शनिवार, फ़रवरी 15, 2014

महानतम प्रेम

ओल्ड वुमन विद अ कैंडल, येरित दाऊ
Old Woman with a Candle, Gerrit Dou

वह साठ बरस की है. वह जी रही 
है अपने जीवन का महानतम प्रेम.

वह बाँह में बाँह डाले चलती है 
अपने प्रिय के संग,
उसके केश हवा में लहराते हैं.
उसका प्रियतम कहता है:
"मोती की लड़ियों-सी हैं तुम्हारे लटें."

उसके बच्चे कहते हैं:
"सठिया गई है बुढ़िया."


-- अन्ना श्विर 



 अन्ना श्विर ( Anna Swir) पोलिश कवयित्री थीं. उनका जन्म वॉरसॉ में हुआ. उनके पिता एक चित्रकार थे. 1930 के दशक में उनकी कविताएं प्रकाशित होने लगीं. द्वितीय विश्व युद्ध के समय, पोलैंड के नाज़ी अधिग्रहण के दौरान वे पोलिश रेज़िस्टेंस मूवमेंट से जुड़ गईं और वॉरसॉ विद्रोह के वक्त उन्होंने सैन्य नर्स का कार्य किया. इस बीच वे भूमिगत प्रकाशनों के लिए लेखन भी रहीं. चेस्वाफ मीवोश लिखते हैं कि वे उन दिनों उनके संपर्क में थे. उन्होंने अन्ना श्विर के एक काव्य संकलन का अनुवाद भी किया है. उनकी कविताओं में युद्ध के अनुभवों का गहरा असर दिखाई देता है. 1974 में उनका 'बिल्डिंग द बैरीकेड' नमक काव्य संकलन प्रकाशित हुआ जो उस समय में देखी-भोगी पीड़ा एवं यातना का दस्तावेज़ है. वे स्त्री के शरीर और उम्र के साथ उसमें  बदलावों के बारे में भी बहुत स्पष्ट कविताएँ लिखती थीं. यह कविता उनके 1996 में प्रकाशित हुए संग्रह 'टॉकिंग टू माय बॉडी' से है.

इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद चेस्वाफ मीवोश एवं लेऑनर्ड नेथन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, फ़रवरी 13, 2014

फ्लर्टेशन

कप एंड ओरंजिज़, पियेर-ओगयूस्त रनोआ
Cup and Oranges, Pierre-Auguste Renoir
आखिर, ज़रुरत नहीं है 
शुरू में 

कुछ भी कहने की. एक
संतरे की फांकें ट्यूलिप के फूल-सी 

खिली हुई हैं चीनी मिटटी की तश्तरी में.
कुछ भी हो सकता है.

बाहर सूरज बाँध चुका है 
बोरिया-बिस्तर 

और रात पूरे आकाश पर  
नमक बिखेर चुकी है. मेरा मन 

गुनगुना रहा है वह धुन 
जो मैंने बरसों से नहीं सुनी!

निःशब्दता की ठंडी देह --
आओ गंध लें इसकी, खा लें इसे.

कई तरीके हैं 
बना लेने के इस पल को 

एक सुन्दर बाग़ 
ताकि आनंद हो केवल 

यहाँ घूम आने में.


-- रीटा डव 



Rita dove in 2004.jpg रीटा डव अमरीकी कवयित्री व लेखिका हैं जो एम ऍफ़ ए करने के बाद एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव राइटिंग पढ़ाती रहीं.1993 से 1995 तक वे लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस में पोएट लॉरिएट कंसलटेंट इन पोएट्री के पद पर रहीं. इस पद को ग्रहण करने वाली वे पहली अश्वेत अमरीकी नागरिक थीं. 1987 में उन्हें कविता के लिए पुलिट्ज़र प्राइज प्रदान किया गया. इस सम्मान को प्राप्त करने वाली वे दूसरी अश्वेत अमरीकी लेखिका एवं कवयित्री थीं. 2004 से 2006 तक वे वर्जिनिया प्रांत कि पोएट लॉरिएट भी रहीं. उनके कई काव्य संकलन, एक निबंध संकलन,एक नाटक, एक उपन्यास व लघु कथाएं भी प्रकाशित हुई हैं. उन्होंने अमरीकी कवियों की कविताओं के दो संकलनों का सम्पादन भी किया है. 

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 


सोमवार, फ़रवरी 10, 2014

वसंत

विज़न, मिकालोयुस चिरलोनियस
Vision, Mikalojus Ciurlionis
और देखो साँप फिर प्रकट हुआ है,
अंधियारे के अपने नीड़ से, 
काली चट्टानों तले स्थित अपनी गुफा से, 
अपनी शीत-मृत्यु से
स्वयं को बाहर खींच लाया है.
वह चीड़ के नुकीले पत्तों पर फिसलता है.
घास के उगते गुच्छों के आस-पास घुमाव
बनाता, वह सूरज की तलाश में है.

लम्बी सर्दियों के बाद धूप कौन नहीं चाहेगा भला?
मै रास्ते से हट जाती हूँ,
वह अपनी लम्बी जिह्वा से हवा को परखता है,
अपनी हड्डियों के चारों ओर वह तेल-सा तरल है,

और पहाड़ी की ढलान उतर
वह बढ़ता है काले शीशे-सी सतह वाले तालाब की ओर.
कल रात ठण्ड कम नहीं थी.
मेरी नींद टूटी तो मैं उठ कर बाहर आँगन में आई थी,
और चाँद भी नहीं था.

बस, वैसे ही खड़ी रही थी मैं, मानो शून्य के जबड़ों में भिंची हुई.
कहीं दूर एक उल्लू बोला था,
और मैंने सोचा था जीसस के बारे में, कि कैसे वह 
दुबका रहा होगा अँधेरे में दो रात,
और पुनः क्षितिज के ऊपर तैर आया होगा. 

कितनी कथाएँ हैं 
जो हैं उत्तरों से कहीं सुन्दर.
मैं साँप के पीछे-पीछे तालाब की ओर चल पड़ती हूँ,
ठोस, कस्तूरी-सी गंध लिए 
वह उम्मीद-सा गोलाकार है.


-- मेरी ओलिवर




Mary Oliver मेरी ओलिवर ( Mary Oliver )एक अमरीकी कव्यित्री हैं, जो 60 के दशक से कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. उनके 25 से अधिक कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और बहुत सराहे गए हैं. उन्हें अमरीका के श्रेष्ठ सम्मान 'नेशनल बुक अवार्ड' व 'पुलित्ज़र प्राइज़' भी प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताएँ प्रकृति की गुप-चुप गतिविधियों के बारे में हैं, जैसे वो धरती और आकाश के बीच खड़ीं सब देख रहीं हैं. और  उनकी कविताओं में उनका अकेलेपन  से प्यार, एक निरंतर आंतरिक एकालाप व स्त्री का प्रकृति से गहरा सम्बन्ध भी दिखाई देता है. 

इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, फ़रवरी 07, 2014

हास्यास्पद

द लव लेटर, यूजीन द ब्लास
The Love Letter, Eugene de Blaas
सभी प्रेम-पत्र होते हैं 
हास्यास्पद. 
वे प्रेम-पत्र न होते अगर न होते
हास्यास्पद.

अपने समय में लिखे हैं मैंने भी 
प्रेम-पत्र जो थे निस्संदेह उतने ही 
हास्यास्पद.

अगर प्रेम है, तो प्रेम-पत्र 
होंगे ही 
हास्यास्पद. 

मगर असल में 
नहीं लिखे कभी जिन्होंने 
प्रेम-पत्र 
केवल वे ही हैं 
हास्यास्पद.

काश मैं लौट पाता उस समय में 
जब लिखे थे मैंने प्रेम-पत्र 
बिन सोचे कि वे हैं कितने 
हास्यास्पद.

सच तो यह है कि आज 
उन प्रेम-पत्रों 
की मेरी स्मृतियाँ 
ही हैं जो हैं 
हास्यास्पद.

(तीन से अधिक अक्षरों के सभी शब्द,
साथ ही ये असंख्य भावनाएँ 
स्वाभाविक है, कि हैं 
हास्यास्पद.


  -- फेर्नान्दो पेस्सोआ  (आल्वरो द कम्पोस )





 
फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने  आल्वरो द कम्पोस (  Álvaro de Campos ) के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नाम या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो ये है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, स्वभाव, दर्शन, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्ररी में उन पन्नों की एडिटिंग का काम आज तक जारी है. यह कविता उनके संकलन 'अनकलेक्टिड पोइम्ज़ ' से है.
इस कविता का मूल पुर्तगाली से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़           

बुधवार, फ़रवरी 05, 2014

मेरे पास अभी भी वह सब है जो तुमने मुझे दिया था

वुमन विद अ रोज, पियेर ओगयूस्त रनोआ
Woman with a Rose, Pierre-Auguste Renoir

उसके किनारों पर धूल जमी है.

थोड़ा सड़ गया है.

बिन सोचे मैं उसका ख्याल रखती हूँ.

साल में एक बार उस पर देती हूँ ध्यान
जब धूप में सुखाती हूँ.

अब मैं तरसती नहीं.

उसके बदले कुछ ले नहीं पाऊँगी.


-- नाओमी शिहाब नाए 




 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन ''फ़ुएल " से है. 

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

सोमवार, फ़रवरी 03, 2014

शब्द, फैली रात

फॉर वावा,मार्क शगाल
For Vava, Marc Chagall


इस फैली रात और हमारे बीच के फासले के 
दूसरे छोर पर कहीं, मैं सोच रही हूँ तुम्हारे बारे में.
कमरा धीमे-धीमे चाँद से मुँह मोड़ रहा है.

यह सुखद है. या इसे काट दूँ और कहूँ कि 
यह दुखद है? न जाने किस काल में गाती हूँ मैं 
चाह का असम्भव गीत...ला..लला..ला.. देखा?

इसे तुम सुन नहीं सकते. आँखें मूँद, 
उन अँधेरी पहाड़ियों की कल्पना करती हूँ मैं 
तुम तक पहुँचने के लिए जिन्हें पार करना 
होगा मुझे. क्योंकि प्रेम करती हूँ मैं तुमसे और 
वह ऐसा लगता है, या यूँ कहूँ कि शब्दों में ऐसा लगता है. 


-कैरल एन डफ्फी



 कैरल एन डफ्फी ( Carol Ann Duffy )स्कॉट्लैंड की कवयित्री व नाटककार हैं. वे मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन युनिवेर्सिटी में समकालीन कविता की प्रोफ़ेसर हैं. 2009 में वे ब्रिटेन की पोएट लॉरीअट नियुक्त की गईं. वे पहली महिला व पहली स्कॉटिश पोएट लॉरीअट हैं. उनके स्वयं के कई कविता संकलन छ्प चुके हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों को सम्पादित भी किया है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान व अवार्ड मिल चुके हैं. सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं व स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी हैं. यह कविता उनके 1990 में प्रकाशित संकलन 'दी अदर कंट्री ' से है, जिसे टी एस एलीअट प्राइज़ मिला था.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

शनिवार, फ़रवरी 01, 2014

बारबरा

ल पों द कूर्बवोआ, यॉर्ज सरा
Le pont de Courbevoie, Georges Seurat
याद करो बारबरा
बिना रुके बारिश हो रही थी
उस दिन ब्रेस्त में
और तुम चल रही थीं 
मुस्कुराती हुई
खिली हुई, ख़ुशी
और बारिश में सराबोर
याद करो बारबरा
बिना रुके बारिश हो रही थी
ब्रेस्त में
और सियाम सड़क पर
मैं तुम्हारे पास से गुज़रा था
तुम मुस्कुरा रही थीं 
और मैं ? मैं भी तो मुस्कुरा रहा था
याद करो बारबरा
तुम जिसे मैं नहीं जानता था
तुम जो मुझे नहीं जानती थीं 
याद करो
याद करो फिर भी उस दिन को
भूलो नहीं  
एक आदमी बारिश से बच कर 
एक बरामदे में खड़ा था
और उसने तुम्हारा नाम पुकारा था
बारबरा
और बारिश में
दौड़ पड़ी थीं तुम उसकी ओर
खिली हुई, ख़ुशी
और बारिश में सराबोर
और लिपट गयी थीं तुम उस से
याद करो बारबरा
देखो मुझसे नाराज़ मत होना
अगर तुम्हें 'तुम' कहूं तो 
मैं उन सब को 'तुम' कहता हूँ
जिन्हें प्यार करता हूँ
भले एक ही बार मिला हूँ 
मैं उन सब को 'तुम' कहता हूँ
जो प्यार करते हैं
भले मैं उन्हें पहले से नहीं जानता 
याद करो बारबरा
भूलो नहीं 
तुम्हारे खिले हुए चेहरे पर
उस शांत शहर पर
गिरती वो खुशनुमा बारिश
बरसती
सागर पर
हथियारों के भंडार पर
जहाज़ों पर
ओह बारबरा
क्या नासमझी है यह युद्ध भी
क्या हाल हो गया है तुम्हारा अब
इस लोहे की, आग की, खून की बारिश में
और वह जिसने तुम्हे प्यार से
बाहों में कसा था
वह क्या नहीं रहा
लापता है या है जिंदा अभी भी
ओह बारबरा
आज भी ब्रेस्त में बिना रुके बारिश हो रही है
जैसे पहले हुआ करती थी
मगर अब कुछ भी वैसा नहीं रहा
सब उजड़ गया है 
अब तो लोहे का खून का
तूफ़ान भी थम चुका 
बस बरस रही है
शोक की उदास उजड़ी बारिश
बस छाए हैं घने बादल 
जो कुत्तों की मौत मर रहे हैं
ब्रेस्त पर पानी बनकर बरस रहे हैं
और सड़ रहे हैं जा कर कहीं दूर
दूर ब्रेस्त से बहुत दूर
ब्रेस्त जहाँ कुछ नहीं बचा है 


-- याक प्रेवेर 



 
याक प्रेवेर  (Jacques Prévert)फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है. 
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़