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| वुमन ऐज़ वाज़, ओग्यूस्त रोदें Woman as Vase, Auguste Rodin |
मैं तुम्हारा घड़ा हूँ (जब मैं फूट जाऊँगा?)
मैं तुम्हारा पेय हूँ (जब मैं कडुवा हो जाऊँगा?)
मैं, तुम्हारा वस्त्र; मैं, तुम्हारा काज.
मेरे बिना तुम्हारे होने का कारण ही क्या है?
मेरा बिना कहाँ होगा वह घर
जहाँ आत्मीय शब्द करते हैं तुम्हारी प्रतीक्षा?
मैं, मखमली जूता जो गिरता हूँ तुम्हारे पैर से.
मैं, तुम्हारे काँधे से फिसलता दुशाला.
तुम क्या करोगे, ईश्वर? मैं चिंतित हूँ.
-- रायनर मरीया रिल्के
इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़




