सोमवार, जून 20, 2011

रास्ते का आरंभ

स्केच, ओग्यूस्त रोदें
Sketch, Auguste Rodin


रात कागज़ थी 
और हम स्याही:
" क्या बनाया तुमने? 
एक चेहरा? आदमी? या एक पत्थर?"
" क्या बनाया तुमने ?
एक चेहरा? औरत? या एक पत्थर? "
मैंने जवाब नहीं दिया.
हम प्यार करते रहे. 
हमारे प्यार कि तरह 
हमारी चुप्पी तक,
कोई रास्ता नहीं जाता 
नहीं जाता कोई रास्ता.

-- अदुनिस 


Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक वे अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद कमाल बुलाता, सूज़न आइनबाइनडर व मिरेन घोस्सेन ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शनिवार, जून 18, 2011

दुःख के पहरेदारों की तरह...

सौरो, ओग्यूस्त रोदें 
दुःख के पहरेदारों की तरह
खिड़की के कांच से माथा टिकाए 
खुली हथेलियों के छोटे मैदान
और उनके गतिहीन उदासीन
दोहरे क्षितिजों में 
आकाश से भी अधिक रात लिए 

दुःख के पहरेदारों की तरह
खिड़की के कांच से माथा टिकाए
मैं तुम्हें ढूंढता हूँ 
इंतज़ार से कहीं आगे 
अपने आप से कहीं आगे 
और इतना चाहता हूँ मैं तुम्हें 
कि अब नहीं जानता 
हम दोनों में से 
कौन यहाँ नहीं है

--पॉल एलुआर








पॉल एलुआर फ़्रांसिसी कवि थे व स्यूरेअलीज्म के संस्थापकों में से एक थे. 16 साल की आयु में जब उन्हें टी.बी होने पर स्विटज़र्लैंड के एक सैनिटोरियम में स्वास्थ्य लाभ के लिए भेजा गया, उस समय उनका कविता में रुझान हुआ. उनका पहला कविता संकलन उनके युद्ध में हुए अनुभवों के बाद लिखा गया. उनकी लगभग 70 किताबे प्रकाशित हुई जिनमे, कविता संग्रह व उनके साहित्यिक और राजनैतिक विचार भी हैं.   
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़                 

गुरुवार, जून 16, 2011

और क्या वह जादुई दुनिया...

द स्टारी नाईट , विन्सेंट वान गोग 

और क्या वह जादुई दुनिया
तुम्हारे साथ ही ख़त्म हो जाएगी?
जहाँ जीवन की सबसे निर्मल सांसों पर,
पहले प्यार की रोशन छाया पर,
तुम्हारे मन में जो उतर कर बस गयी,
उस आवाज़ पर, 
तुमने सपनों में जो पकड़ना चाहा था,
उस हाथ पर,

और उन सब चीज़ों पर 
जो तुम्हें प्यारी थी, 
जिन्होंने छुआ था तुम्हारी आत्मा को, 
आकाश की गहराईयों को,
जहाँ इन सब पर 
स्मृति का पहरा है, 
क्या वह जादुई दुनिया
तुम्हारे साथ ही ख़त्म हो जाएगी?

तुम्हारे साथ ही ख़त्म हो जाएगा क्या, 
वह पुराना जीवन जो तुमने ठीक कर के 
फिर से नया-सा किया है?
तुम्हारी आत्मा के कल-पुर्जों ने क्या
इतना श्रम किया था 
बस हवा और मिटटी होने के लिए? 


-- अंतोनियो मचादो


  अंतोनियो मचादो 20 वीं सदी के आरम्भ के स्पेनिश कवि थे. युवावस्था में पेरिस में बिताया समय व फ्रांस के सैम्बोलीस्त कवियों से मिलना-जुलना, उनके कवि होने का सबसे बड़ा कारण बना. 20 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन 'सोलेदाद' छप चुका था. उनकी कविताओं में जहाँ एक तरफ अंतर्दृष्टि व अन्तरावलोकन दिखाई देता है, वहीँ दूसरी तरफ स्पेन के लोगों का जीवन व मानसिकता झलकती है. उनके कई कविता संकलन प्रकाशित हुए व अनेक कविताओं का दूसरी भाषाओँ में अनुवाद भी हुआ.
इस कविता का मूल स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद  ए. एस क्लाइन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, जून 14, 2011

चाँद

इवनिंग लैंडस्केप विद राइजिंग मून, विन्सेंट वान गोग


इन सुनहरी किरणों में 
कितना एकांत है.
इन रातों का चाँद,वह चाँद नहीं है 
जो सबसे पहले आदम ने देखा था.
मानवीय रतजगों की
हज़ारों सदियों ने 
उसे एक पुराने दुःख से भर दिया है.
देखो.
वह तुम्हारा आइना है.


-- होर्खे लुईस बोर्खेस 



Jorge Luis Borges
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                           होर्खे लुईस बोर्खेस ( Jorge Luis Borges ) अर्जन्टीना के लेखक, कवि व अनुवादक थे. वे 20 वीं सदी के प्रमुख लेखकों में गिने जाते हैं. वे अपनी कहानियों व निबंधों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्द हैं. 1961 से पहले, जब उन्हें व सैम्युएल बेक्केट को एक साथ फोर्मनटर प्राइज़ मिला था, वे केवल अर्जन्टीना में ही अधिक जाने जाते थे. उसके बाद से, उनके लेखन का अंग्रेजी में खूब अनुवाद हुआ और वे दुनिया भर में सराहे गए. उनकी कहानियों में फंतासी व सपनों की दुनिया खूब मिलती है. अन्य सम्मानों सहित उन्हें सेर्वोंत प्राइज़ व फ़्रांस का लेजियन ऑफ़ ओनर भी प्राप्त हुआ था. 
इस कविता का स्पैनिश से अंग्रेजी में अनुवाद ए एस क्लाइन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, जून 11, 2011

बारिश में एक पेड़

समर स्टोर्म, रोबेर्ट हेनरी
Summer Storm, Robert Henri

एक पेड़ 
बारिश में इधर-उधर चल-फिर रहा है,
इस बरसते पानी में 
देखो हमारे पास से 
कैसे दौड़ता हुआ निकल गया,
उसे कुछ करना है.
फलों के बागीचे में पंछी कि तरह 
वह बारिश में से जीवन बटोर रहा है.

जब बारिश रुक जाएगी
पेड़ भी रुक जायेगा.
वो देखो वो रहा, 
साफ़ बिन-बादल रातों में 
हमारी तरह वह भी 
इंतज़ार कर रहा है उस पल का 
जब अंतरिक्ष में हिमकणों के फूल खिलेंगे.

-- तोमास त्रांसत्रोमर 


तोमास त्रांसत्रोमर  ( Tomas Tranströmer ) स्वीडन के लेखक, कवी व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में , बल्कि दुनिया भर में सराही गई हैं . उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओं में अनूदित की गई हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं जिनमें इंटरनैशनल पोएट्री फोरम  का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए नामित भी किये गए हैं. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पडा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता, मगर दुसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं.
इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट फुल्टन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

गुरुवार, जून 09, 2011

दे प्रोफुन्दिस अमैमस ( प्यार गहराई से करते हैं हम)

स्पेनिश कपल इन फ्रंट ऑफ़ एन इन्न, पाब्लो पिकस्सो 
कल रात
ग्यारह बजे 
तुमने सिगरेट पी थी 
और मैंने
तुम्हें वहां बैठा पाया था 
हम बैठे रहे थे 
और तुम्हारी सब ट्रामें 
छूट गयी थी 
मेरी तो थी ही ऐसी 
जो छूट जाती हैं 

पांच मील 
तक चलते रहे थे हम 
दरबानों को छोड़  
किसी ने हमें 
पास से गुज़रते 
नहीं देखा 
निस्संदेह 
दरबानों द्वारा देखा जाना
सहज ही है 

सड़क को देखो 
वैसे जैसे 
सिर्फ तुम ही देख सकते हो 
लोग 
उनका आचरण 
चार हज़ार लोगों की रूचि
यह देखने में है 
कि तुम्हारी पैंट की सिलवटें 
 कैसी हैं  

कोई बात नहीं
भींच लो मुझे
अपनी पूर्णत: नीली आँखों के
गोल घेरों में 
ऐसा काफी समय तक चलेगा 
हम से पहले तो 
कई सदियाँ पहुँच जायेंगी 
मगर चिंता मत करो 
मत करो 
अधिक चिंता 
हमारा वास्ता 
तो बस इस पल से है 
हम समुद्री-डाकू हैं 
एक भावशून्य बिल्ली की 
अनूठी आश्चर्यचकित  
आश्चर्यजनक आँखें लिए 
हमारी इस अनोखी क्रिया का 
कोई भूत या भविष्य नहीं होता 


-- मारियो सेज़ारीनी द वेसकौनसियलोज़

Mario Cesariny मारियो सेज़ारीनी द वेसकौनसियलोज़ जो मारियो सेज़ारीनी के नाम से जाने जाते हैं, पुर्तगाल के प्रमुख स्यूरेअलीस्त कवि थे. वे चित्रकार भी थे, मगर एक समय के बाद, कविता पर उनका पूरा ध्यान केन्द्रित हो गया. फ्रांस में पढने के दौरान, वे आंद्रे ब्रेतों से मिले और स्यूरेअलीज्म से बहुत प्रभावित हुए. मगर समय के साथ-साथ उनकी लेखन शैली बदलती रही, वे कभी किसी एक विचारधारा पर नहीं टिके रहे, और शायद यह उनके लेखन की विशेषता थी. अपने पचास वर्षों के लेखन काल में उनके कई कविता संकलन छपे हैं. उनकी कविताओं का अब तक अधिक अनुवाद नहीं हुआ है.
इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद रीनू तलवाड़.

मंगलवार, जून 07, 2011

कहो कि मुझसे प्यार करती हो

ग्रीन इयर्स ऑफ़ व्हीट, विन्सेंट वान गोग 

कहो कि मुझसे प्यार करती हो... 
ताकि मैं सुन्दर हो जाऊं 
कहो कि मुझसे प्यार करती हो...
कि मेरी उँगलियाँ सोने की हो जाएँ 
और मेरा माथा दिये-सा दमके 
कहो कि मुझसे प्यार करती हो 
ताकि मैं पूरी तरह बदल जाऊं 
और बन जाऊं 
एक गेहूं की डाली या एक पेड़  
अब कह भी दो, हिचकिचाओ मत 
कोई-कोई प्यार देर नहीं सह पाते 
कहो कि मुझसे प्यार करती हो 
ताकि मेरा दैवत्व और बढ़ जाए 
और मेरी प्रेम कविताएँ 
बन जाएँ एक पावन ग्रन्थ 
अगर तुम चाहो तो मैं कैलेंडर भी बदल दूंगा 
कुछ मौसम मिटा दूंगा, कुछ जोड़ दूंगा 
और पुराना साल मेरे हाथों में निरस्त्र-सा होगा
मैं औरतों का राज्य स्थापित कर दूंगा.

कहो कि मुझसे प्यार करती हो
ताकि मेरी कविताएँ तरल हो जाएँ 
और मेरी लिखावट बहुत सुन्दर 
अगर तुम मेरी प्रिय होती 
तो मैं घोड़े और जहाज़ लेकर 
सूरज पर चढ़ाई कर देता.
संकोच मत करो...यही एक मौका है
मेरे इश्वर बनने का...या पैगम्बर.

--  निजार क़ब्बानी 

 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 की उम्र से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 34 कविता-संग्रह छप चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और नाओमी शिहाब नाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़