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| स्टिल लाइफ विद अ बुक, पॉल सीनियैक Still Life With a Book, Paul Signac |
एक पल के लिए हमें बचा लेता है
कुछ सादा पर अप्रत्याशित
जो आता है चेतना से, स्मृति से:
स्वाद एक फल का, पानी का स्वाद,
वह चेहरा जो एक स्वप्न हमें लौटा देता है,
नवम्बर की पहली चमेली,
दिक्सूचक की अनंत चाह,
एक किताब
जो हमनें समझा था कि खो गई है,
एक षट्पदी की धमक,
वह छोटी-सी चाबी
जो खोल देती है हमारे लिए एक घर,
पुस्तकालय की गंध, या संदल की,
एक सड़क का पूर्व नाम,
एक नक़्शे के रंग,
एक आकस्मिक शब्द व्युत्पत्ति,
तराशे नाखून का चिकनापन,
वह तिथि जो हम ढूंढ रहे थे,
घंटे के बारह गहरे प्रहार, हमारे गिनने के साथ बजते हुए,
शरीर में अचानक उठा दर्द.
अस्सी लाख शिन्टो देवता
पूरी धरती पर चुपचाप भ्रमण करते हैं.
ये विनम्र देव हमें छूते हैं,
छूते हैं और आगे बढ़ जाते हैं.
-- होर्खे लुईस बोर्खेस
होर्खे लुईस बोर्खेस ( Jorge Luis Borges ) अर्जन्टीना के लेखक, कवि व अनुवादक थे. वे 20 वीं सदी के प्रमुख लेखकों में गिने जाते हैं. वे अपनी कहानियों व निबंधों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्द हैं. 1961 से पहले, जब उन्हें व सैम्युएल बेक्केट को एक साथ फोर्मनटर प्राइज़ मिला था, वे केवल अर्जन्टीना में ही अधिक जाने जाते थे. उसके बाद से, उनके लेखन का अंग्रेजी में खूब अनुवाद हुआ और वे दुनिया भर में सराहे गए. उनकी कहानियों में फंतासी व सपनों की दुनिया खूब मिलती है. अन्य सम्मानों सहित उन्हें सेर्वोंत प्राइज़ व फ़्रांस का लेजियन ऑफ़ ओनर भी प्राप्त हुआ था.इस कविता का स्पैनिश से अंग्रेजी में अनुवाद ए एस क्लाइन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़


फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने अपने ही नाम से लिखी थी, यह बताना ज़रूरी है क्योंकि अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'सोंगबुक 'से है.





