शनिवार, मई 28, 2011

देव देव हैं क्योंकि...

रोज़िज़ एंड बीटल, विन्सेंट वान गोग
Roses And Beetle, Vincent Van Gogh
नियति को निभाओ,
अपने पौधों को पानी दो, 
अपने फूलों से प्यार करो. 
बाकी सब 
अनजाने पेड़ों की छाया है. 

यथार्थ हमेशा, 
जो हम चाहते हैं,
उस से कम या 
उस से अधिक ही होता है. 
केवल हम ही 
स्वयं के तुल्य होते हैं. 

अकेले रहना अच्छा है, 
और सादगी से रहना 
बहुत ही अच्छा.
दुःख को देवों के चरणों में 
भेंट-सा चढ़ा दो. 

जीवन को दूर से देखो.
कभी सवाल मत करो. 
तुम्हें बताने के लिए
उसके पास कुछ भी नहीं है.
उत्तर देवों से भी आगे है कहीं.

मगर चुपचाप अपने मन में 
देवों का अनुसरण करो.
देव देव हैं
क्योंकि वे कभी नहीं सोचते
कि वे क्या हैं.

-- फेर्नान्दो पेस्सोआ ( रिकार्दो रेइस)

 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने रिकार्दो रेइस ( Ricardo Reis )के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग  जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ  के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने  मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'ओड्ज़' से है.
इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, मई 26, 2011

उन में से एक तितली

पोप्पीज़ एंड बटरफ्लाइज, विन्सेंट वान गोग 
Poppies and butterflies, Vincent Van Gogh
सुख की मुश्किल ही यही है
कि उसे वक़्त का कुछ अंदाज़ा नहीं होता
बिन बताए सामने आ खड़ा हो जाता है
और इस से पहले कि मैं समझूँ
कि वह यहाँ था
वह जा चुका होता है
वह अपहचाना-सा
खड़ा रह सकता है मेरे सामने
जबकि मैं कहीं और ही हो सकता हूँ
कुछ और याद करता हुआ
किसी दूसरे युग में
किसी ऐसे को ढूँढता हुआ
जो सालों से नहीं दिखा
और फिर दिखेगा भी नहीं इस दुनिया में
और ऐसा लगता है
कि वह जिस से मैं अनभिज्ञ था
जब वह यहाँ था
उस सुख को
अब संजो पा रहा हूँ मैं
हालाँकि अभी भी वह पहुँच से बाहर है
और उसे पकड़ा नहीं जा सकता
ना ही उसका नाम रखा जा सकता है
ना ही उसे वापिस बुलाया जा सकता है
और अगर मैं उसको रोक पाता
जैसा कि मैं चाहता हूँ
वह सिर्फ और सिर्फ
दुःख ही बन कर रह जाता

-- डब्ल्यू एस मर्विन 

W.S. Merwinडब्ल्यू एस मर्विन ( W S Merwin )अमरीकी कवि हैं व इन दिनों अमरीका के पोएट लॉरीअट भी हैं.उनकी कविताओं, अनुवादों व लेखों के 30 से अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं .उन्होंने दूसरी भाषाओँ से अंग्रेजी में बहुत अनुवाद किया है व अपनी कविताओं का भी स्वयं ही दूसरी भाषाओँ में अनुवाद किया है.अपनी कविताओं के लिए उन्हें अन्य सम्मानों सहित पुलित्ज़र प्राइज़ भी मिल चुका है.वे अधिकतर बिना विराम आदि चिन्हों के मुक्त छंद में कविता लिखते हैं.यह कविता उनके संकलन 'द शैडो ऑफ़ सिरिअस ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

मंगलवार, मई 24, 2011

तूफ़ान की आशंका

समर स्टॉर्म, रोबेर्ट हेनरी 
जब घने बादल
शाम से पहले ही 
ले आते हैं रात को 
जब धुंध का एक दायरा 
क्षितिज से पहले ही 
रोक लेता है रास्ते को 
जब सहमे-से विलो के पेड़ 
हवा के आने से पहले ही
कांपते हैं अपनी चुप्पी में 
जब बिखरी-सी नमी 
बारिश के आने से पहले ही 
चुभती है आँखों के कोरों में 
जब एक गूढ़ रहस्यमय धुंआ 
भर जाता है बहुत गहरे  
इस बिल जैसे जीवन में

-- मिशेल दगी  
       
     
 Michel Deguy मिशेल दगी फ़्रांस के कवि व दार्शनिक हैं और फ़्रांसिसी बौद्धिक दुनिया में उनका खूब नाम है. वे युनिवेर्सिते द पारी (सें दनी )में फ़्रांसिसी साहित्य पढ़ाते हैं .वे अपनी साहित्यिक पत्रिका Po&sie,जो 1972 में शुरू हुई थी, के संस्थापक-संपादक हैं. साथ ही वे जाँ पॉल सार्त्र  द्वारा संस्थापित पत्रिका 'ले तौं मोदेर्न ' के सम्पादक भी हैं. फ़्रांस में उनकी 30 से अधिक किताबे छप चुकी हैं व उनके लेखन व कविताओं का कई भाषाओँ में अनुवाद भी हुआ है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान मिल चुके हैं जिनमें 1998 का 'ग्रों प्री नासिओनाल द ला पोएज़ी ' और 2004 का 'ग्रों प्री द पोएज़ी द लाकादमी फ्रोंसेज़ 'शामिल हैं.
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, मई 22, 2011

तुम्हारा हाथ

लवर्स हैंड्स, ओग्यूस्त रोदें
Lovers Hands, Auguste Rodin
तुम से दूर हूँ,
हवा का हाथ थामती हूँ मैं,
या तुम्हारा कल्पित, 
ना छुआ जा सकने वाला हाथ.
यहाँ नहीं हो तुम, 
मगर चलते-चलते 
तुम्हारी उँगलियाँ जैसे 
मेरी उँगलियों में गुंथ जाती हैं.
और मेरे मन के किसी कोने में 
बोलने लगते हो तुम.


हवा को हौले-से दबाती हूँ मैं,
झड़े हुए पत्तों को पैरों से बिखेर देती हूँ,   
अचानक सब सुनहरा हो जाता है.
आधा विश्वास तो हो ही जाता है मुझे, 
कि मेरा हाथ तुम्हारे हाथ में ही है, 
वैसे ही जैसे, 
अगर तुम यहाँ होते, तो होता.


मेरे मन में क्या कहते जा रहे हो तुम? 
सर झुका कर सुनती हूँ,
और लगता है जैसे तुम्हारा हाथ, ऊपर उठ,
सचमुच मेरे बालों को हलके-से सहला रहा है, 
वैसे ही जैसे, 
ऊपर इन बेचैन पेड़ों को हवा 
सचमुच हौले-से छू रही है. 
अब प्यार के बारे में बोलते हुए 
तुम्हें साफ़-साफ़ सुन पा रही हूँ.




-- कैरल एन डफ्फी 


  कैरल एन डफ्फी ( Carol Ann Duffy )स्कॉट्लैंड की कवयित्री व नाटककार हैं. वे मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन युनिवेर्सिटी में समकालीन कविता की प्रोफ़ेसर हैं. 2009 में वे ब्रिटेन की पोएट लॉरीअट नियुक्त की गईं. वे पहली महिला व पहली स्कॉटिश पोएट लॉरीअट हैं. उनके स्वयं के कई कविता संकलन छ्प चुके हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों को सम्पादित भी किया है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान व अवार्ड मिल चुके हैं. सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं व स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी हैं. यह कविता उनके 2005 में छपे संकलन ' रैप्चर ' से है, जिसे टी एस एलीअट प्राइज़ मिला था.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़                                                                                                                                                        

शनिवार, मई 21, 2011

तुम्हारी ईमेल

कम्बोडियन डांसर, ओग्यूस्त रोदें 
जब तुम मेरी ईमेल का जवाब देते हो, 
सारे के सारे ग्रह-नक्षत्र 
मेरे आस-पास घूम जाते हैं,
जो दूरस्थ हैं, वे भी पास आ जाते हैं.
तितली पूर्व बंधन छोड़ पंख फैलाती है. 
अंगूर पक जाते हैं मेरे लिए 
और अपने हरे-हरे प्रतान 
फैला देते हैं पड़ोस के बगीचे तक. 
प्यार की देवी 'इश्तार' 
फिर जीवित हो जाती है
और उजड़े शहरों के लिए 
अपना गीत गाती है,
अपने मुंह से धूल झाड़
कुशल नर्तकी-सा नृत्य करती है,
सारे सैनिकों को वापिस घर 
अपने अपनों के पास भेज देती है,
और मरहम लगाती हैं
इस टूटी टांग वाली नन्ही चिड़िया को,
दो नदियों के बीच वाले देश में 
यह भी तो घायल हुई थी.
वह अपने फटे आँचल 
के तार गिनती है 
और सो जाती है.
मगर मैं अभी भी तुम्हारी ईमेल का इंतज़ार कर रही हूँ.
स्क्रीन में मेरी थकी-थकी आँखें प्रतिबिंबित हो रहीं हैं 
और मेरी घड़ी की दोनों सुईयां 
तुम्हारी चुप्पी के बीचोंबीच 
गले मिल रहीं हैं. 

-- दून्या मिखाइल 

image-dunya2





 दून्यामिखाइल ( Dunya Mikhail )एक इराकी-अमरीकी कवयित्री हैं. वे अरबी में लिखतीं हैं व उनकी कविताएँ इराक के हालात , युद्ध, युद्ध से प्रभावित जीवन व विस्थापन के बारे में हैं. अरबी में उनकी कविताओं के पांच संकलन प्रकाशित हुए हैं. उनकी अंग्रेजी में अनूदित कविताओं के दो संकलन प्रकाशित हुए हैं, जिन में 'द वार वर्क्स हार्ड' को PEN ट्रांसलेशन अवार्ड मिला व 'डायरी ऑफ़ अ वेव आउटसाइड द सी' को अरब अमेरिकेन बुक अवार्ड मिला है. 2001 में उन्हें यू एन ह्यूमन राइट्स अवार्ड फॉर फ्रीडम ऑफ़ राइटिंग प्राप्त हुआ.
वे 1996 से अमरीका में रहती हैं व अरबी पढ़ाती हैं.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद डैन वीच ने किया है.    
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, मई 19, 2011

जब मैंने कहा था कि मैं तुम्हें चाहता हूँ -- कुछ प्रेम कविताएँ

पीच ट्रीज़ इन ब्लोस्सम, विन्सेंट वान गोग
Peach Trees In Blossom, Vincent Van Gogh

तुम्हारे लिए मैं अलग-ही शब्द लिखना चाहता हूँ 
एक नई भाषा गढ़ना चाहता हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए
जो तुम्हारे बदन को समा ले
और मेरे प्यार को.

                          ---

बहुत दूर चला जाना चाहता हूँ मैं शब्दकोष से 
और अपने होंठ पीछे छोड़ जाना चाहता हूँ. 
इस मुंह से तंग आ गया हूँ मैं, 
अब कोई दूसरा मुंह चाहता हूँ. 
ऐसा जो कभी चेरी का पेड़ बन जाए, 
कभी माचिस की डिबिया. 
जिस में से शब्द ऐसे निकलें 
जैसे पानी में से जलपरियाँ,
जैसे जादूगर की पिटारी में से सफ़ेद कबूतर. 

                         ---

तुम्हारे लिए 
एक अनूठा किताबघर बनाना चाहता हूँ. 
जिस में मैं रखूँगा 
बारिश की रिम-झिम,
चाँद की मिट्टी,
घने काले बादलों की उदासी,
पतझड़ के पहियों के नीचे
दबे पत्तों का दर्द.

-- निज़ार क़ब्बानी 

  निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Kabaani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. अरबी दुनिया में नारी का स्थान क्या है और क्या होना चाहिए, इस विषय पर भी लिखा है उन्होंने. साथ ही अरबी राष्ट्रवाद भी उनकी कविताओं में खूब झलकता है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रांतिकारी हैं, उन्होंने ने कहा था -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 कि उम्र से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थी, व उनके 34 कविता संग्रह छप चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्द अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इन कविताओं का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जायुसी ने किया है.
इन कविताओं का हिंदी में अनुवाद  -- रीनू तलवाड़ 

मंगलवार, मई 17, 2011

और जब मेरी स्मृति

अं कूप्ल दामुरअ, विन्सेंट वान गोग 
और जब मेरी धुंधलाती स्मृति,
देर रात चलती रेलगाड़ियों की तरह, 
बड़े बड़े स्टेशनों पर ही रुकेगी,
तब भी नहीं भूलूंगा तुम्हें.


मैं याद करूँगा 
तुम्हारे आँखों में फैली अनंत
यह उदास शाम,
मेरे कंधे पर तुम्हारी दबी-सी सिसकी, 
जो धूल की तरह  
कभी झाड़ी नहीं जा सकेगी. 

वियोग का क्षण आया 
और मैं चला गया,
तुमसे बहुत दूर कहीं. 
कुछ ख़ास नहीं,
पर किसी-किसी रात,
किसी की उँगलियाँ 
तुम्हारे बालों में गुंथ जाएँगी, 
मेरी दूरस्थ उँगलियाँ 
मीलों का सफ़र तय करेंगी.

-- इस्माइल कदारे  






इस्माइल कदारे अल्बेनिया के कवि व लेखक हैं. अब वे अपने उपन्यासों के लिए अधिक जाने जाते हैं मगर पहले अपनी कविताओं से ही पहचाने जाने लगे थे. 2005 में मैन-बुकर  का इंटरनैशनल लिटरेचर प्राइज़ सर्वप्रथम उन्हें ही प्राप्त हुआ था. वे अल्बेनिया के इलावा फ़्रांस में काफी समय व्यतीत करते हैं, और उनकी कविताएँ व उपन्यास फ्रेंच में खूब अनूदित हुए हैं. यहाँ तक कि अंग्रेजी में उनके लेखन का अनुवाद अधिकतर फ्रेंच से किया गया है न की अल्बेनियन से. 40 देशों में उनके किताबें प्रकाशित हुई हैं व 30 भाषाओँ में उनके लेखन का अनुवाद हुआ है. बुकर प्राइज़ सहित उन्हें कई पुरुस्कार मिल चुके हैं व नोबेल प्राइज़ के लिए वे कई बार नामित किये जा चुके हैं.
इस कविता का मूल अल्बेनियन से अंग्रेजी में अनुवाद राबर्ट एलसी ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़