गुरुवार, सितंबर 13, 2012

शिन्टो

स्टिल लाइफ विद अ बुक, पॉल सीनियैक
Still Life With a Book, Paul Signac
जब दुःख हमें पछाड़ देते हैं
एक पल के लिए हमें बचा लेता है 
कुछ सादा पर अप्रत्याशित
जो आता है चेतना से, स्मृति से:
स्वाद एक फल का, पानी का स्वाद,
वह चेहरा जो एक स्वप्न हमें लौटा देता है,
नवम्बर की पहली चमेली,
दिक्सूचक की अनंत चाह,
एक किताब
जो हमनें समझा था कि खो गई है,
एक षट्पदी की धमक,
वह छोटी-सी चाबी
जो खोल देती है हमारे लिए एक घर,
पुस्तकालय की गंध, या संदल की,
एक सड़क का पूर्व नाम,
एक नक़्शे के रंग,
एक आकस्मिक शब्द व्युत्पत्ति,
तराशे नाखून का चिकनापन,
वह तिथि जो हम ढूंढ रहे थे,
घंटे के बारह गहरे प्रहार, हमारे गिनने के साथ बजते हुए,
शरीर में अचानक उठा दर्द.

अस्सी लाख शिन्टो देवता
पूरी धरती पर चुपचाप भ्रमण करते हैं.
ये विनम्र देव हमें छूते हैं,
छूते हैं और आगे बढ़ जाते हैं.


-- होर्खे लुईस बोर्खेस 



Jorge Luis Borges होर्खे लुईस बोर्खेस ( Jorge Luis Borges ) अर्जन्टीना के लेखक, कवि व अनुवादक थे. वे 20 वीं सदी के प्रमुख लेखकों में गिने जाते हैं. वे अपनी कहानियों व निबंधों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्द हैं. 1961 से पहले, जब उन्हें व सैम्युएल बेक्केट को एक साथ फोर्मनटर प्राइज़ मिला था, वे केवल अर्जन्टीना में ही अधिक जाने जाते थे. उसके बाद से, उनके लेखन का अंग्रेजी में खूब अनुवाद हुआ और वे दुनिया भर में सराहे गए. उनकी कहानियों में फंतासी व सपनों की दुनिया खूब मिलती है. अन्य सम्मानों सहित उन्हें सेर्वोंत प्राइज़ व फ़्रांस का लेजियन ऑफ़ ओनर भी प्राप्त हुआ था.
इस कविता का स्पैनिश से अंग्रेजी में अनुवाद ए एस क्लाइन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, सितंबर 11, 2012

बेकार ही में भरे एक गिलास की तरह...

ग्लास ऑफ़ वाइन, पिएर-ओग्यूस्त रेनोआ
Glass of Wine, Pierre Auguste Renoir
बेकार ही में भरे एक गिलास की तरह
जो मेज़ पर से कोई नहीं उठाता,
मेरे दुःख-विहीन मन में उमड़ता है
वह दुःख जो उसका अपना नहीं है.

वह अभिनीत करता है उदास स्वप्न
करने के लिए केवल उनका अनुभव
और बचाने के लिए स्वयं को उस दुःख से
जिससे भयभीत होने का वह ढोंग कर रहा है.

कल्पित कथा,
और महीन कागज़ में लिपटी
जिस मंच पर वह खेली जा रही है
वह लकड़ी का नहीं है,
वह नक़ल उतारती है दुखों के नृत्य की
ताकि घटित ना हो कुछ भी.


-- फेर्नान्दो पेस्सोआ



 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने अपने ही नाम से लिखी थी, यह बताना ज़रूरी है क्योंकि अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ  के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने  मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'सोंगबुक 'से है.
इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, सितंबर 09, 2012

धूल

ला प्रोमेनाद, मार्क शगाल
La Promenade, Marc Chagall


हमनें क्या खो दिया, वह क्या था जो भीतर कहीं खो गया?
किसकी हैं ये दूरीयाँ जिन्होनें हमें अलग कर दिया था
और जो अब हमें बाँध रही हैं एक साथ?

क्या हम अभी भी एक हैं
या टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं हम दोनों के? कितनी कोमल है यह धूल --
अब उसकी देह, और मेरी, इस क्षण में
एक ही हैं



-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके 2003 के संकलन 'बिगिनिन्ग्ज़ ऑफ़ द बॉडी, एंडज़ ऑफ़ द सी' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शुक्रवार, सितंबर 07, 2012

रयु द सेन

कपल वाचिंग, पाब्लो पिकासो
Couple Watching, Pablo Picasso
रात को साढ़े दस बजे
सेन सड़क के उस कोने पर
जहाँ एक और सड़क आकर मिलती है
एक आदमी लड़खड़ाता  है
एक नौजवान
हैट पहने
रेनकोट पहने
एक औरत उसे पकड़ के झकझोर रही है
झकझोर रही है
और कुछ कह रही है
और
वह सर हिला रहा है - नहीं
उसका हैट इधर-उधर हो रहा है
और औरत का तो पीछे गिरने ही वाला है
दोनों के चेहरे पीले
पड़ गए हैं
आदमी का मन है कि
वहाँ से चला जाए
गायब हो जाए...मर जाए
मगर औरत की जीने की तीव्र इच्छा है
और उसकी आवाज़
उसकी फुसफुसाती आवाज़
चाह कर भी बिना सुने नहीं रह सकते
वह एक आह है
एक आदेश
एक पुकार
कितनी आतुर है
यह आवाज़
और उदास
और जीवित
सर्दियों के कब्रिस्तान में
कब्र पर ठिठुरते नए-जन्मे बीमार बच्चे-सी
दरवाज़े में दबे हाथ कि दर्दभरी आवाज़
एक गीत
एक वाक्य
हमेशा वही
दोहराया हुआ
एक वाक्य
बिना रुके
बिना जवाब
आदमी उसे देख आँखे फेर लेता है
अपनी
बाहों को हिलाता है
एक डूबते हुए की तरह
और वाक्य फिर फूट पड़ता है
सेन सड़क के उस कोने पर
जहाँ एक और सड़क आकर मिलती है
औरत बोलती जा रही है
बिना थके
पूछती जा रही है अपना बेचैन सवाल
न भर पाने वाला घाव
पिएर, सच क्या है
पिएर, सच क्या है
मुझे सब जानना है
सच-सच कहो मुझसे
औरत का हैट गिर जाता है
पिएर, मुझे सब जानना है
सच-सच कहो मुझसे
महान बेवकूफी का सवाल
पिएर को जवाब देना होगा
वह हार गया
वह जिसका नाम पिएर है
उसकी एक मुस्कान है
जिसे वह बिखेरना चाहता है
और बार
-बार कह रहा है
देखो, शांत हो जाओ, तुम पगला रही हो
मगर उसे नहीं लगता वह ठीक से कह पा रहा है
वह देख नहीं रहा
वह देख नहीं पा रहा
कैसे मुस्कान से उसका चेहरा विकृत हो रहा है
उसका दम घुट रहा है
मानो सारी दुनिया उसपर चढ़ बैठी हो
और वह सांस नहीं ले पा रहा
मानो वह बंदी हो
अपने ही वायदों का
अब उस से हिसाब माँगा जा रहा है
सामने है
एक हिसाब करने वाली  मशीन
एक प्रेम-पत्र लिखने वाली मशीन
एक सहने वाली मशीन
जो उसे दबोच लेती है...
उस पर लटक जाती है ...
पिएर, सच-सच कहो मुझसे


-- याक प्रेवेर


 याक प्रेवेर  ( Jacques Prévert )फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का, विक्टर ह्यूगो के बाद का, सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है. 
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

बुधवार, सितंबर 05, 2012

अनुत्तरित पत्र

स्टिल लाइफ विद लेटर्ज़,
कुज़्मा पेत्रोव-वोड्किन
Still Life with Letters,
Kuzma Petrov-Vodkin

चिक में से भीतर आती हैं 
अगस्त की धूप की धारियाँ.
कुर्सियों पर रखी हैं 

उनुत्तरित पत्रों से भरी  टोकरियाँ.
यहाँ ज़रूर कोई नासमझ आदमी रहता होगा.



--  रोबर्ट ब्लाए



 रोबर्ट ब्लाए ( Robert Bly ) अमरीकी कवि,लेखक व अनुवादक हैं. 36 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ, मगर उस से पहले साहित्य पढ़ते समय उन्हें फुलब्राईट स्कॉलरशिप मिला और वे नोर्वे जाकर वहां के कवियों की कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी में करने लगे. वहीं पर वे दूसरी भाषाओँ के अच्छे कवियों से दो-चार हुए - नेरुदा, अंतोनियो मचादो, रूमी, हाफिज़, कबीर, मीराबाई इत्यादि. अमरीका में लोग इन कवियों को नहीं जानते थे. उनके अनेक कविता संग्रह प्रकाशित हुए और उन्होंने खूब अनुवाद भी किया है. अमरीका के वे लोकप्रिय कवि हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा में उनके लिखे 80,000 पन्नों की आर्काइव है, जो उनका लगभग पचास वर्षों का काम है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, सितंबर 03, 2012

कला

द किस, ओग्यूस्त रोदें
The Kiss, Auguste Rodin
अब केवल कला बची है --
हमारी देहें, तूलिका की रेखाएँ, रंगद्रव्य, रूपांकन;
हमारी कहानी, कल्पित, अविश्वास का स्थगन;
हमारे खून की धमक, तालवाद्य;
हमारे दुःख के संगीत के लिए स्वर, सूक्ष्म.

कला, तराशा हुआ, सर्द संगमरमर हमारा चुम्बन;
निशब्द पाषाण के बंदी, हमारे वचन,
या असफल हो बन गए कवितायेँ; छपे पन्ने
रखने के लिए हमारे स्वरों के सूखे सुमन.

प्रेम के पास कोई चुनाव नहीं है
सिवाय कला की लम्बी बीमारी के, मृत्यु के,
जो प्रतिध्वनियाँ हम छोड़ आये थे,
उनके लिए हैं विशाल रंगशालाएँ, तालियाँ,
फिर घुप्प अँधेरा;
हमारी साँसों के भावावेश के लिए भव्य ओपेरा;

और वह तुम्हारे मन में जो थी
ऑस्कर-जीतने वाली फिल्म,
जहाँ गाते थे मेरे प्राण,
वहाँ फटी आवाज़ में अब टरटराती है कला.


-- कैरल एन डफ्फी



 कैरल एन डफ्फी ( Carol Ann Duffy )स्कॉट्लैंड की कवयित्री व नाटककार हैं. वे मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन युनिवेर्सिटी में समकालीन कविता की प्रोफ़ेसर हैं. 2009 में वे ब्रिटेन की पोएट लॉरीअट नियुक्त की गईं. वे पहली महिला व पहली स्कॉटिश पोएट लॉरीअट हैं. उनके स्वयं के कई कविता संकलन छ्प चुके हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों को सम्पादित भी किया है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान व अवार्ड मिल चुके हैं. सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं व स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी हैं. यह कविता उनके 2005 में छपे संकलन ' रैप्चर ' से है, जिसे टी एस एलीअट प्राइज़ मिला था.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

शनिवार, सितंबर 01, 2012

क्या तुमने कभी सोचा...

सेलिंग बोट्स, मिकालोयुस चिर्लोनियस
Sailing Boats, Mikalojus Ciurlionis
क्या तुमने कभी सोचा
कि हम कहाँ जा रहे हैं
नावें जानती हैं कि वे किस ओर बह रही हैं,
मछलियाँ जानती हैं कि वे कहाँ तैर रही हैं,
पंछी जानते हैं कि वे किस ओर उड़ रहे हैं
फिर भी हम पानी में छटपटाते हैं
मगर डूबते नहीं
हम पहनते हैं यात्रा के कपड़े
मगर यात्रा नहीं करते
हम पत्र लिखते हैं
मगर उन्हें भेजते नहीं
हम टिकट खरीदते हैं
जाने वाले सभी जहाज़ों का
मगर एअरपोर्ट में ही रह जाते हैं
तुम और मैं
हम दुनिया के सबसे कायर यात्री हैं.


-- निज़ार क़ब्बानी



 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.यह कविता उनके संकलन "वन हंड्रेड लव लेटर्ज़"से है .
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद बस्सम के फ्रंगिया ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़