सोमवार, जुलाई 23, 2012

दूरी रखना

फ्रोग, एंडी वारहोल
Frog, Andy Warhol
दुनिया के लोगों, जो तुम सब से अच्छा कर सकते हो 
अगर वह यही है,
तो मैं सब छोड़, बनना चाहती हूँ एक पंछी, एक तितली,
गर्मियों की छाया, फड़फड़ाता पत्ता,
पानी में इधर-उधर तैरता पंडुक.
आज एक मेंढक ने प्रतीक्षा की, बेला के पौधे के तले,
भोर से पहले की ठंडी गीली बूंदों की.
कितनी शान से वह उठा था
जब पानी ने छुआ था उसकी खाल को --
एक और सुबह के सामने उसका सहज-सा आनंद --
तुलना करो इसकी बमबारी,
गोलीबारी, तोड़-फोड़ और आतंकवाद से
जो लोग करते आ रहे हैं
जितने हम गिन भी ना पायें उस से अधिक देशों में
और पूछो स्वयं से -- मानव या मेंढक?



-- नाओमी शिहाब नाए 




 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन " यू एंड युअर्ज़ " से है.  

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, जुलाई 21, 2012

लगभग अनाम-सी तुम मुस्कुराती हो

ला जोआ, मार्क शगाल
La Joie, Marc Chagall




लगभग अनाम-सी तुम मुस्कुराती हो
और सूरज चढ़ा देता है अपना सोना 
तुम्हारे बालों पर.
ऐसा क्यों है कि, खुश रहने के लिए,
हम जान नहीं सकते कि हम खुश हैं?













-- फेर्नान्दो पेस्सोआ






 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने अपने ही नाम से लिखी थी, यह बताना ज़रूरी है क्योंकि अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ  के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने  मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'सोंगबुक 'से है.
इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, जुलाई 19, 2012

बिना पिया की रातें

वुमंज़ पोर्ट्रेट, कोंस्तान्तिन यूओन
Woman's Portrait, Konstantin Yuon
बिना पिया की रातें -- और रातें
उसके साथ जिसे तुम प्यार नहीं करतीं, और
तपते माथे के ऊपर बड़े-बड़े सितारे, और बाहें,
ऊपर उठती, 'उस' तक पहुँचने की कोशिश करतीं --
जो यहाँ ना जाने कब से नहीं था -- और होगा भी नहीं,
जो हो नहीं सकता -- और जिसे होना ज़रूर चाहिए...
और बच्चे की आँख से टपकता नायक के लिए आँसू,
और नायक की आँख से टपकता बच्चे के लिए आँसू,
और विशाल, पथरीले पहाड़
उस की छाती पर जिसे नीचे उतरना ही है...

मैं जानती हूँ वह सब जो था और वह सब जो होगा,
मैं जानती हूँ यह मूक अकर्ण रहस्य,
जिस लोगों की अशिक्षित और अस्फुट भाषा
जीवन कहती है.


-- मारीना स्व्ताएवा



 मारीना स्व्ताएवा ( Marina Tsvetaeva ) बहुत प्रसिद्द रूसी लेखिका व कवयित्री थीं और उनको 20 वीं सदी के बेहतरीन रूसी साहित्यकारों में गिना जाता है. 18 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन 'ईवनिंग एल्बम' प्रकाशित हुआ. वे रूसी क्रांति व उसके बाद मास्को में पड़े अकाल के समय वहीँ थी. क्योंकी वे क्रांति के खिलाफ थी उन्हें निर्वासित कर दिया गया. कई साल वे अपने परिवार के साथ गरीबी की हालत में पेरिस, बेर्लिन्र व प्राग में रहीं. मास्को लौटने के बाद भी उन्हें शक की नज़र से देखा जाता रहा व उनके परिवार को कसी न किसी कारण से सताया जाता रहा, उनकी बेटी कई वर्ष जेल में रहीं, व पति को मार डाला गया. बिना किसी आर्थिक सहारे के व नितांत अकेलेपन में, उन्होंने आत्महत्या कर ली. 
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद आंद्रे नेल्लर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, जुलाई 17, 2012

सांझ

ईवनिंग एट आर्जेनतई, क्लौद मोने
Evening at Argenteuil, Claude Monet
सांझ धीरे-से पहन लेती है वस्त्र
जो उस के लिए,
लिए खड़ी है प्राचीन पेड़ों की एक कतार.
तुम देखते हो,
और दुनिया तुम से छूटने लगती है.
एक हिस्सा होता है स्वर्ग की ओर आरोहित,
बाकी नीचे कहीं गिर जाता है.

और तुम रह जाते हो,
दोनों में से किसी के पूरी तरह ना हो कर,
मौन घर की तरह एकदम अँधेरे नहीं
न ही अनंतता के बारे में आश्वस्त
जैसी कि है वह जो चमक रहा है
रात्री आकाश में अब,
प्रकाश का एक बिंदु.

तुम रह जाते हो,
उन कारणों से जो तुम समझा नहीं पाओगे,
एक ऐसे जीवन के साथ जो है व्याकुल और विशाल,
ताकि, कभी सीमित, कभी विस्तृत ,
वह बन जाता है तुम में अभी पत्थर, अभी तारा.


-- रायनर मरीया रिल्के



 रायनर मरीया रिल्के ( Rainer Maria Rilke ) जर्मन भाषा के सब से महत्वपूर्ण कवियों में से एक माने जाते हैं. वे ऑस्ट्रिया के बोहीमिया से थे. उनका बचपन बेहद दुखद था, मगर यूनिवर्सिटी तक आते-आते उन्हें साफ़ हो गया था की वे साहित्य से ही जुड़ेंगे. तब तक उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित भी हो चुका था. यूनिवर्सिटी की पढाई बीच में ही छोड़, उन्होंने रूस की एक लम्बी यात्रा का कार्यक्रम बनाया. यह यात्रा उनके साहित्यिक जीवन में मील का पत्थर साबित हुई. रूस में उनकी मुलाक़ात तोल्स्तॉय से हुई व उनके प्रभाव से रिल्के का लेखन और गहन होता गुया. फिर उन्होंने पेरिस में रहने का फैसला किया जहाँ वे मूर्तिकार रोदें के बहुत प्रभावित रहे.यूरोप के देशों में उनकी यात्रायें जारी रहीं मगर पेरिस उनके जीवन का भौगोलिक केंद्र बन गया. पहले विश्व युद्ध के समय उन्हें पेरिस छोड़ना पड़ा, और वे स्विटज़रलैंड में जा कर बस गए, जहाँ कुछ वर्षों बाद ल्यूकीमिया से उनका देहांत हो गया. कविताओं की जो धरोहर वे छोड़ गए हैं, वह अद्भुत है. यह कविता उनके संकलन 'बुक ऑफ़ इमेजिज़ ' से है.
इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़ ने किया है. 
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़