बुधवार, सितंबर 19, 2012

तनाव में

समर ईवनिंग, व्हीट फील्ड विद सेटिंग सन,
विन्सेंट वान गोग
Summer Evening, Wheat Field with Setting Sun
Vincent van Gogh
नीले आकाश के इंजन की घरघराहट बहरा कर देने वाली है.
हम एक हिलते थरथराते कार्यस्थल में जी रहे हैं
जहाँ समुद्र की गहराइयाँ अचानक खुल सकती हैं --
सीप और टेलिफोन की फुफकार.

तुम सौंदर्य को केवल एक ओर से ही देख सकते हो, जल्दी से.
खेत में लदा घना गेहूं, एक पीली धार में अनेक रंग.
मेरे सर में डोलती व्याकुल छायाएँ वहाँ खिंची चली जाती हैं.
वे गेहूं में घुसना चाहती हैं और सुनहरी होना चाहती हैं.

अँधेरा घिरता है. आधी रात को मैं सोने जाता हूँ.
छोटी नाव बड़ी नाव से निकल अपनी यात्रा आरम्भ करती है.
तुम पानी पर एकदम अकेले बह रहे हो.
समाज के जहाज़ का काला ढांचा दूर, और दूर होता जाता है.


-- तोमास त्रांसत्रोमर 


 तोमास त्रांसत्रोमर ( Tomas Tranströmer )स्वीडन के लेखक, कवि व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में, बल्कि दुनिया भर में सराही गयीं हैं. उन्हें 2011 का नोबेल पुरुस्कार प्राप्त हुआ है. उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक  कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओँ में अनूदित की गईं हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए है जिनमे इंटरनैशनल पोएट्री फोरम का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए कई वर्षों से नामित किये जा रहे थे. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पड़ा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता है, मगर दूसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं. यह कविता  उनके संकलन 'बेल्ज़ एंड ट्रैक्स'से है.

इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद उनके कवि रोबेर्ट फुल्टन ने किया है.

सोमवार, सितंबर 17, 2012

हमने स्वयं को समय दिया


डील्यूज, मिकालोयुस चिर्लोनियस
Deluge, Mikalojus Ciurlionus
हमने स्वयं को समय दिया, हमने
स्वयं को खो दिया, हमने पीछा किया

सूर्य का, कितनी बार हम सोए
पुआल के बिस्तर पर,

और अब, कितनी ठंडी है
हवा की स्मृति

हम कह सकते हैं कि बारिश ने बरसाया था
एक दीर्घ मौन,

और वह ऐसा होता है जैसे सांझ में
जन्म लेते हैं देव

मगर इतने छोटे
कि पंछी उन्हें चुगते हैं दानों की तरह.


-- क्लौद एस्तेबान


  क्लौद एस्तेबान (Claude Esteban) एक फ्रेंच कवि , निबंधकार व अनुवादक थे। वे फ्रेंच व स्पेनिश दोनों भाषाओं में सिद्धहस्त थे। पिछली सदी के दूसरे हिस्से के प्रमुख कवियों में से एक, वे अपने पीछे महत्वपूर्ण कृति छोड़ गए हैं। उन्होंने कला व कविता पर असंख्य निबंध लिखे व स्पैनिश भाषा के प्रमुख कवियों ओक्टावियो पास, बोर्खेस, लोर्का इत्यादि की कविताओं व लेखन का अनुवाद किया। आरम्भ में वे फ्रेंच कला व साहित्य की पत्रिकाओं में लेख लिखते रहे। 1968 में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ --'ला सेजों देवास्ते '.इसके बाद उनके कई संकलन प्रकशित हुए, वे प्रसिद्द कलाकारों के लिए उनकी प्रदर्शनियों के कैटालोग के लिए प्रस्तावनाएँ लिखते रहे। स्पेनी कवि होर्खे गुइयें से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई व उन्होंने उनके कृत्य का  फ्रेंच में खूब अनुवाद किया। 1984 में उन्हें अपनी गद्य कविताओं के लिए मालार्मे पुरूस्कार प्राप्त हुआ। कला में उन्हें गहरी रूचि रही और 1991 में उन्हें एडवर्ड हापपर के चित्रों से प्रेरित कविता संकलन 'सोलई दौन्ज़ युन पीएस वीद ' के लिए फ्रांस कल्चर प्राइज़ प्राप्त हुआ। उनके 13 कविता संकलन, कई निबंध व अनेक अनुवाद प्रकाशित हुए,. यह कविता उनके संकलन 'स्यूर ला देर्नियेर लॉनद ' से है।
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, सितंबर 15, 2012

अनुपस्थिति का सिद्धांत

सेवेरल सर्क्ल्ज़, वैसिली कैन्डिन्सकी
Several Circles, Wassily Kandinsky
परिकल्पना: मैं तनाव में हूँ और तुम भी.
हम न मिलते हैं न अलग होते हैं.
वांछित परिणाम: हम अनुपस्थिति में मिलते हैं.
प्रमाण: जैसे तनाव लोगों को वृतांशों में बदल देता है,
हम दो वृतांश हैं.
हम न मिलते हैं न अलग होते हैं (परिकल्पना)
तो, हम अवश्य ही समानांतर होंगे.
अगर दो रेखाओं को
तीसरे रेखा द्वारा द्विभाजित किया जाता है
( जो यहाँ पर, तनाव की रेखा है)
उनके संगत कोण बराबर होंगे ( एक ज्यामितिय प्रमेय).
तो, हम समनुरूप हैं
( क्योंकि जब उनके कोण बराबर होते हैं
आकार समनुरूप होते हैं )
और हम एक वृत्त बनाते हैं ( चूंकि दो
समनुरूप वृतांशों का जोड़
एक वृत्त होता है).
इसलिए हम मिलते हैं अनुपस्थिति में
(चूंकि एक वृत्त की परिधि
होती है संस्पर्शी बिन्दुओं का जोड़
और हर एक को समझा जा सकता है
स्पर्श-बिंदु).


-- दून्या मिखाइल 


image-dunya2  दून्या मिखाइल ( Dunya Mikhail )एक इराकी-अमरीकी कवयित्री हैं. वे अरबी में लिखतीं हैं व उनकी कविताएँ इराक के हालात , युद्ध, युद्ध से प्रभावित जीवन व विस्थापन के बारे में हैं. अरबी में उनकी कविताओं के पांच संकलन प्रकाशित हुए हैं. उनकी अंग्रेजी में अनूदित कविताओं के दो संकलन प्रकाशित हुए हैं, जिन में 'द वार वर्क्स हार्ड' को PEN ट्रांसलेशन अवार्ड मिला व 'डायरी ऑफ़ अ वेव आउटसाइड द सी' को अरब अमेरिकेन बुक अवार्ड मिला है. 2001 में उन्हें यू एन ह्यूमन राइट्स अवार्ड फॉर फ्रीडम ऑफ़ राइटिंग प्राप्त हुआ.
वे 1996 से अमरीका में रहती हैं व अरबी पढ़ाती हैं.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद इलीज़ाबेथ विन्ज्लो ने किया है.    
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, सितंबर 13, 2012

शिन्टो

स्टिल लाइफ विद अ बुक, पॉल सीनियैक
Still Life With a Book, Paul Signac
जब दुःख हमें पछाड़ देते हैं
एक पल के लिए हमें बचा लेता है 
कुछ सादा पर अप्रत्याशित
जो आता है चेतना से, स्मृति से:
स्वाद एक फल का, पानी का स्वाद,
वह चेहरा जो एक स्वप्न हमें लौटा देता है,
नवम्बर की पहली चमेली,
दिक्सूचक की अनंत चाह,
एक किताब
जो हमनें समझा था कि खो गई है,
एक षट्पदी की धमक,
वह छोटी-सी चाबी
जो खोल देती है हमारे लिए एक घर,
पुस्तकालय की गंध, या संदल की,
एक सड़क का पूर्व नाम,
एक नक़्शे के रंग,
एक आकस्मिक शब्द व्युत्पत्ति,
तराशे नाखून का चिकनापन,
वह तिथि जो हम ढूंढ रहे थे,
घंटे के बारह गहरे प्रहार, हमारे गिनने के साथ बजते हुए,
शरीर में अचानक उठा दर्द.

अस्सी लाख शिन्टो देवता
पूरी धरती पर चुपचाप भ्रमण करते हैं.
ये विनम्र देव हमें छूते हैं,
छूते हैं और आगे बढ़ जाते हैं.


-- होर्खे लुईस बोर्खेस 



Jorge Luis Borges होर्खे लुईस बोर्खेस ( Jorge Luis Borges ) अर्जन्टीना के लेखक, कवि व अनुवादक थे. वे 20 वीं सदी के प्रमुख लेखकों में गिने जाते हैं. वे अपनी कहानियों व निबंधों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्द हैं. 1961 से पहले, जब उन्हें व सैम्युएल बेक्केट को एक साथ फोर्मनटर प्राइज़ मिला था, वे केवल अर्जन्टीना में ही अधिक जाने जाते थे. उसके बाद से, उनके लेखन का अंग्रेजी में खूब अनुवाद हुआ और वे दुनिया भर में सराहे गए. उनकी कहानियों में फंतासी व सपनों की दुनिया खूब मिलती है. अन्य सम्मानों सहित उन्हें सेर्वोंत प्राइज़ व फ़्रांस का लेजियन ऑफ़ ओनर भी प्राप्त हुआ था.
इस कविता का स्पैनिश से अंग्रेजी में अनुवाद ए एस क्लाइन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, सितंबर 11, 2012

बेकार ही में भरे एक गिलास की तरह...

ग्लास ऑफ़ वाइन, पिएर-ओग्यूस्त रेनोआ
Glass of Wine, Pierre Auguste Renoir
बेकार ही में भरे एक गिलास की तरह
जो मेज़ पर से कोई नहीं उठाता,
मेरे दुःख-विहीन मन में उमड़ता है
वह दुःख जो उसका अपना नहीं है.

वह अभिनीत करता है उदास स्वप्न
करने के लिए केवल उनका अनुभव
और बचाने के लिए स्वयं को उस दुःख से
जिससे भयभीत होने का वह ढोंग कर रहा है.

कल्पित कथा,
और महीन कागज़ में लिपटी
जिस मंच पर वह खेली जा रही है
वह लकड़ी का नहीं है,
वह नक़ल उतारती है दुखों के नृत्य की
ताकि घटित ना हो कुछ भी.


-- फेर्नान्दो पेस्सोआ



 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने अपने ही नाम से लिखी थी, यह बताना ज़रूरी है क्योंकि अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ  के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने  मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'सोंगबुक 'से है.
इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, सितंबर 09, 2012

धूल

ला प्रोमेनाद, मार्क शगाल
La Promenade, Marc Chagall


हमनें क्या खो दिया, वह क्या था जो भीतर कहीं खो गया?
किसकी हैं ये दूरीयाँ जिन्होनें हमें अलग कर दिया था
और जो अब हमें बाँध रही हैं एक साथ?

क्या हम अभी भी एक हैं
या टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं हम दोनों के? कितनी कोमल है यह धूल --
अब उसकी देह, और मेरी, इस क्षण में
एक ही हैं



-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके 2003 के संकलन 'बिगिनिन्ग्ज़ ऑफ़ द बॉडी, एंडज़ ऑफ़ द सी' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शुक्रवार, सितंबर 07, 2012

रयु द सेन

कपल वाचिंग, पाब्लो पिकासो
Couple Watching, Pablo Picasso
रात को साढ़े दस बजे
सेन सड़क के उस कोने पर
जहाँ एक और सड़क आकर मिलती है
एक आदमी लड़खड़ाता  है
एक नौजवान
हैट पहने
रेनकोट पहने
एक औरत उसे पकड़ के झकझोर रही है
झकझोर रही है
और कुछ कह रही है
और
वह सर हिला रहा है - नहीं
उसका हैट इधर-उधर हो रहा है
और औरत का तो पीछे गिरने ही वाला है
दोनों के चेहरे पीले
पड़ गए हैं
आदमी का मन है कि
वहाँ से चला जाए
गायब हो जाए...मर जाए
मगर औरत की जीने की तीव्र इच्छा है
और उसकी आवाज़
उसकी फुसफुसाती आवाज़
चाह कर भी बिना सुने नहीं रह सकते
वह एक आह है
एक आदेश
एक पुकार
कितनी आतुर है
यह आवाज़
और उदास
और जीवित
सर्दियों के कब्रिस्तान में
कब्र पर ठिठुरते नए-जन्मे बीमार बच्चे-सी
दरवाज़े में दबे हाथ कि दर्दभरी आवाज़
एक गीत
एक वाक्य
हमेशा वही
दोहराया हुआ
एक वाक्य
बिना रुके
बिना जवाब
आदमी उसे देख आँखे फेर लेता है
अपनी
बाहों को हिलाता है
एक डूबते हुए की तरह
और वाक्य फिर फूट पड़ता है
सेन सड़क के उस कोने पर
जहाँ एक और सड़क आकर मिलती है
औरत बोलती जा रही है
बिना थके
पूछती जा रही है अपना बेचैन सवाल
न भर पाने वाला घाव
पिएर, सच क्या है
पिएर, सच क्या है
मुझे सब जानना है
सच-सच कहो मुझसे
औरत का हैट गिर जाता है
पिएर, मुझे सब जानना है
सच-सच कहो मुझसे
महान बेवकूफी का सवाल
पिएर को जवाब देना होगा
वह हार गया
वह जिसका नाम पिएर है
उसकी एक मुस्कान है
जिसे वह बिखेरना चाहता है
और बार
-बार कह रहा है
देखो, शांत हो जाओ, तुम पगला रही हो
मगर उसे नहीं लगता वह ठीक से कह पा रहा है
वह देख नहीं रहा
वह देख नहीं पा रहा
कैसे मुस्कान से उसका चेहरा विकृत हो रहा है
उसका दम घुट रहा है
मानो सारी दुनिया उसपर चढ़ बैठी हो
और वह सांस नहीं ले पा रहा
मानो वह बंदी हो
अपने ही वायदों का
अब उस से हिसाब माँगा जा रहा है
सामने है
एक हिसाब करने वाली  मशीन
एक प्रेम-पत्र लिखने वाली मशीन
एक सहने वाली मशीन
जो उसे दबोच लेती है...
उस पर लटक जाती है ...
पिएर, सच-सच कहो मुझसे


-- याक प्रेवेर


 याक प्रेवेर  ( Jacques Prévert )फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है. 
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़