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| सेल्फ-पोर्ट्रेट विद अ बाटल ऑफ़ वाइन, एडवर्ड मंच Self Portrait with a Bottle of Wine, Edvard Munch |
वह पीता है नींबू वाली चाय, जब कि मैं पीता हूँ कॉफ़ी.
यह अंतर है हम दोनों में.
मेरी ही तरह, उसने पहनी है चौड़ी धारियों वाली कमीज़,
और उसी की तरह, शाम का अखबार पढ़ता हूँ मैं.
वह नहीं देखता मुझे छुप कर उसे देखते हुए.
मैं नहीं देखता उसे छुप कर मुझे देखते हुए.
वह चुप है और मैं भी.
वह वेटर से कुछ पूछता है
मैं वेटर से कुछ पूछता हूँ...
एक काली बिल्ली गुज़रती है हम दोनों के बीच से.
उसके रोओं की रात को मैं महसूस करता हूँ
और वह भी महसूस करता है उसके रोओं की रात...
मैं उस से नहीं कहता: आज आकाश साफ़ है, नीला है.
वह मुझ से नहीं कहता: आज आकाश साफ़ है.
वह देखा जा रहा है और है देखने वाला भी
और मैं देखा जा रहा हूँ और हूँ देखने वाला भी.
मैं अपना बायाँ पैर हिलाता हूँ.
वह हिलाता है अपना दायाँ पैर.
मैं गुनगुनाता हूँ एक गीत की धुन
और वह वैसे ही गीत की धुन गुनगुनाता है.
मैं सोचता हूँ: क्या वह आइना है जिसमें मैं देखता हूँ स्वयं को?
और मुड़ कर झांकता हूँ उसकी आँखों में...मगर वह दिखाई नहीं देता.
मैं कैफ़े से जल्दी-जल्दी निकलता हूँ.
मैं सोचता हूँ: शायद वह कोई हत्यारा था...
या कोई राही जो सोचता है
कि मैं हत्यारा हूँ.
वह डरा हुआ है...और मैं भी.
-- महमूद दरविश
महमूद दरविश ( Mahmoud Darwish )एक फिलिस्तीनी कवि व लेखक थे जो फिलिस्तीन के राष्टीय कवि भी माने जाते थे. उनकी कविताओं में अक्सर अपने देश से बेदखली का दुःख प्रतिबिंबित होता है. उनके तीस कविता संकलन व आठ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. अपने लेखन के लिए, जिसका बीस भाषाओँ में अनुवाद भी हो चुका है, उन्हें असंख्य अवार्ड मिले हैं. फिलिस्तीनी लोगों के 'वतन' के लिए संघर्ष के साथ उनकी कविताओं का गहरा नाता है. जबकि उनकी बाद की कविताएँ मुक्त छंद में लिखी हुईं और कुछ हद तक व्यक्तिगत हैं, वे राजनीती से कभी दूर नहीं रह पाए.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद ओम्निया अमीन व रिक लन्दन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़



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चार्लज़ सिमिक (Charles Simic ) एक सर्बियाई-अमरीकी कवि, निबंधकार, अनुवादक व दार्शनिक हैं। उनका जन्म युगोस्लाविया में हुआ और वे युद्ध-त्रस्त यूरोप में बड़े हुए। 1954 में,16 वर्ष की आयु में वे अपने परिवार के साथ अमरीका आ गए। 70 के दशक तक वे कवि के रूप में स्थापित हो गए। उनकी कविताएँ सूक्ष्म व बिम्बों से भरपूर होती हैं। वे पेरिस रिव्यू के सम्पादक रह चुके हैं व अमरीका के 15 वें पोएट लौरियेट भी। आजकल वे अमरीकी साहित्य व क्रिएटिव राइटिंग के प्रोफ़ेसर एमेरिटस हैं, व यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू हेम्पशियर में पढ़ाते हैं। उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताओं के 30 से अधिक संकलन, अनुवादों के 15 संकलन व गद्य के 8 संकलन प्रकाशित हो चुके है।
नाज़िम हिकमत ( Nazim Hikmat) तुर्की के कवि , उपन्यासकार व नाटककार थे. उन्हें 28 वर्ष की क़ैद हो गयी थी , इस जुर्म पर कि उनकी कविताएँ पढ़ कर तुर्की सेना विद्रोह करने को प्रेरित होती है. अपना अधिकाँश जीवन उन्होंने जेल में या तुर्की से निर्वासित हो, दूसरे देशों में बिताया. चाहे तुर्की सरकार ने उन्हें खूब तंग किया, तुर्की के लोगों के मन में उनके लिए हमेशा बहुत इज्ज़त रही क्योंकि उनका लिखा लोगों के मन की बात कहता था. उनका देहांत मास्को में हुआ और वे वहीँ दफनाये गए. 1950 में उन्हें नोबेल पीस प्राइज़ प्राप्त हुआ. उनका एक उपन्यास, 4 नाटक व कई कविता संकलन प्रकाशित हुए. उनकी कविताओं का 50 से भी अधिक भाषाओँ में अनुवाद हुआ है. 