सोमवार, अगस्त 20, 2012

बच्चा जो हँसता है सड़क पर

प्रोफाइल एंड रेड चाइल्ड, मार्क शगाल
Profile and Red Child, Marc Chagall

बच्चा जो हँसता है सड़क पर
गीत जो अचानक सुनाई दे जाता है,
बेहूदा चित्र, नग्न प्रतिमा,
असीम कृपा -- 

ये सब कहीं अधिक है 
उस तर्क से 
जो बुद्धि ने थोपा है चीज़ों पर,
और इस सब में है कुछ-कुछ प्यार,
चाहे यह प्यार बोल नहीं सकता.



-- फेर्नान्दो पस्सोआ 



 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने अपने ही नाम से लिखी थी, यह बताना ज़रूरी है क्योंकि अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ  के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने  मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'सोंगबुक 'से है.
इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शनिवार, अगस्त 18, 2012

चेहरा

द ब्लू फेस, मार्क शगाल
The Blue Face, Marc Chagall
एक और चेहरा / थकान. जब मैं थकान कहता हूँ,
मेरा अर्थ रोज़मर्रा के जीवन से है.
थकान एक औरत है और है एक आदमी.
थकान एक कुर्सी है या है एक कैफे.
थकान छाया और अँधेरा है. वह चाँद और सूरज भी है.

ये जो दिन हैं, ये थकान के दिन,
इनकी अपनी किताबें हैं, हर कदम एक शब्द.
और शब्दों का अंत नहीं होता.

एक और चेहरा / जुड़ने, टूट के अलग होने का मिश्रण,
जुड़ना एक वृत्तीय गति में जो कभी नहीं थमती.
और हर चेहरा अकेला होता है
तब भी जब वह किसी और को गले से लगाता है.

एक और चेहरा / अनंतर उपस्थिति
जो उठती है कविता तक, स्वप्न तक.
तुम इस यथार्थ को गले से लगाना चाहते हो,
उसमें बसना चाहते हो, क्योंकि बनाव वही है,
क्योंकि फैलाव वही है,
मगर हर कदम की अपनी लय व अपना क्षितिज है.
एक और चेहरा / अलगाव और मिलन,
उपस्थिति और अनुपस्थिति के बीच का विवाद.
तो फिर जब तुम हमीदिया सूक में चलते हो
तो ऐसा होता है जैसे कि तुम चीज़ों को देखते हो
और चीज़ों को नहीं देखते हो,
जैसे कि जो तुम देख रहे हो
उस में तुम वह खोज रहे हो जो तुम नहीं देख रहे.


-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके 2003 के संकलन 'प्रिंटर ऑफ़ द प्लेनेट्स  बुक्स'से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

गुरुवार, अगस्त 16, 2012

विलाप

रोड विद साईप्रेसिज़, विन्सेंट वान गोग
Road with Cypresses, Vincent van Gogh
कितना दूर है सब हम से,
और कब का बीत चुका.
मैं सोचता हूँ कि वह तारा जिसकी रोशनी
मुझ तक अब पहुँच रही है,
हज़ारों साल पहले मर चुका है.

मुझे लगता है
कि पास से निकली नाव में
मैंने सुनी है कोई व्याकुल करने वाली बात.

एक घर में, एक घड़ी
घंटा बजा रही है...
कौन-से घर में?
मैं निकल जाना चाहता हूँ अपने मन से
और खड़े होना चाहता हूँ आकाश के विस्तार तले.
मैं प्रार्थना करना चाहता हूँ.
इन सब में से एक तारा
तो अवश्य ही जीवित होगा.

मुझे लगता था कि मैं जानता हूँ
कौन-सा तारा चमकता रहा होगा --
कौन-सा, एक श्वेत शहर की तरह,
अपनी रोशनी के दूरस्थ छोर पर अभी भी उगता है.


-- रायनर मरीया रिल्के



 रायनर मरीया रिल्के ( Rainer Maria Rilke ) जर्मन भाषा के सब से महत्वपूर्ण कवियों में से एक माने जाते हैं. वे ऑस्ट्रिया के बोहीमिया से थे. उनका बचपन बेहद दुखद था, मगर यूनिवर्सिटी तक आते-आते उन्हें साफ़ हो गया था की वे साहित्य से ही जुड़ेंगे. तब तक उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित भी हो चुका था. यूनिवर्सिटी की पढाई बीच में ही छोड़, उन्होंने रूस की एक लम्बी यात्रा का कार्यक्रम बनाया. यह यात्रा उनके साहित्यिक जीवन में मील का पत्थर साबित हुई. रूस में उनकी मुलाक़ात तोल्स्तॉय से हुई व उनके प्रभाव से रिल्के का लेखन और गहन होता गुया. फिर उन्होंने पेरिस में रहने का फैसला किया जहाँ वे मूर्तिकार रोदें के बहुत प्रभावित रहे.यूरोप के देशों में उनकी यात्रायें जारी रहीं मगर पेरिस उनके जीवन का भौगोलिक केंद्र बन गया. पहले विश्व युद्ध के समय उन्हें पेरिस छोड़ना पड़ा, और वे स्विटज़रलैंड में जा कर बस गए, जहाँ कुछ वर्षों बाद ल्यूकीमिया से उनका देहांत हो गया. कविताओं की जो धरोहर वे छोड़ गए हैं, वह अद्भुत है. यह कविता उनके संकलन 'बुक ऑफ़ इमेजिज़ ' से है.
इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़ ने किया है. 
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़