मंगलवार, अप्रैल 16, 2013

भीतर का आदमी

द शैडो, पाब्लो पिकासो
The Shadow, Pablo Picasso

वह देह नहीं है 
जो अजनबी है.
वह कोई और है.

हम दिखाते हैं
दुनिया को
वही बदसूरत चेहरा.
जब मैं खुजलाता हूँ
वह भी खुजलाता है.

कई औरतें हैं
जो दावा करती है
कि उन्होंने उसे थामा है.
एक कुत्ता
आता है मेरे पीछे-पीछे.
शायद वह उसका है. 

अगर मैं शांत होता हूँ,
वह होता है और भी शांत.
और मैं उसे भूल जाता हूँ.
फिर भी, जब मैं झुकता हूँ
बांधने के लिए अपने जूते का फीता,
वह खड़ा होता है. 

हम फेंकते हैं एक ही परछाई.
यह परछाई किसकी है?

मैं कहना चाहता हूँ:
"आरम्भ में भी वही था
और वही होगा अंत में भी,"
मगर पूरे यकीन से नहीं कह सकता.

जब मैं बैठता हूँ
रात को
बीच के मौन के पत्ते फेंटते हुए,
मैं कहता हूँ उससे:

"हालाँकि मेरा हर शब्द
तुम ही कहते हो,
तुम अजनबी हो.
अब वक्त है कि  तुम कुछ कहो"


-- चार्लज़ सिमिक 



 चार्लज़ सिमिक (Charles Simic ) एक सर्बियाई-अमरीकी कवि, निबंधकार, अनुवादक व दार्शनिक हैं। उनका जन्म युगोस्लाविया में हुआ और वे युद्ध-त्रस्त यूरोप में बड़े हुए। 1954 में,16 वर्ष की आयु में वे अपने परिवार के साथ अमरीका आ गए। 70 के दशक तक वे कवि के रूप में स्थापित हो गए। उनकी कविताएँ सूक्ष्म व बिम्बों से भरपूर होती हैं। वे पेरिस रिव्यू के सम्पादक रह चुके हैं व अमरीका के 15 वें पोएट लौरियेट भी। आजकल वे अमरीकी साहित्य व क्रिएटिव राइटिंग के प्रोफ़ेसर एमेरिटस हैं, व यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू हेम्पशियर में पढ़ाते हैं। उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताओं के 30 से अधिक संकलन, अनुवादों के 15 संकलन व गद्य के 8 संकलन प्रकाशित हो चुके है।
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, अप्रैल 14, 2013

जब हमें चाहिए होते हैं शब्द

डौन, मार्क शगाल
Dawn, Marc Chagall

इस आरंभिक पल से पहले,
एक पल और था, बारिश से सिक्त,
अपने पूर्ण आकार की गंध लिये.

हर दिन वह मुर्गा
जिसे हमने कभी नहीं देखा
करता है पहला अभिवादन
और अँधेरा, जिसने रात भर
रखा था अपनी ढीली जेब में,
अब हमें नीचे धर देता है.

और हम चलते हैं,
कमरों को जगाते हुए
बत्तियां जलाते हुए.
हम जाते हैं उस सांस में जो 
शब्दहीन है मगर है शब्दों की
सभी संभावनाओं से पूर्ण भी,
पूर्ण है उन संदेशों से जो अभी
न एकत्रित किये गए हैं 
न भेजे गए हैं.

सुबह मंडराती है
सबसे अच्छे मित्र से भी
अच्छी मित्र हो कर.

हम कह सकते हैं, अभी भी. 


-- नाओमी शिहाब नाए 



 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. 


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, अप्रैल 10, 2013

कविता आरम्भ करना

द डेन, रॉय लिचटेनष्टाइन
The Den, Roy Lichtenstein

तुम अकेले हो. फिर दस्तक होती है 
द्वार पर. वह एक शब्द है. तुम
अन्दर लाते हो उसे. कुछ समय तक
सब ठीक चलता है. मगर इस शब्द के 

रिश्तेदार भी हैं. जल्दी ही
वे आ धमकते हैं. उनमें से
कोई काम नहीं करता.
वे ज़मीन पर सोते हैं और चुरा लेते हैं
तुम्हारे टेनिस के जूते.

तुम्हीं ने शुरू किया था न ये सब. जो जैसा
था उसे वैसा छोड़ देने में तुम्हें ही चैन नहीं
पड़ता था. अब तुम्हारे कमरे का बुरा हाल है,
और रिमोट जाने कहाँ गायब हो गया है. 

शादीशुदा होना भी कुछ
ऐसा ही है. तुम्हें केवल अपनी
पत्नी ही नहीं मिलती, बल्कि
मिलता है उसके परिवार का पागलपन भी. 

अब देखो तो ज़रा कि क्या हुआ है?
तुम्हारी गाड़ी कहाँ है? तुम्हें
नहीं मिल पाएँगी चाबियाँ
अब एक हफ्ते तक.


-- रोबर्ट ब्लाए



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है. यह कविता उनके संकलन 'ईटिंग द हनी ऑफ़ वर्डज़ ' से है.


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, अप्रैल 06, 2013

इस अन्धकार को होने दो एक घंटागार

द बेल टावर, स्पीरोस पापालूकस
The Bell Tower,  Spyros Papaloukas

शांत मित्र जो इतनी दूर निकल आये हो
महसूस करो कैसे तुम्हारा श्वास लेना
तुम्हारे आस-पास और जगह बनाता है.
इस अन्धकार को होने दो घंटागार
और तुम घंटा हो जाओ. जब तुम बजते हो,

तुम पर जो प्रहार करता है वही तुम्हारी शक्ति बन जाता है.
आगे-पीछे चलो इस परिवर्तन में.
कैसी लगती है पीड़ा की यह तीव्रता?
अगर पेय कड़वा है, स्वयं को बदल मदिरा बन जाओ.

इस स्वयं-में-ना-समा-सकने-वाली रात में
बन जाओ अपनी इन्द्रियों के चौराहे पर घटता रहस्य,
वहाँ पाया जाने वाला अर्थ बन जाओ.

और अगर दुनिया ने छोड़ दिया है तुम्हें सुनना,
कहो मौन धरती से : मैं बहता हूँ.
बहते पानी को बोलो : मैं हूँ.


-- रायनर मरीया रिल्के




 रायनर मरीया रिल्के ( Rainer Maria Rilke ) जर्मन भाषा के सब से महत्वपूर्ण कवियों में से एक माने जाते हैं. वे ऑस्ट्रिया के बोहीमिया से थे. उनका बचपन बेहद दुखद था, मगर यूनिवर्सिटी तक आते-आते उन्हें साफ़ हो गया था की वे साहित्य से ही जुड़ेंगे. तब तक उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित भी हो चुका था. यूनिवर्सिटी की पढाई बीच में ही छोड़, उन्होंने रूस की एक लम्बी यात्रा का कार्यक्रम बनाया. यह यात्रा उनके साहित्यिक जीवन में मील का पत्थर साबित हुई. रूस में उनकी मुलाक़ात तोल्स्तॉय से हुई व उनके प्रभाव से रिल्के का लेखन और गहन होता गुया. फिर उन्होंने पेरिस में रहने का फैसला किया जहाँ वे मूर्तिकार रोदें के बहुत प्रभावित रहे.यूरोप के देशों में उनकी यात्रायें जारी रहीं मगर पेरिस उनके जीवन का भौगोलिक केंद्र बन गया. पहले विश्व युद्ध के समय उन्हें पेरिस छोड़ना पड़ा, और वे स्विटज़रलैंड में जा कर बस गए, जहाँ कुछ वर्षों बाद ल्यूकीमिया से उनका देहांत हो गया. कविताओं की जो धरोहर वे छोड़ गए हैं, वह अद्भुत है. यह कवितांश 'सोंनेट्स टू ओर्फ़ियस ' से है. 

इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़  ने किया है. 
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़