सोमवार, मई 21, 2012

शाम की सैर


  पाइन ट्रीज़, काप द'ओंतीब, क्लौद मोने
Pine Trees, Cap d'Antibes, Claude Monet
तुम आभास देते हो सुनने का
मेरे विचारों को, ओ पेड़ों,
इस तरह झुक कर उस सड़क पर जहाँ
मैं चल रहा हूँ इस गर्मियों के आखिर की शाम
जब तुम में से हर एक है एक खड़ी ढाल की सीढ़ी
जिससे रात नीचे उतर रही है.

पत्ते है मेरी माँ के होंठों जैसे,

हमेशा कांपते हुए, निर्णय करने में असमर्थ,
क्योंकि आज ज़रा हवा चल रही है,
और यह है कुछ आवाजें सुनने जैसा
या है दबी हुई हंसी से भरे हुए मुंह जैसा
जिसमे हम सब समा सकें एक बड़ा अँधेरा मुंह
अचानक एक हथेली से ढका हुआ.

सब शांत है. किसी और शाम
की रोशनी आगे टहल रही है,
बहुत समय पहले की शाम लम्बी ड्रेसों वाली,
नुकीले जूतों वाली, चांदी के सिगरेट-केस वाली.
आनंदित मन, तुम गहराते सायों में
जल्दी-जल्दी उन का पीछा करते हुए
कितने बोझिल कदम उठाते हो.

ऊपर आकाश अभी भी नीला है
रात के पंछी उन बच्चों की तरह हैं
जो भोजन के लिए नहीं आयेंगे.
स्वयं को गीत सुनाते खोये हुए बच्चे. 



-- चार्लज़ सिमिक





चार्लज़ सिमिक (Charles Simic ) एक सर्बियाई-अमरीकी कवि, निबंधकार, अनुवादक व दार्शनिक हैं। उनका जन्म युगोस्लाविया में हुआ और वे युद्ध-त्रस्त यूरोप में बड़े हुए। 1954 में,16 वर्ष की आयु में वे अपने परिवार के साथ अमरीका आ गए। 70 के दशक तक वे कवि के रूप में स्थापित हो गए। उनकी कविताएँ सूक्ष्म व बिम्बों से भरपूर होती हैं। वे पेरिस रिव्यू के सम्पादक रह चुके हैं व अमरीका के 15 वें पोएट लौरियेट भी। आजकल वे अमरीकी साहित्य व क्रिएटिव राइटिंग के प्रोफ़ेसर एमेरिटस हैं, व यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू हेम्पशियर में पढ़ाते हैं। उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताओं के 30 से अधिक संकलन, अनुवादों के 15 संकलन व गद्य के 8 संकलन प्रकाशित हो चुके है।
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शनिवार, मई 19, 2012

आँखें

 सेल्फ-पोर्ट्रेट इन फेल्ट हैट, पॉल सेज़ान
Self-Portrait in Felt Hat, Paul Cezanne



जिस दिन उसकी प्रियतमा की मृत्यु हुई
उसने बूढ़े होने का फैसला कर लिया
और कर लिया स्वयं को बंद
अकेले, खाली घर के अन्दर
केवल उसकी यादों के साथ
और उस बड़े उजले आईने के साथ
जिस में देख कर वह अपने बाल बनाती थी.
इस सोने के बड़े से खंड को
वह एक लोभी की तरह सहेजता-बटोरता था,
सोचता था, कि कम-से-कम यहाँ तो
वह कैद कर लेगा बीते दिनों को,
सुरक्षित रख लेगा इस एक चीज़ को.

मगर पहली बरसी के आस-पास,

वह उसकी आँखों के बारे में सोचने लगा
और घबरा गया : वे भूरी थीं या काली,
या धूसर? हरी? हे भगवान! कह नहीं सकता....

वसंत की एक सुबह, उसके भीतर कुछ दरक गया;

अपने दोहरे दुःख को सलीब की तरह कंधे पर उठाये,
उसने बाहर का दरवाज़ा बंद किया, सड़क पर आया
और अभी दस गज भी न चला था कि एक अँधेरे प्रांगण से
उसे मिली एक जोड़ी आँखों की झलक. अपना हैट
नीचे खींच वह आगे बढ़ गया...हाँ, वे ऐसे ही थीं; ऐसी ही...



-- डान पेटरसन




डान पेटरसन ( Don Paterson ) स्कॉटलैंड के कवि,लेखक  व संगीतकार हैं. वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ सेंट एंड्रूज़ में अंग्रेजी पढ़ाते हैं, लन्दन के प्रकाशक 'पिकाडोर' के लिए पोएट्री एडिटर हैं और एक बेहतरीन जैज़ गिटारिस्ट हैं . अपने पहले कविता संकलन 'निल निल' से ही उन्हें पहचाना जाने लगा व अवार्ड मिलने लगे. अपने संकलन ' गाडज़ गिफ्ट टू विमेन ' के लिए उन्हें टी एस एलीअट प्राइज़ प्राप्त हुआ. उनके एक और संकलन 'लैंडिंग लाईट ' को विटब्रेड पोएट्री अवार्ड व फिर से टी एस एलीअट प्राइज़ प्राप्त हुआ. उन्होंने दूसरी भाषाओँ से अंग्रेजी में बहुत अनुवाद भी किया है जिन में से सबसे उल्लेखनीय स्पेनिश कवि अंतोनियो मचादो व जर्मन कवि रिल्के की रचनाएँ हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों का संपादन किया है, नाटक लिखे हैं व विशेष रूप से रेडियो नाटक लिखे हैं. यह कविता उनके संकलन 'आईज ' से है, जिसे  स्पेनिश कवि अंतोनियो मचादो की कविताओं का अनुवाद भी कहा जा सकता है, या कहा जा सकता है की ये कविताएँ, उनकी कविताओं से प्रेरित हैं.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़
 

गुरुवार, मई 17, 2012

कंधे

मैन कैरिंग बॉय, पिएर-ओग्यूस्त रनोआ 
Man Carrying Boy, Pierre-Auguste Renoir
बारिश में एक आदमी सड़क पार करता है 
कदम सावधानी से रखता, दो-दो बार उत्तर-दक्षिण देखता,
क्योंकि उसके कंधे पर उसका बेटा सो रहा है.

किसी गाड़ी से उस पर छींटे नहीं पड़ने चाहिए.
कोई  गाड़ी नहीं निकलनी चाहिए उस की छाया के भी पास से.

आदमी ढो रहा है दुनिया का सब से प्यारा माल 
मगर उस पर नहीं बना हुआ  कोई  चिन्ह. 
उसकी जैकिट पर कहीं नहीं लिखा -- फ्रैजाइल,
हैंडल विद केयर.

चलती साँसों का स्वर आदमी के कानों में भर जाता है.
वह सुनता है एक बच्चे के स्वप्न की गुंजन
अपने ही भीतर गहरे कहीं. 

इस दुनिया में 
हम रह नहीं पाएंगे
अगर हम एक-दूसरे के साथ 
नहीं तैयार वह करने को जो यह आदमी कर रहा है.

सड़क चौड़ी ही रहेगी.
बारिश कभी गिरनी बंद नहीं होगी.


-- नाओमी शिहाब नाए 



 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन " रेड सूटकेस " से है.  

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, मई 15, 2012

एक दिन की कहानी

अ व्हीटफील्ड ऑन ए समर आफ्टरनून,
मार्क 
शगाल
A Wheatfield on a Summer Afternoon,
Marc Chagall
1.
बादल करते हैं कठिन परिश्रम  भविष्य के लिए 
और बारिश को करना है सिद्ध उनके श्रम का बल.
2.
जहाज़ उठा कर चलते हैं समुद्र को 
समुद्र 
कराहते हैं जहाज़ी-सपनों के बोझ तले 
3.
मेंढक पहनते हैं पानी के जूते.
अपनी सबसे सुन्दर कमीजें पहन पाखी प्रवास करते हैं.
4.
हवा गिर जाती है दूसरों के लिए बिछाए अपने ही जाल में.
5.
एक राजकुमारी-सा सूर्य बैठता है क्षितिज के प्रतीक्षा-कक्ष में.
मित्र होते हैं एकत्रित,
मकड़ियाँ और पंछी,
राजसी तितलियाँ और कामकाजी मधुमक्खियाँ,
झींगुर और छिपकलियाँ, 
एक ही इच्छा के अतिथि,
कोई अंतर नहीं झींगुरों और छिपकलियों के बीच.
सूर्य अपने रथ पर सवार चलता है 
और उसके अतिथि करते हैं राज्य पर शासन.
6.
एक पेड़ की टहनियों से उठती है आवाज़ 
हवा के, बिना उसको जाने,
बहा कर ले जाने के लिए.
7.
कवि जब लिखता है 
वह बन जाता है
भाषा के हाथों की वीणा.
8.
क्योंकि मैं प्रायः मौन रहता हूँ
शब्द मेरी खाल में से रिसते हैं.
9.
समय, तुम जो सिले हुए हो मुझ से,
मेरी कविताएँ तुम्हें काढ़ती हैं
और मेरी आवाज़ है अलंकरण और श्रृंगार.
10.
एक देह बन जाती है लिली का फूल और पानी में सोती है;
एक देह शासन करती है आग की झील पर.


-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके संकलन 'सेलेब्रेटिंग वेग-क्लियर थिंग्ज़' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

रविवार, मई 13, 2012

मैं तुम्हें ऐसे प्यार नहीं करता...

          आमूरः बूके, मार्क शगाल
Amoureux Bouquet, Marc Chagall

मैं तुम्हें ऐसे प्यार नहीं करता जैसे कि तुम हो समुद्र-किनारे 
का गुलाब, या पुखराज, या अग्नि द्वारा छोड़ा गुलनार तीर,
मैं तुम्हें ऐसे प्यार करता हूँ जैसे करना चाहिए 
कुछ गहरी अँधेरी चीज़ों को,
छुप-छुप के, छाया और आत्मा के बीच.

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ उस पौधे की तरह जो कभी नहीं 
फूलता मगर भीतर लिए चलता है छुपे फूलों का उजाला;
तुम्हारे प्यार के कारण मेरे बदन में रहती है निराशामय, 
निराली एक ठोस सुगंध जो धरती से हुई है उदित.

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ बिना जाने कैसे, या कब, या कहाँ से.
मैं तुम्हें सीधी तरह से प्यार करता हूँ, 
बिना जटिलता, बिना अभिमान के;
तो मैं तुम्हें प्यार करता हूँ क्योंकि इस के सिवाय 

नहीं जानता और कोई राह: जहाँ नहीं है अस्तित्व
मैं का, तुम का,
इतने पास कि मेरी छाती पर रखा तुम्हारा हाथ, मेरा हाथ है 
इतने पास कि मुझे नींद आती हैं तो आँखें तुम्हारी मूँद जाती हैं.


-- पाब्लो नेरुदा 




 पाब्लो नेरुदा ( Pablo Neruda ) को कौन नहीं जानता. वे चिली के कवि थे.कोलंबिया के महान उपन्यासकार गेब्रिअल गार्सिया मार्केज़ ने उन्हें ' 20 वीं सदी का, दुनिया की सभी भाषाओँ में से सबसे बेहतरीन कवि ' कहा है. 10वर्ष की आयु में उन्होंने कविताएँ लिखनी शुरू की. 19वर्ष की आयु में उनका पहला संकलन 'क्रेपेस्क्युलारियो ' प्रकाशित हुआ और उसके बाद उनकी प्रसिद्द प्रेम कविताएँ ' ट्वेंटी पोएम्ज़ ऑफ़ लव एंड अ सोंग ऑफ़ डेसपैर '. दोनों संकलन खूब सराहे गए और दूसरी भाषाओँ में अनूदित लिए गए. उनकी प्रेम कविताओं की तो सहस्रों प्रतियाँ आज तक बिक चुकी है. उनके पूरे लेखन काल में उनकी 50से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई और अनेक भाषाओँ में असंख्य अनुवाद हुए. 1971में उन्हें नोबेल प्राइज़ भी प्राप्त हुआ. यह कविता उनके संकलन '100 लव सोनेट्स ' से है. यह सातवाँ सोनेट है .
इस कविता का मूल स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीफन टैपस्कोट ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, मई 11, 2012

महल से चीनी चुराना

शुगर बोल,
पिएर-ओग्यूस्त र्नोआ
Sugar Bowl,
Pierre-Auguste Renoir
हम निर्धन विद्यार्थी हैं जो रह जाते हैं स्कूल बंद 
होने के बाद पढ़ने के लिए आनंद का पाठ.
भारत के पर्वतों के उन पंछियों जैसे हैं हम.
मैं एक विधवा हूँ और मेरा बच्चा ही है
मेरे जीवन का एकलौता आनंद.

अपने चींटी जैसे सर में जो एक बात मैं रखता हूँ
वह है चीनी के महल की बनावट का नक्शा.
कितना आनंद है चुराने में चीनी का एक दाना!

एक पंछी की तरह, अँधेरे से उड़ कर जाते हैं 
महल के बड़े कक्ष में, जो गायन से जगमग है,
और फिर उड़ कर बाहर आ जाते हैं.
बड़े कक्ष की गर्माहट से निकाला जाना 
भी एक आनंद है.

मैं ढीला हूँ, आलसी हूँ, और हूँ मूर्ख. मगर मुझे 
उन लोगों के बारे में पढ़ना अच्छा लगता है 
जिन्होंने पाई थी एक झलक उस चेहरे की, 
और ख़ुशी से मर गए थे बीस साल बाद.

तुम्हारे कहे का, कि मैं जल्द ही मर जाऊंगा,
बुरा नहीं मानता. जल्द ही, 
इन शब्दों के स्वर में भी मैं सुनता हूँ शब्द 'तुम',
जिस से आरम्भ होता है हर आनंद भरा वाक्य. 

"तुम चोर हो" न्यायाधीश ने कहा. "दिखाओ 
अपने हाथ!" मैंने दिखाए अपने छालों-भरे हाथ अदालत में.
मेरा दण्ड था आनंद के एक हज़ार साल.


--- रोबर्ट ब्लाए 



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है. यह कविता उनके संकलन 'माए सेंटेंस वाज़ अ थाऊजेंड यिअर्ज़ ऑफ़ जोय' से है .

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, मई 09, 2012

कहाँ से आती है ऐसी कोमलता?

 नियर सें यने, मार्क शगाल
Near Saint Jeannet, Marc Chagall
कहाँ से आती है ऐसी कोमलता?
ये बालों के घूँगर जो मैंने अपनी 
ऊँगली पर लपेटे हैं, पहले नहीं हैं ये -- 
तुम्हारे होंठों से और गहरे रंग के 
होंठों को भी चूमा है मैंने.

आकाश धुला हुआ और गहराता है 
( कहाँ से आती है ऐसी कोमलता? )
मेरी आँखों को अन्य आँखों ने  भी 
जाना है और फिर दृष्टि हटा ली है.

मगर मैंने कभी ऐसे शब्द नहीं सुने 
रात में 
( कहाँ से आती है ऐसी कोमलता ? )
अपना सर तुम्हारी छाती पर टिकाए, 
आराम.

कहाँ से आती है यह कोमलता?
और मैं इसका करुँगी क्या? 
अजनबी, युवा कवि, शहर में 
भटकते, तुम और तुम्हारी पलकें -- 
किसी और से कितनी लम्बी हैं.


-- मारीना स्व्ताएवा 


 मारीना स्व्ताएवा ( Marina Tsvetaeva ) बहुत प्रसिद्द रूसी लेखिका व कवयित्री थीं और उनको 20 वीं सदी के बेहतरीन रूसी साहित्यकारों में गिना जाता है. 18 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन 'ईवनिंग एल्बम' प्रकाशित हुआ. वे रूसी क्रांति व उसके बाद मास्को में पड़े अकाल के समय वहीँ थी. क्योंकी वे क्रांति के खिलाफ थी उन्हें निर्वासित कर दिया गया. कई साल वे अपने परिवार के साथ गरीबी की हालत में पेरिस, बेर्लिन्र व प्राग में रहीं. मास्को लौटने के बाद भी उन्हें शक की नज़र से देखा जाता रहा व उनके परिवार को कसी न किसी कारण से सताया जाता रहा, उनकी बेटी कई वर्ष जेल में रहीं, व पति को मार डाला गया. बिना किसी आर्थिक सहारे के व नितांत अकेलेपन में, उन्होंने आत्महत्या कर ली.
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद इल्या कामिन्सकी व यौं वालोंतीन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़