रविवार, नवंबर 18, 2012

पियानो

मिसेज़ मेगज़ एट द पियानो ऑर्गन, विलियम मेरिट चेज़
Mrs. Meigs at the Piano Organ, William Merritt Chase



पियानो बजा रही हूँ: दुनिया की ओर पीठ है मेरी.
पियानो बजा रही हूँ: एक ऊंची दीवार के पीछे.
पियानो बजा रही हूँ: जैसे हो खदान में उतरना,
या अधिक पी कर रंगरली मनाना,
साथ किसी को भी न ले जाना.


-- वेरा पाव्लोवा 




 वेरा पाव्लोवा ( Vera Pavlova) रूस की सबसे प्रसिद्द समकालीन कवयित्री हैं. उनका जन्म मॉस्कोमें हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की व संगीत के इतिहास विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की. कुछ समय बाद ही उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई और उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ किया. उनके 14 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व रूस में उनकी किताबें खूब बिकती हैं. उन्होंने चार ओपेरा लिबेरेतोज़ के लिए संगीत लिखा है व कुछ बोल भी. उनकी कविताएँ 18भाषाओँ में अनूदित की गयी हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन 'लेटर्ज़ टू अ रूम नेक्स्ट डोर : 1001 कन्फेशंज़ ऑफ़ लव ' से है.

इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीवन सेमूर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, नवंबर 16, 2012

पतझड़ गीत

फारेस्ट एज, वैसिली केंडिंस्की
Forest Edge, Wassily Kandinsky

लगभग बीत ही गया है एक और वर्ष, छोड़ गया है 
चारों ओर अपने उत्साही उर्वर अवशेष: बेलें, पत्ते,

अँधेरे सीलन-भरे कोनों में पड़े झुर्रियों वाले 
बिना खाए हुए फल, बीते ग्रीष्म के 

विशेष द्वीप से अपदार्थित होता यह पल, यह 
वर्त्तमान जो और कहीं नहीं,

केवल पैरों के तले है, सड़ता हुआ 
उस अँधेरे भूमिगत महल में,

जहाँ हैं अलक्ष्य रहस्य -- जड़ें और मुहर बंद बीज 
और पानी की घुमक्कड़ी. यह याद रखने का 

प्रयत्न करती हूँ मैं जब समय का परिमाण 
रगड़ कर छीलता है, दुखता है, उदहारण के लिए 

जब पतझड़ जाते-जाते अंत में भड़कता है, 
प्रचंड और हमारी ही तरह 

हमेशा रहने की इच्छा लिए --
कैसे जीता है सबकुछ, हमेशा 

इन क्षणिक चारागाहों में, एक उज्जवल 
दृश्य से  दूसरे की ओर पलटता हुआ.



-- मेरी ओलिवर



Mary Oliver मेरी ओलिवर ( Mary Oliver )एक अमरीकी कव्यित्री हैं, जो 60 के दशक से कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. उनके 25 से अधिक कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और बहुत सराहे गए हैं. उन्हें अमरीका के श्रेष्ठ सम्मान 'नेशनल बुक अवार्ड' व 'पुलित्ज़र प्राइज़' भी प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताएँ प्रकृति की गुप-चुप गतिविधियों के बारे में हैं, जैसे वो धरती और आकाश के बीच खड़ीं सब देख रहीं हैं. और  उनकी कविताओं में उनका अकेलेपन  से प्यार, एक निरंतर आंतरिक एकालाप व स्त्री का प्रकृति से गहरा सम्बन्ध भी दिखाई देता है..
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, नवंबर 14, 2012

नए शहर के कैफे में पहली चंद घड़ियाँ

कैफ़े तेरास, प्लास दयु फोरम
विन्सेंट वान गोग
Cafe Terrasse, Place du Forum
Vincent Van Gogh
आह,
वो पहली चंद घड़ियाँ नए शहरों के कैफे में!
एक शांत दीप्त मौन से पूर्ण,
स्टेशन या बंदरगाह पर सुबह-सुबह की आमद!जहाँ अभी-अभी पहुंचे हों
उस शहर के सबसे पहले दिखे पैदल लोग,
और जब हम यात्रा करते हैं, 
वह समय के बीतने की अनोखी आवाज़..

बसें या ट्रामें या गाड़ियाँ...
अनूठे देशों में सड़कों की अनूठी छटा...
शान्ति, जो वे देती प्रतीत होती हैं हमारे दुःख को,
ख़ुशी-भरी हलचल, जो हमारी उदासी के लिए है उनके पास,
हमारे मुरझाये-हुए मन के लिए नीरसता की अनुपस्थिति!
बड़े, विश्वसनीय ढंग से समकोणीय चौक,
इमारतों की कतारों वाली सड़कें जो दूर जाकर मिल जाती हैं,
एक-दूसरे को काटती सड़कें जहाँ अपनी रूचि का कुछ-न-कुछ 
मिल जाता है अकस्मात ही,
और इस सब में, जैसे कुछ उमड़ता है बिना कभी बह निकलने के,
गति, गति,
द्रुत रंग की मानुषिक चीज़ जो आगे बढ़ जाती है और रह जाती है...

बंदरगाह अपने रुके हुए जहाज़ लिए,
अत्यधिक रूप से रुके हुए जहाज़,
और छोटी नावें पास में, प्रतीक्षा करती हुई...

  -- फेर्नान्दो पेस्सोआ  (आल्वरो द कम्पोस )





 
फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने  आल्वरो द कम्पोस (  Álvaro de Campos ) के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नाम या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो ये है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, स्वभाव, दर्शन, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्ररी में उन पन्नों की एडिटिंग का काम आज तक जारी है. यह कविता उनके संकलन 'अनकलेक्टिड पोइम्ज़ ' से है.
इस कविता का मूल पुर्तगाली से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़           

सोमवार, नवंबर 12, 2012

रोशनी

कोर्फू: लाइट्स एंड शैडोज़, जॉन सिंगर सार्जेंट
Corfu: Lights and Shadows, John Singer Sargent

रोशनी, जो आगे-आगे चलती
हो हमेशा, तुम्हारा हाथ थामूंगा मैं
एक दिन, अचानक कितना सहज
हो जाएगा सब, चीज़ें और लोग,
शब्द जो कठोर हो जाते थे जिह्वा पर,
सब पारदर्शी हो जाएगा हमारे लिए,
रोशनी जो रूकती नहीं किसी जगह,
देखो रुक रही हो तुम,
और रुक रही है मेरी पीड़ा भी
और प्रतीक्षा कर रही हो तुम मेरी.



-- क्लौद एस्तेबान



 क्लौद एस्तेबान (Claude Esteban) एक फ्रेंच कवि , निबंधकार व अनुवादक थे। वे फ्रेंच व स्पेनिश दोनों भाषाओं में सिद्धहस्त थे। पिछली सदी के दूसरे हिस्से के प्रमुख कवियों में से एक, वे अपने पीछे महत्वपूर्ण कृति छोड़ गए हैं। उन्होंने कला व कविता पर असंख्य निबंध लिखे व स्पैनिश भाषा के प्रमुख कवियों ओक्टावियो पास, बोर्खेस, लोर्का इत्यादि की कविताओं व लेखन का अनुवाद किया। आरम्भ में वे फ्रेंच कला व साहित्य की पत्रिकाओं में लेख लिखते रहे। 1968 में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ --'ला सेजों देवास्ते '.इसके बाद उनके कई संकलन प्रकशित हुए, वे प्रसिद्द कलाकारों के लिए उनकी प्रदर्शनियों के कैटालोग के लिए प्रस्तावनाएँ लिखते रहे। स्पेनी कवि होर्खे गुइयें से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई व उन्होंने उनके कृत्य का  फ्रेंच में खूब अनुवाद किया। 1984 में उन्हें अपनी गद्य कविताओं के लिए मालार्मे पुरूस्कार प्राप्त हुआ। कला में उन्हें गहरी रूचि रही और 1991 में उन्हें एडवर्ड हापपर के चित्रों से प्रेरित कविता संकलन 'सोलई दौन्ज़ युन पीएस वीद ' के लिए फ्रांस कल्चर प्राइज़ प्राप्त हुआ। उनके 13 कविता संकलन, कई निबंध व अनेक अनुवाद प्रकाशित हुए,. यह कविता उनके संकलन 'ल यूर आ पेन एकरी'' से है।
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, नवंबर 10, 2012

हर दिन

कपल एंड बास्केट विद फ्रूट, मार्क शगाल
Couple and Basket with Fruit, Marc Chagall

हर दिन हम बढ़ाते हैं हाथ अपनी देहों की ओर --
               हम पलटते हैं अपने दिन
               उनकी किताबों में

               एक फल
               मगर उसका चुनना एक देश
 है 
               जिसकी सीमाएँ नहीं हैं 




-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके 2003 के संकलन 'बिगिनिन्ग्ज़ ऑफ़ द बॉडी, एंडज़ ऑफ़ द सी' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

गुरुवार, नवंबर 08, 2012

क्यों है ऐसा मौन?

दी एज ऑफ़ अ हीथ बाय मूनलाइट, जॉन कांस्टेबल
The Edge of a Heath by Moonlight, John Constable
शायद ही सांस ले रहे हैं पत्ते
इस श्यामल पवन में;
वृत्त बना रहे हैं सांझ में
पंख फड़फड़ाते अबाबील.

मेरे प्रेम-भरे
मुरझाते मन में
छा रही है सांझ ,
एक आखिरी रश्मि,
प्यार से झिड़कती है.

और सांध्य अरण्य के ऊपर
कांसे का चाँद
चढ़ कर ग्रहण करता है अपना स्थान.
संगीत क्यों थम गया है?
क्यों है ऐसा मौन?



-- ओसिप मैंडलस्टैम



Osip Mandelstam ओसिप मैंडलस्टैम ( Osip Mandelstam )रूसी कवि व निबंधकार थे और विश्व साहित्य में भी उनकी गीतात्मक कविताओं का विशिष्ट स्थान है. वे यहूदी थे और उनका परिवार पोलिश मूल का था, मगर वे सेंट पीटर्सबर्ग में बड़े हुए. स्कूल के समय से ही वे कविता लिखने लगे थे. उन्होंने अपने समकालीन रूसी कवियों के साथ मिल कर 'एक्मेइज़म'  ( Acmeism ) की स्थापना की. 22 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ -- द स्टोन. जब उनकी कविताओं में रूसी क्रांति के दिग्भ्रमित होने का दुःख छलकने लगा, तो स्तालिन ने उन्हें निर्वासित कर दिया. उनके अनेक कविता व निबंध संग्रह प्रकाशित हुए व उनकी कविताओं का खूब अनुवाद भी किया गया है. यह कविता उनके संकलन 'स्टोन' से है.
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद क्लेरन्स ब्राउन व डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, नवंबर 06, 2012

लम्बी व्यस्तता के बाद

हॉर्स ऑन द शोर ऑफ़ अ लेक,
जोर्जियो द किरीको
Horse on the Shore of a Lake,
Giorgio de Chirico
डेस्क पर हफ़्तों बिताने के बाद
आखिर निकलता हूँ मैं सैर के लिए
चाँद पैरों तले कहीं हल चलाने गया है
तारे नहीं हैं, रोशनी का सुराग तक नहीं !
अगर इस खुले खेत में
कोई घोड़ा सरपट दौड़ता मेरी ओर आ रहा हो तो?
जो नहीं बिताया मैंने एकांत में

हर वो दिन निरर्थक था.


--  रोबर्ट ब्लाए



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है.


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़