सोमवार, नवंबर 12, 2012

रोशनी

कोर्फू: लाइट्स एंड शैडोज़, जॉन सिंगर सार्जेंट
Corfu: Lights and Shadows, John Singer Sargent

रोशनी, जो आगे-आगे चलती
हो हमेशा, तुम्हारा हाथ थामूंगा मैं
एक दिन, अचानक कितना सहज
हो जाएगा सब, चीज़ें और लोग,
शब्द जो कठोर हो जाते थे जिह्वा पर,
सब पारदर्शी हो जाएगा हमारे लिए,
रोशनी जो रूकती नहीं किसी जगह,
देखो रुक रही हो तुम,
और रुक रही है मेरी पीड़ा भी
और प्रतीक्षा कर रही हो तुम मेरी.



-- क्लौद एस्तेबान



 क्लौद एस्तेबान (Claude Esteban) एक फ्रेंच कवि , निबंधकार व अनुवादक थे। वे फ्रेंच व स्पेनिश दोनों भाषाओं में सिद्धहस्त थे। पिछली सदी के दूसरे हिस्से के प्रमुख कवियों में से एक, वे अपने पीछे महत्वपूर्ण कृति छोड़ गए हैं। उन्होंने कला व कविता पर असंख्य निबंध लिखे व स्पैनिश भाषा के प्रमुख कवियों ओक्टावियो पास, बोर्खेस, लोर्का इत्यादि की कविताओं व लेखन का अनुवाद किया। आरम्भ में वे फ्रेंच कला व साहित्य की पत्रिकाओं में लेख लिखते रहे। 1968 में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ --'ला सेजों देवास्ते '.इसके बाद उनके कई संकलन प्रकशित हुए, वे प्रसिद्द कलाकारों के लिए उनकी प्रदर्शनियों के कैटालोग के लिए प्रस्तावनाएँ लिखते रहे। स्पेनी कवि होर्खे गुइयें से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई व उन्होंने उनके कृत्य का  फ्रेंच में खूब अनुवाद किया। 1984 में उन्हें अपनी गद्य कविताओं के लिए मालार्मे पुरूस्कार प्राप्त हुआ। कला में उन्हें गहरी रूचि रही और 1991 में उन्हें एडवर्ड हापपर के चित्रों से प्रेरित कविता संकलन 'सोलई दौन्ज़ युन पीएस वीद ' के लिए फ्रांस कल्चर प्राइज़ प्राप्त हुआ। उनके 13 कविता संकलन, कई निबंध व अनेक अनुवाद प्रकाशित हुए,. यह कविता उनके संकलन 'ल यूर आ पेन एकरी'' से है।
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, नवंबर 10, 2012

हर दिन

कपल एंड बास्केट विद फ्रूट, मार्क शगाल
Couple and Basket with Fruit, Marc Chagall

हर दिन हम बढ़ाते हैं हाथ अपनी देहों की ओर --
               हम पलटते हैं अपने दिन
               उनकी किताबों में

               एक फल
               मगर उसका चुनना एक देश
 है 
               जिसकी सीमाएँ नहीं हैं 




-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके 2003 के संकलन 'बिगिनिन्ग्ज़ ऑफ़ द बॉडी, एंडज़ ऑफ़ द सी' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

गुरुवार, नवंबर 08, 2012

क्यों है ऐसा मौन?

दी एज ऑफ़ अ हीथ बाय मूनलाइट, जॉन कांस्टेबल
The Edge of a Heath by Moonlight, John Constable
शायद ही सांस ले रहे हैं पत्ते
इस श्यामल पवन में;
वृत्त बना रहे हैं सांझ में
पंख फड़फड़ाते अबाबील.

मेरे प्रेम-भरे
मुरझाते मन में
छा रही है सांझ ,
एक आखिरी रश्मि,
प्यार से झिड़कती है.

और सांध्य अरण्य के ऊपर
कांसे का चाँद
चढ़ कर ग्रहण करता है अपना स्थान.
संगीत क्यों थम गया है?
क्यों है ऐसा मौन?



-- ओसिप मैंडलस्टैम



Osip Mandelstam ओसिप मैंडलस्टैम ( Osip Mandelstam )रूसी कवि व निबंधकार थे और विश्व साहित्य में भी उनकी गीतात्मक कविताओं का विशिष्ट स्थान है. वे यहूदी थे और उनका परिवार पोलिश मूल का था, मगर वे सेंट पीटर्सबर्ग में बड़े हुए. स्कूल के समय से ही वे कविता लिखने लगे थे. उन्होंने अपने समकालीन रूसी कवियों के साथ मिल कर 'एक्मेइज़म'  ( Acmeism ) की स्थापना की. 22 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ -- द स्टोन. जब उनकी कविताओं में रूसी क्रांति के दिग्भ्रमित होने का दुःख छलकने लगा, तो स्तालिन ने उन्हें निर्वासित कर दिया. उनके अनेक कविता व निबंध संग्रह प्रकाशित हुए व उनकी कविताओं का खूब अनुवाद भी किया गया है. यह कविता उनके संकलन 'स्टोन' से है.
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद क्लेरन्स ब्राउन व डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, नवंबर 06, 2012

लम्बी व्यस्तता के बाद

हॉर्स ऑन द शोर ऑफ़ अ लेक,
जोर्जियो द किरीको
Horse on the Shore of a Lake,
Giorgio de Chirico
डेस्क पर हफ़्तों बिताने के बाद
आखिर निकलता हूँ मैं सैर के लिए
चाँद पैरों तले कहीं हल चलाने गया है
तारे नहीं हैं, रोशनी का सुराग तक नहीं !
अगर इस खुले खेत में
कोई घोड़ा सरपट दौड़ता मेरी ओर आ रहा हो तो?
जो नहीं बिताया मैंने एकांत में

हर वो दिन निरर्थक था.


--  रोबर्ट ब्लाए



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है.


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, नवंबर 04, 2012

पतझड़

ऑटम लीव्स, आइसाक लेवितान
Autumn Leaves, Isaac Levitan



एक घोडा गली के बीचों-बीच 
ढेर हो जाता है
उस पर पत्ते गिरते हैं
हमारा प्यार काँपता है
और सूरज भी





-- याक प्रेवेर




 याक प्रेवेर  ( Jacques Prévert )फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है. 
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शुक्रवार, नवंबर 02, 2012

समुद्र के तल से पत्र

ब्लू विलेज, मार्क शगाल
Blue Village, Marc Chagall
अगर तुम मेरी दोस्त हो...
मदद करो मेरी...कि तुम्हें छोड़ सकूँ
और अगर तुम हो मेरी प्रेमिका...
मेरी मदद करो...कि तुम्हारे रोग से अच्छा हो सकूँ...
अगर मैं जानता...
कि समुद्र बहुत गहरा है...मैंने नहीं की होती तैरने की हिम्मत...
अगर मैं जानता...अंत कैसा होगा,
मैंने नहीं किया होता आरम्भ

तुम्हें चाहता हूँ मैं...तो सिखाओ मुझे ना-चाहना
सिखाओ मुझे...
कहीं गहरे से तुम्हारे प्रेम की जड़ें कैसे काटूँ
सिखाओ मुझे...
कैसे अश्रु आँखों में ही दम तोड़ सकें
और प्रेम कर सके अपनी ही हत्या

अगर तुम पैगम्बर हो,
झाड़ कर हटा दो इस जादू-टोने को मुझसे
बचा लो मुझे इस अनीश्वरवाद से...
तुम्हरा प्रेम अनीश्वरवाद ही तो है...इस अनीश्वरवाद से शुद्ध करो मुझे

अगर तुम में बल है...
बचा लो मुझे इस समुद्र से
क्योंकि मुझे तैरना नहीं आता
वे नीली लहरें...तुम्हारी आँखों की...
खींच ले जाती हैं मुझे...गहराइयों में
नीली...
नीली...
कोई रंग नहीं नीले के सिवा
और मेरे पास नहीं है
प्रेम का अनुभव...और न ही नाव है...

अगर मैं तुम्हें प्रिय हूँ
तो लो मेरा हाथ
क्योंकि मैं सर से पैर तक...
चाह ही चाह हूँ

पानी के नीचे सांस ले रहा हूँ मैं!
डूब रहा हूँ मैं...
डूब रहा हूँ...
डूब रहा हूँ...



-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.यह कविता उनके संकलन "वन हंड्रेड लव लेटर्ज़"से है .

इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के फ्रंगिया ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, अक्टूबर 31, 2012

वह चुप है और मैं भी...

सेल्फ-पोर्ट्रेट विद अ  बाटल ऑफ़ वाइन,
एडवर्ड मंच
Self Portrait with a Bottle of Wine,
Edvard Munch 
वह चुप है और मैं भी.
वह पीता है नींबू वाली चाय, जब कि मैं पीता हूँ कॉफ़ी.
यह अंतर है हम दोनों में.
मेरी ही तरह, उसने पहनी है चौड़ी धारियों वाली कमीज़,
और उसी की  तरह, शाम का अखबार पढ़ता हूँ मैं.
वह नहीं देखता मुझे छुप कर उसे देखते हुए.
मैं नहीं देखता उसे छुप कर मुझे देखते हुए.
वह चुप है और मैं भी.
वह वेटर से
कुछ पूछता है
मैं वेटर से कुछ पूछता हूँ...
एक काली बिल्ली गुज़रती है हम दोनों के बीच से.
उसके रोओं की रात को मैं महसूस करता हूँ
और वह भी महसूस करता है उसके रोओं की रात...
मैं उस से नहीं कहता: आज आकाश साफ़ है, नीला है.
वह मुझ से नहीं कहता: आज आकाश साफ़ है.
वह देखा जा रहा है और है देखने वाला भी
और मैं देखा जा रहा हूँ और हूँ देखने वाला भी.
मैं अपना बायाँ पैर हिलाता हूँ.
वह हिलाता है अपना दायाँ पैर.
मैं गुनगुनाता हूँ एक गीत की धुन
और वह वैसे ही गीत की धुन गुनगुनाता है.
मैं सोचता हूँ: क्या वह आइना है जिसमें मैं देखता हूँ स्वयं को?
और मुड़ कर झांकता हूँ उसकी आँखों में...मगर वह दिखाई नहीं देता.
मैं कैफ़े से जल्दी-जल्दी निकलता हूँ.
मैं सोचता हूँ: शायद वह कोई हत्यारा था...
या कोई राही जो सोचता है
कि मैं हत्यारा हूँ.
वह डरा हुआ है...और मैं भी.



-- महमूद दरविश 



 महमूद दरविश ( Mahmoud Darwish )एक फिलिस्तीनी कवि व लेखक थे जो फिलिस्तीन के राष्टीय कवि भी माने जाते थे. उनकी कविताओं में अक्सर अपने देश से बेदखली का दुःख प्रतिबिंबित होता है. उनके तीस कविता संकलन व आठ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. अपने लेखन के लिए, जिसका बीस भाषाओँ में अनुवाद भी हो चुका है, उन्हें असंख्य अवार्ड मिले हैं. फिलिस्तीनी लोगों के 'वतन' के लिए संघर्ष के साथ उनकी कविताओं का गहरा नाता है. जबकि उनकी बाद की कविताएँ मुक्त छंद में  लिखी हुईं और कुछ हद तक व्यक्तिगत हैं, वे राजनीती से कभी दूर नहीं रह पाए.

इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद ओम्निया अमीन व रिक लन्दन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़