गुरुवार, नवंबर 22, 2012

क्या चाहता हूँ मैं

न. 9, (डार्क ओवर लाइट अर्थ ), मार्क रोथको
No.9, ( Dark over Light Earth), Mark Rothko



देखो, मैं बहुत कुछ चाहता हूँ.
शायद सभी कुछ चाहता हूँ मैं :
हर अनंत अवरोह का अन्धकार,
हर आरोह का झिलमिलाता प्रकाश.





-- रायनर मरीया रिल्के 






 रायनर मरीया रिल्के ( Rainer Maria Rilke ) जर्मन भाषा के सब से महत्वपूर्ण कवियों में से एक माने जाते हैं. वे ऑस्ट्रिया के बोहीमिया से थे. उनका बचपन बेहद दुखद था, मगर यूनिवर्सिटी तक आते-आते उन्हें साफ़ हो गया था की वे साहित्य से ही जुड़ेंगे. तब तक उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित भी हो चुका था. यूनिवर्सिटी की पढाई बीच में ही छोड़, उन्होंने रूस की एक लम्बी यात्रा का कार्यक्रम बनाया. यह यात्रा उनके साहित्यिक जीवन में मील का पत्थर साबित हुई. रूस में उनकी मुलाक़ात तोल्स्तॉय से हुई व उनके प्रभाव से रिल्के का लेखन और गहन होता गुया. फिर उन्होंने पेरिस में रहने का फैसला किया जहाँ वे मूर्तिकार रोदें के बहुत प्रभावित रहे.यूरोप के देशों में उनकी यात्रायें जारी रहीं मगर पेरिस उनके जीवन का भौगोलिक केंद्र बन गया. पहले विश्व युद्ध के समय उन्हें पेरिस छोड़ना पड़ा, और वे स्विटज़रलैंड में जा कर बस गए, जहाँ कुछ वर्षों बाद ल्यूकीमिया से उनका देहांत हो गया. कविताओं की जो धरोहर वे छोड़ गए हैं, वह अद्भुत है. यह कविता उनके संकलन 'बुक ऑफ़ इमेजिज़ ' से है.
इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़ ने किया है. 
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, नवंबर 20, 2012

खुले में

फारेस्ट. ऑटम, इवान शिशकिन
Forest, Autumn, Ivan Shishkin
पतझड़ के अंत की भूलभुलैया।
जंगल के प्रवेश स्थल पर फेंकी हुई खाली बोतल.
जाओ भीतर. इस मौसम में वन हैं मौन उजाड़ कक्ष.
केवल कुछ ही तरह की आवाजें आती हैं: जैसे कोई बड़ी सावधानी से
चिमटी से पल्लव हटा रहा हो.

या पेड़ के मोटे तने के भीतर कोई कब्ज़ा हौले-से चरचरा रहा हो.
पाला छोड़ता है अपनी सांस कुकुरमुत्तों पर और वे कुम्हला गए हैं.
वे हैं उन चीज़ों या वस्त्रों की तरह जो खो जाने के बाद फिर मिलते हैं.
अब धुंधला रहा है उजाला. अब समय है बाहर निकल कर
अपने थल चिन्हों को फिर देखने का: खेत में पड़ा वह ज़ंग लगा औज़ार
और झील के उस छोर स्थित वह घर, एक गेरुआ चौकोर
जो शोरबे में घुलती डली-सा पक्का है.




-- तोमास त्रांसत्रोमर 



 तोमास त्रांसत्रोमर ( Tomas Tranströmer )स्वीडन के लेखक, कवि व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में, बल्कि दुनिया भर में सराही गयीं हैं. उन्हें 2011 का नोबेल पुरुस्कार प्राप्त हुआ है. उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक  कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओँ में अनूदित की गईं हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए है जिनमे इंटरनैशनल पोएट्री फोरम का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए कई वर्षों से नामित किये जा रहे थे. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पड़ा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता है, मगर दूसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं. यह कविता  उनके संकलन 'बेल्ज़ एंड ट्रैकस'से है.

इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद उनके कवि रोबेर्ट फुल्टन ने किया है.

रविवार, नवंबर 18, 2012

पियानो

मिसेज़ मेगज़ एट द पियानो ऑर्गन, विलियम मेरिट चेज़
Mrs. Meigs at the Piano Organ, William Merritt Chase



पियानो बजा रही हूँ: दुनिया की ओर पीठ है मेरी.
पियानो बजा रही हूँ: एक ऊंची दीवार के पीछे.
पियानो बजा रही हूँ: जैसे हो खदान में उतरना,
या अधिक पी कर रंगरली मनाना,
साथ किसी को भी न ले जाना.


-- वेरा पाव्लोवा 




 वेरा पाव्लोवा ( Vera Pavlova) रूस की सबसे प्रसिद्द समकालीन कवयित्री हैं. उनका जन्म मॉस्कोमें हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की व संगीत के इतिहास विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की. कुछ समय बाद ही उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई और उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ किया. उनके 14 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व रूस में उनकी किताबें खूब बिकती हैं. उन्होंने चार ओपेरा लिबेरेतोज़ के लिए संगीत लिखा है व कुछ बोल भी. उनकी कविताएँ 18भाषाओँ में अनूदित की गयी हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन 'लेटर्ज़ टू अ रूम नेक्स्ट डोर : 1001 कन्फेशंज़ ऑफ़ लव ' से है.

इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीवन सेमूर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, नवंबर 16, 2012

पतझड़ गीत

फारेस्ट एज, वैसिली केंडिंस्की
Forest Edge, Wassily Kandinsky

लगभग बीत ही गया है एक और वर्ष, छोड़ गया है 
चारों ओर अपने उत्साही उर्वर अवशेष: बेलें, पत्ते,

अँधेरे सीलन-भरे कोनों में पड़े झुर्रियों वाले 
बिना खाए हुए फल, बीते ग्रीष्म के 

विशेष द्वीप से अपदार्थित होता यह पल, यह 
वर्त्तमान जो और कहीं नहीं,

केवल पैरों के तले है, सड़ता हुआ 
उस अँधेरे भूमिगत महल में,

जहाँ हैं अलक्ष्य रहस्य -- जड़ें और मुहर बंद बीज 
और पानी की घुमक्कड़ी. यह याद रखने का 

प्रयत्न करती हूँ मैं जब समय का परिमाण 
रगड़ कर छीलता है, दुखता है, उदहारण के लिए 

जब पतझड़ जाते-जाते अंत में भड़कता है, 
प्रचंड और हमारी ही तरह 

हमेशा रहने की इच्छा लिए --
कैसे जीता है सबकुछ, हमेशा 

इन क्षणिक चारागाहों में, एक उज्जवल 
दृश्य से  दूसरे की ओर पलटता हुआ.



-- मेरी ओलिवर



Mary Oliver मेरी ओलिवर ( Mary Oliver )एक अमरीकी कव्यित्री हैं, जो 60 के दशक से कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. उनके 25 से अधिक कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और बहुत सराहे गए हैं. उन्हें अमरीका के श्रेष्ठ सम्मान 'नेशनल बुक अवार्ड' व 'पुलित्ज़र प्राइज़' भी प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताएँ प्रकृति की गुप-चुप गतिविधियों के बारे में हैं, जैसे वो धरती और आकाश के बीच खड़ीं सब देख रहीं हैं. और  उनकी कविताओं में उनका अकेलेपन  से प्यार, एक निरंतर आंतरिक एकालाप व स्त्री का प्रकृति से गहरा सम्बन्ध भी दिखाई देता है..
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, नवंबर 14, 2012

नए शहर के कैफे में पहली चंद घड़ियाँ

कैफ़े तेरास, प्लास दयु फोरम
विन्सेंट वान गोग
Cafe Terrasse, Place du Forum
Vincent Van Gogh
आह,
वो पहली चंद घड़ियाँ नए शहरों के कैफे में!
एक शांत दीप्त मौन से पूर्ण,
स्टेशन या बंदरगाह पर सुबह-सुबह की आमद!जहाँ अभी-अभी पहुंचे हों
उस शहर के सबसे पहले दिखे पैदल लोग,
और जब हम यात्रा करते हैं, 
वह समय के बीतने की अनोखी आवाज़..

बसें या ट्रामें या गाड़ियाँ...
अनूठे देशों में सड़कों की अनूठी छटा...
शान्ति, जो वे देती प्रतीत होती हैं हमारे दुःख को,
ख़ुशी-भरी हलचल, जो हमारी उदासी के लिए है उनके पास,
हमारे मुरझाये-हुए मन के लिए नीरसता की अनुपस्थिति!
बड़े, विश्वसनीय ढंग से समकोणीय चौक,
इमारतों की कतारों वाली सड़कें जो दूर जाकर मिल जाती हैं,
एक-दूसरे को काटती सड़कें जहाँ अपनी रूचि का कुछ-न-कुछ 
मिल जाता है अकस्मात ही,
और इस सब में, जैसे कुछ उमड़ता है बिना कभी बह निकलने के,
गति, गति,
द्रुत रंग की मानुषिक चीज़ जो आगे बढ़ जाती है और रह जाती है...

बंदरगाह अपने रुके हुए जहाज़ लिए,
अत्यधिक रूप से रुके हुए जहाज़,
और छोटी नावें पास में, प्रतीक्षा करती हुई...

  -- फेर्नान्दो पेस्सोआ  (आल्वरो द कम्पोस )





 
फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने  आल्वरो द कम्पोस (  Álvaro de Campos ) के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नाम या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो ये है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, स्वभाव, दर्शन, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्ररी में उन पन्नों की एडिटिंग का काम आज तक जारी है. यह कविता उनके संकलन 'अनकलेक्टिड पोइम्ज़ ' से है.
इस कविता का मूल पुर्तगाली से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़