शुक्रवार, मई 03, 2013

स्वप्न वृक्षों का

ट्रीज़ एंड हाउस, पॉल सेज़ान
Trees and House, Paul Cezanne

कुछ है मुझमें जो वृक्षों का स्वप्न देखा करता था,
एक शांत-सा घर, कुछ हरी-भरी सी भूमि,
हर परेशान करने वाले शहर से ज़रा दूर,
ज़रा दूर कारखानों, स्कूलों, विलापों से.
केवल बहती धाराओं और पंछियों का साथ होगा,
मेरे पास समय होगा, मैं सोचती थी,
और बचेगा भी 
कि मैं रच पाऊं अपने जीवन से कुछ अद्भुत छंद.
और फिर समझ आया,
कि मृत्यु भी ऐसी ही होती है,
हर जगह से बस ज़रा दूर.

कुछ है मुझमें
जो अभी भी देखता है वृक्षों के स्वप्न.
फिर जाने देता है. संयम को तरसते,
दुनिया के आधे कलाकार
खुद को समेट लेते हैं या सब से दूर हो जाते हैं.
अगर मिला है किसी को कोई तोड़,
तो वह सभी को बताये.
इस बीच मैं फिर मोड़ती हूँ अपना मन को उसी विलाप की ओर,
जहाँ, जैसे कि समय विनती करता है हमारी सच्ची सहभागिता की,
हर संकट की धार हमें राह दिखाती है.
मैंने बहुत चाहा कि ऐसा न होता, मगर ऐसा ही है.
किसी सौम्य-से दिन भला किसी ने संगीत रचा है?


-- मेरी ओलिवर





Mary Oliver मेरी ओलिवर ( Mary Oliver )एक अमरीकी कव्यित्री हैं, जो 60 के दशक से कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. उनके 25 से अधिक कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और बहुत सराहे गए हैं. उन्हें अमरीका के श्रेष्ठ सम्मान 'नेशनल बुक अवार्ड' व 'पुलित्ज़र प्राइज़' भी प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताएँ प्रकृति की गुप-चुप गतिविधियों के बारे में हैं, जैसे वो धरती और आकाश के बीच खड़ीं सब देख रहीं हैं. और  उनकी कविताओं में उनका अकेलेपन  से प्यार, एक निरंतर आंतरिक एकालाप व स्त्री का प्रकृति से गहरा सम्बन्ध भी दिखाई देता है. 

इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, मई 01, 2013

अलसाई सुबह


बहुत कठोर होती है 

उबले अंडे को स्टील के काउंटर पर हलके-से ठोक कर तोड़ने की आवाज़

यह आवाज़ बहुत कठोर होती है  
जब बजती है 
भूखे आदमी की यादों में
और वह चेहरा भी डरावना होता है
भूखे आदमी का चेहरा
जब सुबह के छह बजे
एक बड़ी दुकान के शीशे में
वह मैला-सा चेहरा
अपने आप को देखता है
मगर वह खुद को कहाँ देख रहा है
उस बड़ी दुकान के शीशे में
उसे अपने चेहरे से कोई लगाव नहीं
वह उसके बारे में सोच भी नहीं रहा  
वह सपना देख रहा है
कल्पना कर रहा है
कुछ और की
उसे शक्ल नज़र आ रही है
उस सब की
जो वह खट्टी चटनी के साथ खा सकता है
और वह धीरे से अपना जबड़ा हिलाता है
धीरे से
और दांत पीसता है धीरे से
क्योंकि जिस बकरे के सिर की वह कल्पना कर रहा है
उसे दाम देकर खरीदती है दुनिया
वह दुनिया के खिलाफ कुछ नहीं कर सकता
और वह अपनी उंगलियों पर गिनता है एक दो तीन
एक दो तीन
तीन दिनों से उसने कुछ नहीं खाया है
बार-बार तीन दिन गिनने का क्या फायदा
ऐसा कब तक चलेगा
तीन दिन
तीन रात
बिना खाए चला है
और दुकान के इन शीशों के उस तरफ
बोतलों में और डिब्बों में बंद
ये खाने-पीने का सामान
डिब्बों की सुरक्षा करता यह शीशा
शीशे की रखवाली करती यह पुलिस
पुलिस को बचाता उसका डर
ज़रा से सामान को बचाने के लिए कितनी दीवारें
थोडा आगे एक कैफे है
क्रीम वाली कॉफ़ी और गर्म-गर्म क्रोआस्सों
आदमी डगमगाता है
और उसके मन पर छाई है
शब्दों की
एक धुंध

लफ़्ज़ों का कोहरा
मछली
उबला अंडा क्रीम वाली कॉफ़ी
रम मिली कॉफ़ी
क्रीम वाली कॉफ़ी
क्रीम वाली कॉफ़ी
खून मिली अपराध वाली कॉफ़ी
दिनदहाड़े गला काटा गया
मोहल्ले के इज्ज़तदार आदमी का
और लफंगे ने हत्यारे ने दो फ्रेंक
चुराए उस से
यानि एक रम मिली कॉफ़ी
...बचे पैंसठ पाई
दो पीस मक्खन लगी ब्रेड
और पचीस पाई टिप के लिए  
बहुत कठोर होती है
उबले अंडे को स्टील के काउंटर पर 
हलके-से ठोक कर तोड़ने की आवाज़
यह आवाज़ बहुत कठोर होती है  
जब बजती है भूखे आदमी की यादों में



--
याक प्रेवेर 




 याक प्रेवेर  ( Jacques Prévert )फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है. 
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़


रविवार, अप्रैल 28, 2013

विस्मृति

अ ग्लास ऑफ़ वाइन, पिएर ओग्यूस्त रेनोआ
A Glass of Wine, Pierre Auguste Renoir

केवल मदिरा ही नहीं, मैं उड़ेलता हूँ अपने पात्र में
विस्मृति भी, और मैं सुखी रहूँगा क्योंकि सुख
अनभिज्ञ होता है. स्मृति या पूर्वकल्पना भला 
किसके होंठों पर मुस्कान लाई हैं?

चलो अपनी सोच से हम पा लें, जीवजंतुओं
का जीवन नहीं, उनकी आत्मा, आश्रय लें
उस दुर्बोध भाग्य में
जो न आशा करता है, न स्मरण.

इस नश्वर हाथ से उठा अपने नश्वर मुख तक
ले जाता हूँ मैं क्षणिक मदिरा का यह भंगुर पात्र,
अपनी धुंधली दृष्टि से 
देखना बंद करने के लिए तैयार.


-- फेर्नान्दो पेस्सोआ ( रिकार्दो रेइस)



 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने रिकार्दो रेइस ( Ricardo Reis )के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग  जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ  के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने  मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'ओड्ज़' से है.

इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, अप्रैल 25, 2013

स्मृतियों का अपना कोई स्थान नहीं होता...

ब्रेतों लैंडस्केप ट्रीज़ एंड मूर, पिएर ओग्यूस्त रेनोआ
Breton Landscape Trees and Moor. Pierre Auguste Renoir

स्मृतियों का अपना कोई स्थान नहीं होता, न
ही होती है उनके बचाव के लिए किलाबंदी
और जब हमने उन्हें रहने दिया होता है
लम्बे समय के लिए
कोई, हमारे भीतर कहीं, व्याकुल होने लगता है
और खदेड़ने लगता है उन्हें
मगर कोई और, वह जो मरना नहीं
चाहता, प्रयास करता है
फिर से कुछ खोजने का, चाहे वह कोई गंध
ही क्यों न हो, या झाड़ियों की सरसराहट
या उँगलियों में उलझा
ख़ुशी का आभास 


-- क्लौद एस्तेबान



 क्लौद एस्तेबान (Claude Esteban) एक फ्रेंच कवि , निबंधकार व अनुवादक थे। वे फ्रेंच व स्पेनिश दोनों भाषाओं में सिद्धहस्त थे। पिछली सदी के दूसरे हिस्से के प्रमुख कवियों में से एक, वे अपने पीछे महत्वपूर्ण कृति छोड़ गए हैं। उन्होंने कला व कविता पर असंख्य निबंध लिखे व स्पैनिश भाषा के प्रमुख कवियों ओक्टावियो पास, बोर्खेस, लोर्का इत्यादि की कविताओं व लेखन का अनुवाद किया। आरम्भ में वे फ्रेंच कला व साहित्य की पत्रिकाओं में लेख लिखते रहे। 1968 में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ --'ला सेजों देवास्ते '.इसके बाद उनके कई संकलन प्रकशित हुए, वे प्रसिद्द कलाकारों के लिए उनकी प्रदर्शनियों के कैटालोग के लिए प्रस्तावनाएँ लिखते रहे। स्पेनी कवि होर्खे गुइयें से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई व उन्होंने उनके कृत्य का  फ्रेंच में खूब अनुवाद किया। 1984 में उन्हें अपनी गद्य कविताओं के लिए मालार्मे पुरूस्कार प्राप्त हुआ। कला में उन्हें गहरी रूचि रही और 1991 में उन्हें एडवर्ड हापपर के चित्रों से प्रेरित कविता संकलन '
सोलई दौन्ज़ युन पीएस वीद ' के लिए फ्रांस कल्चर प्राइज़ प्राप्त हुआ। उनके 13 कविता संकलन, कई निबंध व अनेक अनुवाद प्रकाशित हुए,. यह कविता उनके संकलन 'ल मौर आ दिसतौंस' से है. 

इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, अप्रैल 23, 2013

पल

रॉन माउंटेन, टी सी स्टील
Roan Mountain, T C Steele

मैं हरी होती पहाड़ी की ढलान पर चढ़ती हूँ.
घास और घास में नन्हे-नन्हे फूल,
जैसे बच्चों के बनाये चित्र में होते हैं.
धुंध-भरा आकाश नीला होना शुरू हो गया है.
अन्य पहाड़ियों का दृश्य निःशब्दता में 
प्रकट होता है.

जैसे कि कभी कोई कैम्ब्रियन* या सिल्युरियन*युग 
था ही नहीं,
बड़ी चट्टानों से कर्कश स्वर में बोलते पत्थर,
औंधे पड़े वितल,
धधकती हुई रातें नहीं 
और अन्धकार के बादलों में दिन.

जैसे कि असाध्य ज्वरों में जलते,
बर्फीली सिहरन लिए  
मैदान यहाँ तक धक्का लगाते नहीं आये थे.

जैसे कि अपने क्षितिजों के किनारों को कतरते
समुद्र कहीं और ही खौले थे.

स्थानीय समय के अनुसार साढ़े नौ बजे हैं.
सब कुछ यथास्थान है और विनम्र एक्य में है. 
घाटी में छोटी नदी निभा रही है छोटी ही नदी की भूमिका.
एक पथ है एक पथ की भूमिका में हमेशा से सदा तक.
जंगल जंगल के ही भेस में है, अनंत जीवंत,
और उन सब के ऊपर उड़ते पंछी उड़ते ही पंछी हैं.

जहाँ तक दृष्टि जा सकती है वहां तक इस पल का साम्राज्य है.
ऐसा भौतिक पल जिसे ठहरे रहने का आमंत्रण है. 


-- वीस्वावा शिम्बोर्स्का



 वीस्वावा शिम्बोर्स्का ( Wislawa Szymborska ) पोलैंड की कवयित्री, निबंधकार व अनुवादक हैं. उनकी युवावस्था लगभग संघर्ष में ही बीती -- द्वितीय विश्व-युद्ध और उसके पोलैंड पर दुष्प्रभाव, कम पैसे होने की वजह से पढाई छोड़ देना, छुट-पुट नौकरियां, पोलैंड में साम्यवाद का लम्बा दौर. इस सब के बावजूद उनकी साहित्यिक व कलात्मक गतिविधियाँ जारी रही. उन्होंने अख़बारों व पत्रिकाओं में मूलतः साहित्य  के विषय पर खूब लिखा. उन्होंने बहुत प्रचुरता में नहीं लिखा. उनकी केवल २५० कविताएँ प्रकाशित हुईं. लेकिन उनका काम इतना सराहनीय था की पूरे विश्व में पहचानी जाने लगी. 1996 में उन्हें नोबेल पुरूस्कार से सम्मानित किया गया. उनकी कविताओं व निबंधों का अनेक भाषाओँ में अनुवाद किया गया है. 
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद स्तानिस्वाव बरंजाक व  क्लेर कावानाह ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, अप्रैल 21, 2013

केवल तुम, केवल मैं

रेलरोड ट्रैक्स, आइसाक लेवितान
Railroad Tracks, Isaac Levitan

 प्रिय, कितना लम्बा रास्ता तय करना होता है,
पहुँचने के लिए एक चुम्बन तक,
कैसे गतिमान है अकेलापन, तुम्हारे साथ की ओर!
बारिश के संग लुढ़कते,
हम अकेले ही पीछा करते हैं पटरियों का.
ताल्ताल* में न सवेरा होता है न वसंत आता है.

लेकिन तुम और मैं, प्रिय, हम साथ हैं
कपड़ों से लेकर जड़ों तक:
साथ हैं पतझड़ में, पानी में, कूल्हों में, जबतक
हम एक साथ अकेले न हो सकें -- केवल तुम, केवल मैं.

सोचो कितना यत्न किया होगा, बोरोआ* नदी ने
इतने पत्थरों को अपने तिकोने मुहाने तक पहुंचाने के लिए;
सोचो कि तुम और मैं, जो रेलगाड़ियों व राष्ट्रों
से बंटे हैं,

हमें केवल एक-दूसरे को प्रेम करना था:
साथ लिए सभी भ्रांतियों को,
आदमियों और औरतों को,
और धरती को भी जो उगाती है गुलनारों को,
और फिर उन्हें खिलाती है.


-- पाब्लो नेरुदा



  पाब्लो नेरुदा ( Pablo Neruda ) को कौन नहीं जानता. वे चिली के कवि थे.कोलंबिया के महान उपन्यासकार गेब्रिअल गार्सिया मार्केज़ ने उन्हें ' 20 वीं सदी का, दुनिया की सभी भाषाओँ में से सबसे बेहतरीन कवि ' कहा है. 10वर्ष की आयु में उन्होंने कविताएँ लिखनी शुरू की. 19वर्ष की आयु में उनका पहला संकलन 'क्रेपेस्क्युलारियो ' प्रकाशित हुआ और उसके बाद उनकी प्रसिद्द प्रेम कविताएँ ' ट्वेंटी पोएम्ज़ ऑफ़ लव एंड अ सोंग ऑफ़ डेसपैर '. दोनों संकलन खूब सराहे गए और दूसरी भाषाओँ में अनूदित लिए गए. उनकी प्रेम कविताओं की तो सहस्रों प्रतियाँ आज तक बिक चुकी है. उनके पूरे लेखन काल में उनकी 50से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई और अनेक भाषाओँ में असंख्य अनुवाद हुए. 1971में उन्हें नोबेल प्राइज़ भी प्राप्त हुआ. उनके 100 लव सोंनेट्स में से यह दूसरा सोंनेट है.


इस कविता का मूल स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीफन टैपस्काट ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़


*उत्तरी चिली में एक बंदरगाह
*अमेज़ोन नदी के उत्पत्ति क्षेत्र की एक नदी 

शुक्रवार, अप्रैल 19, 2013

जो पढ़ा है...

वाइट एंड ब्लैक, एल्ज़वर्थ केली
White and Black, Ellsworth Kelly
जो पढ़ा है उसके बारे में एक बार फिर सोचता हूँ:
कि अँधेरा और उजाला, अच्छा और बुरा,
सत्य और असत्य, दुनिया में ये सब मिला-जुला हैं.
निस्संदेह जो ऐसा सोचते हैं, उनके लिए
दुनिया बड़ी सक्रीय है: सब कुछ काला या सफ़ेद है,
दैवी है या शैतान का है.
मगर इस दो खेमों में विभाजित दुनिया में
आखिर क्या बचेगा
अगर सब कुछ पूर्ण रूप से विभाज्य हो जाएगा,
चूर-चूर हो कर बन जाएगा अणुओं का चक्रवात,
क्षेत्रों की तिलमिलाहट?
क्या हर अणु में होगा कुछ अँधेरा, कुछ उजाला,
क्या उनके सबसे छोटे हिस्सों में भी विपर्यय होगा,
स्वयं शून्य में भी, जो खंडित होते-होते
अस्तित्वहीनता के और पास और पास आता रहेगा?
जो अजब है, क्या वह भयंकर का स्थान ले लेगा?
क्या तब जीवित रहना और सरल होगा?


-- यान काप्लिन्स्की


यान काप्लिन्स्की ( Jaan Kaplinski )एस्टोनिया के कवि, भाषाविद व दार्शनिक हैं व यूरोप के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं. वे अपने स्वतंत्र विचारों व वैश्विक सरोकारों के लिए जाने जाते हैं. उनके कई कविता-संग्रह, कहानियां, लेख व निबंध प्रकाशित हो चुके हैं. उन्होंने कई भाषाओँ से कई भाषाओँ में अनुवाद किये है व उनके स्वयं के लेखन का भी कई भाषाओँ में अनुवाद हुआ है. यह कविता उनके संकलन 'ईवनिंग ब्रिनग्ज़ एवरीथिंग बैक ' से है.
इस कविता का मूल एस्टोनियन से अंग्रेजी में अनुवाद फियोना सैम्प्सन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़