![]() | |||
| द गर्ल एंड द रोज़ेज़, मार्क शगाल The Girl And The Roses, Marc Chagall |
अभी-अभी मेरी नींद इतने हलके-से खुली, मुझे लगा मैं बहती जा रही हूँ.
कहाँ तक फैला है मेरा जीवन
और रात कहाँ से शुरू हो जाती है?
मैं मान सकती थी कि
जो कुछ भी मेरे आस-पास है
सब मैं ही हूँ,
स्फटिक की तरह पारदर्शी,
स्फटिक की गहराईयों की तरह
अँधेरा और शांत.
मैं अपने अन्दर समा सकती थी
सारे के सारे तारे; इतना विशाल
है मेरा मन, इतनी ख़ुशी-ख़ुशी
फिर-से जाने दिया उसने, उसे
जिसे मैं शायद चाहने लगी हूँ,
शायद थामने.
अपरिचित और अकल्पित ,
मेरा भाग्य मेरी ओर पलटता है.
मैं क्या हूँ? इस विशालता में
इस तरह रखी हुई ,
जो आती-जाती हवा से हिलता है,
उस घास भरे मैदान-सी महकी हुई.
पुकारती हुई, मगर इस डर के साथ
कि मेरी पुकार सुन ली जाएगी,
और होगी निर्धारित
डूब जाने के लिए
किसी दूसरे के जीवन में.
-- रायनर मरीया रिल्के
इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़




