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| स्टारी नाईट, विन्सेंट वान गोग Starry Night, Vincent Van Gogh |
चाहिए होता था केवल एक झाड़ू *
देखने के लिए कोई भी जगह
और करने के लिए
आकाश में बत्तखों का पीछा.
•
सितारे सब जानते हैं,
तो हम करते हैं कोशिश उनका मन पढने की.
इतने दूरस्थ हैं वो फिर भी,
उनकी उपस्थिति में फुसफुसा के बोलते हैं हम.
•
ओह सिंथिया,
उस घड़ी को जिसने खो दी हैं अपनी सुइयाँ
घुमाने ले जाओ.
होटल अनंतता में ले देना मुझे एक कमरा
जहाँ समय-समय पर रुकना पसंद है समय को.
•
अँधेरे कोनों के प्रेमियों, आओ,
कहता है आकाश,
और बैठे मेरे किसी अँधेरे कोने में.
आज मूंगफली के कटोरे में
नन्हे स्वादिष्ट शून्य हैं.
-- चार्लज़ सिमिक
चार्लज़ सिमिक (Charles Simic ) एक सर्बियाई-अमरीकी कवि, निबंधकार, अनुवादक व दार्शनिक हैं। उनका जन्म युगोस्लाविया में हुआ और वे युद्ध-त्रस्त यूरोप में बड़े हुए। 1954 में,16 वर्ष की आयु में वे अपने परिवार के साथ अमरीका आ गए। 70 के दशक तक वे कवि के रूप में स्थापित हो गए। उनकी कविताएँ सूक्ष्म व बिम्बों से भरपूर होती हैं। वे पेरिस रिव्यू के सम्पादक रह चुके हैं व अमरीका के 15 वें पोएट लौरियेट भी। आजकल वे अमरीकी साहित्य व क्रिएटिव राइटिंग के प्रोफ़ेसर एमेरिटस हैं, व यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू हेम्पशियर में पढ़ाते हैं। उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताओं के 30 से अधिक संकलन, अनुवादों के 15 संकलन व गद्य के 8 संकलन प्रकाशित हो चुके है।
चार्लज़ सिमिक (Charles Simic ) एक सर्बियाई-अमरीकी कवि, निबंधकार, अनुवादक व दार्शनिक हैं। उनका जन्म युगोस्लाविया में हुआ और वे युद्ध-त्रस्त यूरोप में बड़े हुए। 1954 में,16 वर्ष की आयु में वे अपने परिवार के साथ अमरीका आ गए। 70 के दशक तक वे कवि के रूप में स्थापित हो गए। उनकी कविताएँ सूक्ष्म व बिम्बों से भरपूर होती हैं। वे पेरिस रिव्यू के सम्पादक रह चुके हैं व अमरीका के 15 वें पोएट लौरियेट भी। आजकल वे अमरीकी साहित्य व क्रिएटिव राइटिंग के प्रोफ़ेसर एमेरिटस हैं, व यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू हेम्पशियर में पढ़ाते हैं। उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताओं के 30 से अधिक संकलन, अनुवादों के 15 संकलन व गद्य के 8 संकलन प्रकाशित हो चुके है।
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़
*झाड़ू पर बैठ जादूगरनी उड़ा करती थी, और कहीं भी जा सकती थी.
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नाज़िम हिकमत ( Nazim Hikmat) तुर्की के कवि , उपन्यासकार व नाटककार थे. उन्हें 28 वर्ष की क़ैद हो गयी थी , इस जुर्म पर कि उनकी कविताएँ पढ़ कर तुर्की सेना विद्रोह करने को प्रेरित होती है. अपना अधिकाँश जीवन उन्होंने जेल में या तुर्की से निर्वासित हो, दूसरे देशों में बिताया. चाहे तुर्की सरकार ने उन्हें खूब तंग किया, तुर्की के लोगों के मन में उनके लिए हमेशा बहुत इज्ज़त रही क्योंकि उनका लिखा लोगों के मन की बात कहता था. उनका देहांत मास्को में हुआ और वे वहीँ दफनाये गए. 1950 में उन्हें नोबेल पीस प्राइज़ प्राप्त हुआ. उनका एक उपन्यास, 4 नाटक व कई कविता संकलन प्रकाशित हुए. उनकी कविताओं का 50 से भी अधिक भाषाओँ में अनुवाद हुआ है. 
