बुधवार, फ़रवरी 11, 2015

नहीं है कोई इलाज

टॉरसो इन स्पेस, अलिक्सान्द्र आर्कापेंग्को
Torso in Space, Olexandr Archipenko
मन में है ऐसा एक स्थान जो 
कभी भर नहीं पाएगा 
एक रिक्तता 
अनन्य सुख के 
पलों में 
यहाँ तक कि 
सबसे अच्छे वक़्त 
में भी 
पता होगा 
पता होगा हमें 
उसके होने का 
पहले से 
कहीं अधिक 
मन में है ऐसा एक स्थान जो 
कभी नहीं भर पाएगा 
और 
उस विस्तार में 
हम प्रतीक्षा करेंगे 
हम करते रहेंगे 
प्रतीक्षा 


-- चार्ल्स बूकौस्की



Image result for charles bukowski हेनरी चार्ल्स बूकौस्की (Henry Charles Bukowski)जर्मन मूल के अमरीकी कवि, उपन्यासकार एवं कथाकार थे. उनका लेखन उनके शहर लॉस एंजेलेस के सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक वातावरण से प्रभावित था. उन्होंने हज़ारों कविताएँ, सैंकड़ों लघु कथाएँ एवं छः उपन्यास लिखे और कुल-मिलाकर उनकी 60 पुस्तकें प्रकाशित हुईं। उनके कविताओं-कहानियों के विषय थे आम अमरीकियों का जीवन, मदिरापान, औरतों के साथ प्रेम-सम्बन्ध, नौकरी की नीरसता और स्वयं लेखन कार्य। वे बेहद लोकप्रिय कवि थे, यहाँ तक कि 1986 में 'टाइम' पत्रिका ने इन्हें 'लॉरिएट ऑफ़ अमेरिकन लोलाइफ'' की उपाधि दे डाली। 

शुक्रवार, अगस्त 15, 2014

दो हाइकू

मॉर्निंग ऑन द सेन इन द रेन, क्लोद मोने
Morning on the Seine in the Rain, Claude Monet

पंछी 
गाते हैं अन्धकार में 
भीगी-सी है भोर 

--

उठ रही है महक 
गीली मिट्टी की --
झुकना क्या?




-- जैक केरुयक



 यौं लुइ जैक केरुयक (Jean-Louis Lebris de Kérouac)अमरिकी उपन्यासकार एवम कवि थे. उनहे विलियम एस बरोज और ऐलन गिंसबर्ग के साथ साहित्यिक आयकनोक्लास्ट कहा जाता है. वे तीन एवम ग्रेगरि कोरसो और लाँरेंस फेर्लिंघेट्टि थे अमरिका के बीट आंदोलन के मुख्य नायक। केरुयक जाने जाते है उनके अविराम लेखनप्रणली के लिये। वह एक बार अपना टाइप राइटर पर बैठते थे तो घन्टो टाइप किया करते थे जब तक कि उनका उपन्यास खतम नहीं हो जाता। उनकी प्रमुख कृतियाँ में ऑन द रोड, सबटेर्रेनियन्ज़, द धर्मा ब्म्ज़ इत्यादि उपन्यास और मईको सिटी ब्लूज़, स्कैटर्ड पोएम्ज, बुक ऑफ़ स्केचेज़, ओल्ड एंजेल मिडनाइट इत्यादि काव्य संग्रह भी शामिल हैं.

रविवार, मई 04, 2014

भीतर से एक सी

क्राउचिंग बेगर, पाब्लो पिकासो
Crouching Beggar, Pablo Picasso
प्रणयोत्सव के लिए 
तुम्हारे घर की ओर आते-आते 
सड़क के मोड़ पर मिली मुझे 
एक बूढ़ी भिखारिन.

उसका हाथ पकड़, 
चूमा मैंने उसका कोमल गाल,
हम बातें करते रहे, वह थी 
भीतर से बिल्कुल मेरे जैसी,
एक ही स्वभाव की,
जो मैं जल्द ही भाँप गई थी,
जैसे जानता है एक कुत्ता गंध 
दूसरे कुत्ते की. 

मैंने उसे कुछ पैसे दिए,
उसे छोड़ कर जाना कठिन था मेरे लिए.
जिससे गहरी निकटता हो कोई ऐसा, 
आखिर, हरेक को चाहिए.

और,
फिर मुझे पता न रहा
कि तुम्हारे घर की ओर आखिर मैं जा क्यों रही थी.





-- अन्ना श्विर 





 अन्ना श्विर ( Anna Swir) पोलिश कवयित्री थीं. उनका जन्म वॉरसॉ में हुआ. उनके पिता एक चित्रकार थे. 1930 के दशक में उनकी कविताएं प्रकाशित होने लगीं. द्वितीय विश्व युद्ध के समय, पोलैंड के नाज़ी अधिग्रहण के दौरान वे पोलिश रेज़िस्टेंस मूवमेंट से जुड़ गईं और वॉरसॉ विद्रोह के वक्त उन्होंने सैन्य नर्स का कार्य किया. इस बीच वे भूमिगत प्रकाशनों के लिए लेखन भी रहीं. चेस्वाफ मीवोश लिखते हैं कि वे उन दिनों उनके संपर्क में थे. उन्होंने अन्ना श्विर के एक काव्य संकलन का अनुवाद भी किया है. उनकी कविताओं में युद्ध के अनुभवों का गहरा असर दिखाई देता है. 1974 में उनका 'बिल्डिंग द बैरीकेड' नमक काव्य संकलन प्रकाशित हुआ जो उस समय में देखी-भोगी पीड़ा एवं यातना का दस्तावेज़ है. वे स्त्री के शरीर और उम्र के साथ उसमें  बदलावों के बारे में भी बहुत स्पष्ट कविताएँ लिखती थीं. यह कविता उनके 1996 में प्रकाशित हुए संग्रह 'टॉकिंग टू माय बॉडी' से है.

इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद चेस्वाफ मीवोश एवं लेऑनर्ड नेथन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 



गुरुवार, मई 01, 2014

मौसम बीता जाए

द फैक्ट्री एट आसनिऐर, विनसेंट वान गोग
The Factory at Asnieres, Vincent van Gogh
ठीक मिल के दरवाज़े के सामने 
ठिठकते हैं अचानक मज़दूर के कदम
सुहावना मौसम खींचता है पीछे से
उसकी कमीज और
जब वह मुड़ कर देखता है
गोल-गोल और लाल सूरज को 
मुस्कुराते हुए अपने धूसर आकाश में 
एक आँख दबाकर 
बड़े अपनेपन में पूछ बैठता है  
कहो कामरेड सूरज 
क्या तुम्हें नहीं लगता 
है ये बहुत बड़ा घोटाला 
कि ऐसा सुहावना बासंती दिन 
मिल के मालिक को मिला?


-- याक प्रेवेर 



 
याक प्रेवेर  (Jacques Prévert)फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है. 
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शनिवार, मार्च 08, 2014

सहेली का तलाक़

इन द गार्डन, चाइल्ड हासम
In the Garden, Childe Hassam
मैं चाहती हूँ 
कि वह उखाड़ ले 
अपने बागीचे का 
हर पौधा 
पैन्ज़ी 
पेंटा फूल 
गुलाब 
रैननकुलेसी 
थाइम और लिली 
वे भी जिनका नाम 
कोई नहीं जानता 
उतार ले मॉर्निंग ग्लोरी
की बेल जो चढ़ी है 
बाड़ पर 
ले जाए वे फूल जो खिले हुए हैं 
और जो खिलने को हैं 
और जो अभी खिले नहीं, सो रहे हैं  
ख़ास तौर पर वे जो सो रहे हैं 
और फिर 
और फिर 
बो दे उन्हें अपने नए आँगन में 
शहर के
दूसरे छोर पर  
और फिर देखे कि 
वे कैसे साँस लेते हैं  


-- नाओमी शिहाब नाए 




 नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन ''फ़ुएल " से है. 

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

शुक्रवार, मार्च 07, 2014

शब्द पट्ट

फ्लावर्ज़ ऑफ़ सीशेल्ज़, मैक्स ऐरनेस्ट
Flowers of Seashells, Max Ernst  
1. 
उसने शंख को लगाया अपने कान से:
वह सुनना चाहती थी वो सब
जो 'उसने' उस से कभी नहीं कहा.

2. 
एक-दूसरे की ओर मुँह किये 
उन दोनों की देहों के बीच 
केवल एक इंच की दूरी है 
चित्र में:
एक फ्रेम-जड़ी मुस्कान  
दबी हुई है मलबे तले.

3. 
जब भी फेंकते हो तुम 
समुद्र में कंकड़ 
मुझ में लहरियाँ उठती हैं.

4. 
बहुत छोटा है मेरा दिल 
इसीलिए जल्दी भर आता है.

5. 
पानी में मिल जाने के लिए
और भरने के लिए खाली जगहें
नहीं है पानी को ज़रुरत किसी युद्ध की. 

6. 
पेड़ नहीं पूछता कि वह क्यों नहीं बस सकता 
किसी और जंगल में 
न ही पूछता है ऐसे और व्यर्थ के सवाल. 

7. 
जिस समय वह देखता है टीवी 
वह पढ़ती है एक उपन्यास
जिसकी जिल्द पर बना है 
एक आदमी जो टीवी देख रहा है 
और एक औरत जो पकड़े बैठी है उपन्यास. 

8. 
नए साल की 
पहली सुबह 
सर उठाकर देखेंगे हम सभी 
एक ही सूरज को. 

9. 
उसने उठाकर रखा उसका सर अपनी छाती पर. 
उसने जुम्बिश नहीं ली:
वह मर चुका था. 

10. 
वह जो मुझे निहारता रहा इतने समय तक 
और जिसे मैं उतने ही समय तक देखती रही एकटक .… 
वह आदमी जिसने कभी मुझे गले से नहीं लगाया 
और नहीं लगी मैं जिसके कभी गले.…
बारिश ने बहा दिए उसके सभी रंग
उस पुराने कैन्वस पर से.  

11. 
वह नहीं था उन पतियों में 
जो पहले खोए फिर पाए गए थे;
वह नहीं था लौटा युद्ध-बंदियों के संग,
न ही था वह उस पतंग के साथ, 
जो उड़ा ले गई थी उसे,
सपने में किसी दूसरी जगह,
जब वह खड़ी थी कैमरे के सामने, 
चिपकवा रही थी 
पासपोर्ट पर अपनी मुस्कान. 

12. 
सड़क के किनारे 
खजूरों के ऊंचे-ऊंचे ढेर:
मुझे चूमने का 
तुम्हारा तरीका. 

13. 
जैसे पहुँचते हैं
केश रॅपंज़ल के 
ऊपर खिड़की से 
नीचे धरती तक
वैसे इंतज़ार करते हैं हम.

14. 
दीवार पर 
छोड़ गए थे क़ैदी
जो परछाइयाँ,
घेर लेती हैं वे जेलर को 
और डालती हैं प्रकाश 
उसके अकेलेपन पर.

15. 
मातृभूमि, मैं नहीं हूँ तुम्हारी माँ,
तो फिर क्यों बिलखती हो तुम मेरी गोद में इस तरह 
हर बार 
जब चोट पहुँचती है तुम्हें?

16. 
मत ध्यान दो इस पंछी पर:
वह रोज़ आता है 
और रुकता है टहनी के सिरे पर 
गाने के लिए 
एक या दो गीत.
बस इतना ही करता है वह:
इतनी ख़ुशी उसे और कहीं नहीं मिलती.

17. 
घर की चाबियाँ, 
पहचान-पत्र,
हड्डियों के बीच छितरी धुंधली तस्वीरें...
ये सब कुछ फैला है 
एक सामूहिक कब्र में.

18. 
अरबी भाषा को 
पसंद हैं लम्बे वाक्य 
और लम्बे युद्ध.
उस पसंद हैं कभी न ख़त्म होने वाले गीत 
रतजगे 
और रोना खंडहरों में.
वह प्रयत्न करती है 
पाने के लिए दीर्घायु  
और एक दीर्घ मृत्यु.

19. 
घर से बहुत दूर हैं --
केवल यही बदलाव आया है हम में.

20. 
सिंड्रेल्ला छोड़ आयी है अपना स्लिपर इराक़ में 
और छोड़ आयी है चायदान से उठती 
इलायची की खुश्बू,
और वह बड़ा-सा फूल 
जिसका मुँह खुला रहता है मौत के मुँह की तरह.

21. 
तुरंत पहुँचते सन्देश 
करते हैं क्रान्ति को प्रज्ज्वलित.
वे नई ज़िंदगियों को भड़काते हैं
जब एक देश के डाउनलोड होने का इंतज़ार करते हुए,
ऐसा देश जो हो
मुट्ठी भर धूल से कुछ अधिक,
उनके सामने आते हैं ये शब्द:
"आपकी खोज से कोई परिणाम मेल नहीं खाते"

22. 
कुत्ते का जोश
जब वह उठा लाता है फेंकी हुई डंडी अपने मालिक के पास,
बस वही समय है पत्र को खोलने का.

23. 
बादलों की तरह 
हम हलके हो पार करते हैं सरहदें.
कोई हमें बोझ की तरह ढो नहीं रहा 
मगर जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं 
हम लाद लेते हैं बारिश 
और एक बोलने का लहज़ा 
और एक दूसरी जगह 
की याद.

24. 
कैसा रोमांच होता है उसके सामने आ कर.
वह क्या कह रहा है वह समझ नहीं पा रही:
उसे फुरसत कहाँ, वह मानो चबा रही है उसकी आवाज़.
वह देख रही है उन होंठों को जिन्हे वह कभी चूम नहीं पाएगी,
उन कांधों को जिन पर सर रख कर कभी रो नहीं पाएगी,
उस हाथ को जिसे वह कभी थाम नहीं पाएगी,
और नीचे ज़मीन को जहाँ मिल रही हैं दोनों कि परछाइयाँ.


-- दून्या मिखाइल 


image-dunya2  दून्या मिखाइल ( Dunya Mikhail )एक इराकी-अमरीकी कवयित्री हैं. वे अरबी में लिखतीं हैं व उनकी कविताएँ इराक के हालात , युद्ध, युद्ध से प्रभावित जीवन व विस्थापन के बारे में हैं. अरबी में उनकी कविताओं के पांच संकलन प्रकाशित हुए हैं. उनकी अंग्रेजी में अनूदित कविताओं के दो संकलन प्रकाशित हुए हैं, जिन में 'द वार वर्क्स हार्ड' को PEN ट्रांसलेशन अवार्ड मिला व 'डायरी ऑफ़ अ वेव आउटसाइड द सी' को अरब अमेरिकेन बुक अवार्ड मिला है. 2001 में उन्हें यू एन ह्यूमन राइट्स अवार्ड फॉर फ्रीडम ऑफ़ राइटिंग प्राप्त हुआ.

वे 1996 से अमरीका में रहती हैं व अरबी पढ़ाती हैं.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद करीम जेम्स अबु-ज़ैद ने किया है.    
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, मार्च 02, 2014

सही रास्ता

सॉफ्ट कंक्रीट, किशिओ सूगा
Soft Concrete, Kishio Suga


हरेक मील पर 
हर वर्ष 
तंग सोच लिए बूढ़े 
दिखाते हैं बच्चों को रास्ता 
ठोस सीमेंट के संकेतों से 



-- याक प्रेवेर 



 
याक प्रेवेर  (Jacques Prévert)फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है. 
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़