस हेड विद अ कॉफ़ी कप,  ओंरी मातीस
Laurette's Head With A Coffee Cup, Henri Matisse

प्याली और गुलाब 

हमारे प्यार को भुलाने के लिए 
अपने दुःख को डुबोने के लिए 
मैं कॉफ़ी-हाउस गया 
मगर मेरी 
कॉफ़ी की प्याली के तल से  
एक सफ़ेद गुलाब-सी 
उभर आईं तुम.



समीकरण 

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ 
इसलिए मैं हूँ
वर्तमान में.
मैं लिखता हूँ, प्रिय 
और पुनः पा लेता हूँ
बीते कल को.


शब्दों की चित्रकारी 

बीस साल बीत गए प्यार की राह पर मगर 
अभी भी इस रास्ते का कोई नक्शा नहीं है.
कभी-कभी मैं हुआ विजेता.
अधिकतर रहा पराजित.
बीस साल, ऐ प्रेम की पोथी 
और अभी भी पहले पन्ने पर हूँ.


-- निज़ार क़ब्बानी





 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और डायना देर होवानेस्सियाँ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, अक्टूबर 06, 2011

अभिनय

क्लाउन इन लव, मार्क शगाल
Clown In Love, Marc Chagall

दूसरों के सामने मैं कहता हूँ कि तुम मेरी प्रिय नहीं हो 
और भीतर गहरे कहीं मैं जानता हूँ कि मैं कितना झूठा हूँ
केवल मुश्किलों को हमसे दूर रखने के लिए 
दावा करता हूँ कि कुछ नहीं है हमारे बीच 
और मीठी होते हुए भी, 
मैं नकार देता हूँ प्यार की अफवाहों को 
और अपने सुन्दर इतिहास को खंडहर कर देता हूँ.
मूर्खों कि तरह, मैं स्वयं को निर्दोष घोषित करता हूँ 
अपनी इच्छाओं को मार डालता हूँ, साधू बन जाता हूँ
अपनी सुगंध मिटा देता हूँ, जान-बूझ कर 
तुम्हारी आँखों-बसे स्वर्ग से भाग जाता हूँ 
मसखरी करता हूँ, उस भूमिका में
असफल हो जाता हूँ मेरी प्यारी और लौट आता हूँ 
क्योंकि रात, चाहे कितना भी चाहे, 
अपने तारे नहीं छुपा सकती, 
न ही समुद्र, चाहे जितना भी चाहे, 
छुपा सकता है अपने जहाज़.


-- निज़ार क़ब्बानी


 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

मंगलवार, सितंबर 06, 2011

मैं तुम से प्यार करता हूँ

क्लाक विद ब्लू विन्ग्ज़, मार्क शगाल
Clock With Blue Wings, Marc Chagall



मैं हर दिन तुम से तीस साल प्यार करता हूँ
जब मैं अपने जीवन के साथ
दौड़ता हूँ यह दौड़
तुम्हारे लिए यह समय बहुत कम लगता है 
पल भागते जाते हैं 
और उनका पीछा करते 
ना जाने क्यों लगता है मुझे
कि मैं कुछ स्थापित कर रहा हूँ 
धरती की कोख में कुछ बो रहा हूँ 
ना जाने क्यों लगता है मुझे 
कि जब मैं तुमसे प्यार करता हूँ 
मानो अपने ही समय को परिवर्तित कर रहा हूँ.



-- निज़ार क़ब्बानी


 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और नाओमी शिहाब नाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, अगस्त 07, 2011

ईश्वर से प्रश्न

द कैथीड्रल, ओग्यूस्त रोदें
The Cathedral, Auguste Rodin 

हे ईश्वर :
जब हम प्यार करते हैं हम पर क्या विजय पा लेता है?
हमारे भीतर गहरे कहीं क्या होने लगता है?
हमारे अन्दर क्या टूट जाता है?
ऐसा कैसे है कि जब प्यार करते हैं 
लौट जाते हैं हम एक बार फिर बचपन में ?
ऐसा कैसे होता है कि पानी की एक बूँद 
बन जाती है सागर 
ताड़ के पेड़ और ऊंचे हो जाते है 
समुद्र का पानी और मीठा 
सूरज एक कीमती हीरों-जड़ा कंगन कैसे बन जाता है
जब हम प्यार करते हैं?

हे ईश्वर :
जब अचानक प्यार घटित होता है 
वह क्या है जो हम अपने में से जाने देते हैं?
वह क्या है जो हम में पैदा हो जाता है?
क्यों हम नन्हे स्कूली बच्चों-से 
सरल और मासूम हो जाते हैं?
और ऐसा क्यों होता है 
कि जब हमारी प्रियतमा हँसती है 
दुनिया करती है हम पर मोगरे की बारिश 
ऐसा क्यों होता है 
कि जब वह हमारे काँधे पर सर रख कर रोती है 
दुनिया एक दुःख भरा पंछी बन जाती है?

हे ईश्वर :
उसे क्या कहते हैं, उस प्यार को
जिसने सदियों-सदियों आदमियों को मार डाला है, 
किलों को जीता है 
शक्तिशाली को नीचा दिखाया है 
निरीह और सीधे-सादे लोगों को पिघलाया है?
ऐसा कैसे होता है कि हमारी प्रेमिका के बाल 
सोने का बिछौना बन जाते हैं
और उसके होंठ मदिरा और अंगूर?
ऐसा कैसे है कि हम आग में से गुज़रते हैं
और आंच का आनंद उठाते हैं?
हम बंदी कैसे बन जाते हैं जबकि हमने प्यार 
विजयी राजा होने के बाद किया होता है?
उस प्यार को हम क्या कहते हैं 
जो चाक़ू की तरह हमारे अन्दर घुस जाता है ?
क्या वह एक सरदर्द है?
क्या वह पागलपन है?
ऐसा कैसे होता है कि बस एक ही पल में 
दुनिया एक हरी-भरी वादी...
एक मधुर-सी जगह बन जाती है
जब हम प्यार करते हैं?

हे ईश्वर :
हमारी बुद्धि को क्या हो जाता है? 
हमें क्या हो जाता है?
ललक का एक पल बरसों लम्बा कैसे हो जाता है 
और माया प्यार में यथार्थ कैसे बन जाती है?
कैसे साल के सप्ताह एक-दूसरे से जुड़े नहीं रह पाते?
ऐसा कैसे होता है कि प्यार मौसमों के भेद मिटा देता है?
तो सर्दियों में गर्मियाँ हो जाती हैं 
और जब हम प्यार करते हैं 
आकाश के बागीचों में गुलाब खिलने लगते हैं ?

हे ईश्वर :
हम प्यार के सामने समर्पण कैसे करें,
कैसे सौंप दे उसको अपने अंतर्मन की चाबी
उसके सामने दिए जलाएँ, सुगंध ले जाएँ 
ऐसा कैसे होता है कि क्षमा मांगते हुए,
हम उसके पैरों में गिर जाते हैं 
ऐसा कैसे होता है कि
हम चाहते हैं उसकी रियासत में दाखिल होना
वह हमें जो भी करे 
वह जो भी करे उसके आगे समर्पित होना.

हे ईश्वर :
अगर तुम सच्चे ईश्वर हो 
तो हमें हमेशा प्रेमी रहने देना.


-- निज़ार क़ब्बानी 


 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 की उम्र से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह छप चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे. 
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

बुधवार, जुलाई 06, 2011

चित्रकारी

द स्कूलबॉय, विन्सेंट वान गोग
The Schoolboy, Vincent Van Gogh 

अपना रंगों का डिब्बा मेरे सामने रख
मेरा बेटा मुझ से एक पंछी बनाने को कहता है.
स्लेटी रंग में ब्रश डुबोकर मैं बनाता हूँ
छड़ों और तालों वाला एक चौकोर.
उसकी आँखों में आश्चर्य भर आता है : 
"...मगर ये तो जेल है, पिताजी,
आप को क्या पंछी बनाना नहीं आता? "
और मैं उससे कहता हूँ : 
बेटा, माफ़ कर दो मुझे,
मैं पंछियों का आकार ही भूल चुका हूँ.

                      -----

मेरे बिस्तर पर सिरहाने बैठा मेरा बेटा 
मुझे कविता सुनाने को कहता है.
एक आंसू मेरी आँख से तकिये पर गिरता है.
मेरा बेटा उसे चाट लेता है, और आश्चर्यचकित हो कहता है : 
" मगर यह तो आंसू है, पिताजी, कविता नहीं! "
और मैं उससे कहता हूँ :
" मेरे बच्चे, जब तुम बड़े हो जाओगे 
और अरबी कविता का दीवान पढ़ोगे 
तो तुम पाओगे कि शब्द और आंसू जुड़वा ही हैं 
और अरबी कविता और कुछ नहीं
लिखती उँगलियों का रोया हुआ आंसू है.

                       -----

मेरा बेटा अपने पेन और अपना क्रेयान का डिब्बा
मेरे सामने रखता है 
और मुझ से अपने लिए एक वतन बनाने को कहता है.
मेरे हाथों में ब्रश कांपता है, 
और रोते-रोते मैं ढह-सा जाता हूँ.


-- निज़ार क़ब्बानी 


 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 की उम्र से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह छप चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और नाओमी शिहाब नाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़