मंगलवार, जनवरी 29, 2013

कोई

अ मैन इन अ रूम, रेम्बरेंट
A Man in a Room, Rembrandt




कोई, कौन इससे फर्क नहीं पड़ता, रहता है मेरे सर में
मानो वह हो एक खाली घर, भीतर आता है, बाहर जाता
है, हर बार पटकता है दरवाज़ा अपने पीछे, बेबस हो यह
हंगामा सहता हूँ मैं. कोई, और शायद वह मैं हूँ, हाथ से
छूता है मेरे सबसे गुप्त विचार,मरोड़ता है उन्हें और
वापिस कर देता है मिट्टी को. कोई, और यह बहुत बाद
की बात है, धीरे-धीरे चलता आता है कमरे के पार, और
मुझे न देखते हुए, ध्यान से देखता है तबाही को. कोई,
और न जाने कहाँ, चुनता है टुकड़े मेरी छाया के.




-- क्लौद एस्तेबान



 क्लौद एस्तेबान (Claude Esteban) एक फ्रेंच कवि , निबंधकार व अनुवादक थे। वे फ्रेंच व स्पेनिश दोनों भाषाओं में सिद्धहस्त थे। पिछली सदी के दूसरे हिस्से के प्रमुख कवियों में से एक, वे अपने पीछे महत्वपूर्ण कृति छोड़ गए हैं। उन्होंने कला व कविता पर असंख्य निबंध लिखे व स्पैनिश भाषा के प्रमुख कवियों ओक्टावियो पास, बोर्खेस, लोर्का इत्यादि की कविताओं व लेखन का अनुवाद किया। आरम्भ में वे फ्रेंच कला व साहित्य की पत्रिकाओं में लेख लिखते रहे। 1968 में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ --'ला सेजों देवास्ते '.इसके बाद उनके कई संकलन प्रकशित हुए, वे प्रसिद्द कलाकारों के लिए उनकी प्रदर्शनियों के कैटालोग के लिए प्रस्तावनाएँ लिखते रहे। स्पेनी कवि होर्खे गुइयें से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई व उन्होंने उनके कृत्य का  फ्रेंच में खूब अनुवाद किया। 1984 में उन्हें अपनी गद्य कविताओं के लिए मालार्मे पुरूस्कार प्राप्त हुआ। कला में उन्हें गहरी रूचि रही और 1991 में उन्हें एडवर्ड हापपर के चित्रों से प्रेरित कविता संकलन 'सोलई दौन्ज़ युन पीएस वीद ' के लिए फ्रांस कल्चर प्राइज़ प्राप्त हुआ। उनके 13 कविता संकलन, कई निबंध व अनेक अनुवाद प्रकाशित हुए,. 


इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, जनवरी 27, 2013

अब और नहीं...

ग्लेशियर स्ट्रीम्ज़, जॉन सिंगर सार्जेंट
Glacier Streams, John Singer Sargent

जैसे हिमनदी के एक छिद्र से गिरता है झरना
और उस के स्वाद के दो चेहरे होते हैं, एक आगे
एक पीछे, एक मीठा होता है और एक कठोर,

वैसे ही इन दिनों के हर पल में एक अंतिम बार मरता हूँ मैं,
और एक ओर ये पुरानी आहें अब मुक्त नहीं करतीं मुझे,
और दूसरी ओर लक्ष्य अब और दिखाई नहीं देता.



-- ओसिप मंदेलश्ताम 



Osip Mandelstam ओसिप मंदेलश्ताम  ( Osip Mandelstam )रूसी कवि व निबंधकार थे और विश्व साहित्य में भी उनकी गीतात्मक कविताओं का विशिष्ट स्थान है. वे यहूदी थे और उनका परिवार पोलिश मूल का था, मगर वे सेंट पीटर्सबर्ग में बड़े हुए. स्कूल के समय से ही वे कविता लिखने लगे थे. उन्होंने अपने समकालीन रूसी कवियों के साथ मिल कर 'एक्मेइज़म'  ( Acmeism ) की स्थापना की. 22 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ -- द स्टोन. जब उनकी कविताओं में रूसी क्रांति के दिग्भ्रमित होने का दुःख छलकने लगा, तो स्तालिन ने उन्हें निर्वासित कर दिया. उनके अनेक कविता व निबंध संग्रह प्रकाशित हुए व उनकी कविताओं का खूब अनुवाद भी किया गया है. 

इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद क्लेरन्स ब्राउन व डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, जनवरी 25, 2013

कटु बोध

डेथ्स हेड मोथ, विन्सेंट वान गोग
Death's Head Moth, Vincent Van Gogh
हाथ जोड़े, इस आश्रय देते अर्ध-प्रकाश में ही रहो.
लंगड़े चौकीदार के बैठने के लिए कोई जगह नहीं है.
कुर्सियाँ दो सप्ताह पहले ही बेच दी गई थीं. वहाँ आगे,
कुछ बड़े पीपों को धोया जा रहा है. बजरे
बंदरगाह के किनारे पर चढ़े हुए हैं. सड़क पार से
आ रहा है समाचार-वाचक का स्वर.
मैं नहीं सुनना चाहता.
मैं मेज़ से झाड़ता हूँ पतंगे के झुलसे-हुए पंख
जो पिछली रात से यहाँ पड़े हैं, बस इतना जानता हूँ
कि उनका सारा भार उनकी भारहीनता में है.


-- ज्यानिस रीत्ज़ोज़  




 ज्यानिस रीत्ज़ोज़ ( Yannis Ritsos ) एक युनानी कवि और वामपंथी ऐक्टिविस्ट थे. टी बी और दुखद पारिवारिक समस्याओं से त्रस्त, अपने वामपंथी विचारों के लिए उत्पीड़ित, उन्होंने ने कई वर्ष सैनटोरीअमों, जेलों व निर्वासन में बिताये मगर पूरा समय वे लिखते रहे और अनेक कविताएँ, गीत, नाटक लिख डाले, कई अनुवाद भी कर डाले. अपने दुखों के बावजूद, समय के साथ उनके अन्दर ऐसा बदलाव आया कि वे अत्यंत मानवीय हो गए और उनके लेखन में उम्मीद, करुणा और जीवन के प्रति प्रेम झलकने लगा. उनकी 117किताबे प्रकाशित हुई जिनमे कविताओं के साथ-साथ नाटक व निबंध-संकलन भी थे. यह कविता उनके संकलन 'लेट इन्टू द नाईट -- द लास्ट पोएम्ज़ ऑफ़ 
ज्यानिस रीत्ज़ोज़' से है.


इस कविता का मूल ग्रीक से अंग्रेजी में अनुवाद मार्टिन मकिंसी ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, जनवरी 23, 2013

नींद में

अ ड्रीम, ओंरी मातीस
A Dream, Henri Matisse

नींद में प्रेम हुआ,
उठी तो आँख में आँसू थे:
इतना नहीं चाहा है किसी को कभी,
इतना नहीं चाहा है 
मुझे किसी ने कभी.
नहीं था समय एक चुम्बन का भी
न ही पूछने के लिए उसका नाम.
अब मैं काटती हूँ
जाग कर रातें
देखती हूँ स्वप्न उसके.



-- वेरा पाव्लोवा 



 वेरा पाव्लोवा ( Vera Pavlova ) रूस की सबसे प्रसिद्द समकालीन कवयित्री हैं. उनका जन्म मॉस्कोमें हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की व संगीत के इतिहास विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की. कुछ समय बाद ही उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई और उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ किया. उनके 14 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व रूस में उनकी किताबें खूब बिकती हैं. उन्होंने चार ओपेरा लिबेरेतोज़ के लिए संगीत लिखा है व कुछ बोल भी. उनकी कविताएँ 18भाषाओँ में अनूदित की गयी हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन 'इफ देयर इज़ समथिंग टू डिजायर: वन हंड्रेड पोएम्ज़ ' से है.

इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीवन सेमूर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, जनवरी 21, 2013

मिडनाइट क्लब

पोर्ट्रेट, योर्ज सरा
Portrait, Georges Seurat



जो गुणी हैं उन्होंने बरसों बताया है हमें कि वे चाहते हैं
कि जो वे हैं, उन्हें उसी के लिए प्रेम किया जाए,
कि जो भी उनकी पूर्णता है उसमें, वे हमारी ही तरह
संध्या में मिट जाते हैं. तो वे रात भर काम करते हैं
ठंडे, चाँदनी के जाल-बिछे कमरों में;
कभी-कभी, दिन के समय, वे अपनी गाड़ी से टेक लगा
खड़े रहते हैं, ताकते रहते हैं सुनहरी, भावहीन, तपती
घाटी को, मगर अधिकतर वे बैठते हैं अँधेरे में, झुक कर,
पैर धरती पर, हाथ मेज़ पर, कमीजों में होता है
खून का धब्बा, ठीक हृदय-स्थल के ऊपर.



--  मार्क स्ट्रैन्ड


  मार्क स्ट्रैन्ड ( Mark Strand )एक अमरीकी कवि, लेखक व अनुवादक हैं. 1990 में वे अमरीका के 'पोएट लौरेएट ' थे. वे कई जाने-माने विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी पढ़ा चुके हैं और आजकल  कोलम्बिया  युनिवेर्सिटी में अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं. उन्हें 'पुलित्ज़र प्राइज़ ' सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं. अब तक उनकी कविताओं, लेखों व अनुवादों के 30 से भी अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं. यह कवितांश उनकी कविता 'जर्नी' से है, जो उनके संकलन 'द कंटीन्यूअस लाइफ' से है.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शनिवार, जनवरी 19, 2013

जब वे मेरी कविताएँ पढ़ें...

चिल्ड्रन एंड सनी ट्रीज़, औगूस्ट मैके
Children and Sunny Trees, August Macke
और जब वे मेरी कविताएँ पढ़ें, 
आशा करता हूँ 
वे सोचें कि मैं हूँ कुछ प्राकृतिक --
जैसे कि वह बूढ़ा बरगद,
जिसकी छाँव में खेलते-खेलते 

थक कर धम्म से बैठ जाते थे
जब वे बच्चे थे,
और पोंछते थे पसीना 
तप रहे माथों का
धारीदार झबलों की आस्तीनों से.



-- फेर्नान्दो पेस्सोआ ( अल्बेर्तो काइरो )



फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने अल्बेर्तो काइरो ( Alberto Caeiro )के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नाम या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो ये है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, स्वभाव, दर्शन, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्ररी में उन पन्नों की एडिटिंग का काम आज तक जारी है. यह कविता उनके संकलन 'द कीपर ऑफ़ शीप ' से है.
इस कविता का मूल पुर्तगाली से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, जनवरी 17, 2013

जंगली बतखें

मैलर्डज़ एंड मून, ओहारा कोसोन
Mallards and Moon, Ohara Koson 
तुम्हें अच्छा होने की आवश्यकता नहीं है.
तुम्हें नहीं है आवश्यकता प्रायश्चित करने के लिए
रेगिस्तान में घुटनों के बल सौ मील चलने की.
तुम्हें केवल करने देना है प्रेम अपनी देह के नर्म
जीव को, उस से जिसे वह प्रेम करता है.
मुझे बताओ अपनी निराशा के बारे में
और मैं तुम्हें अपनी के बारे में बताउंगी.
इस बीच दुनिया आगे बढ़ रही है.
इस बीच सूर्य और बारिश के पारदर्शी पत्थर
चलते जा रहे हैं भूदृश्यों के पार,
घास के मैदानों और गहरे पेड़ों के ऊपर से,
पर्वतों और नदियों पर से.
इस बीच, बहुत ऊपर स्वच्छ नीली हवा में,
जंगली बतखें फिर देश लौट रही हैं.
जो भी तुम हो, चाहे कितने भी अकेले,
स्वयं को भेंट करता है यह संसार
तुम्हारी कल्पना को,
इन जंगली बतखों की तरह बुलाता है तुम्हें,
एक कर्कश और उत्तेजित स्वर में,
बार-बार, बताता है तुम्हें तुम्हारा स्थान
इन सब चीज़ों के परिवार में.


-- मेरी ओलिवर


Mary Oliver मेरी ओलिवर ( Mary Oliver )एक अमरीकी कव्यित्री हैं, जो 60 के दशक से कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. उनके 25 से अधिक कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और बहुत सराहे गए हैं. उन्हें अमरीका के श्रेष्ठ सम्मान 'नेशनल बुक अवार्ड' व 'पुलित्ज़र प्राइज़' भी प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताएँ प्रकृति की गुप-चुप गतिविधियों के बारे में हैं, जैसे वो धरती और आकाश के बीच खड़ीं सब देख रहीं हैं. और  उनकी कविताओं में उनका अकेलेपन  से प्यार, एक निरंतर आंतरिक एकालाप व स्त्री का प्रकृति से गहरा सम्बन्ध भी दिखाई देता है. यह कविता उनके संकलन 'ड्रीम वर्क' से है.

इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़