शनिवार, जुलाई 30, 2011

निशा गीत


रोड, आइसाक लेवितान
Road, Isaac Levitan


रात को गाड़ी चलाता हुआ मैं एक गाँव से गुज़रता हूँ,
कदम बढ़ा कर घर, गाड़ी की हेडलाइट में आ जाते हैं --
वे अब जग चुके हैं, कुछ पीना चाहते हैं.
घर, खलिहान, नाम-तख्तियाँ, वीरान गाड़ी-घर -- अब
सब एक जीवन ओढ़ लेते हैं. मनुष्य सो रहे हैं:

कुछ शांतिपूर्वक सो पाते हैं, औरों के चेहरों पर तनाव है 
मानों अमरत्व के लिए कड़ा प्रशिक्षण कर रहे हों.
गहरी नींद में भी उसे छोड़ने की हिम्मत नहीं कर पाते.
बंद दरवाज़ों की तरह वे इंतज़ार करते रहते हैं 
जबकि रहस्यमय जीवन पास से गुज़रता रहता है.

शहर के बाहर, सड़क बहुत समय तक जंगल में फैली रहती है.
पेड़, पेड़ एक दूसरे से की गई मूक संधि में चुप हैं.
उनका रंग अत्यंत नाटकीय है, मानो आग की रोशनी में हों.
कितना साफ़-साफ़ दिखता है हर पत्ता!
वे घर तक मेरा पीछा करते हैं.

मैं लेटा हूँ और बस सोने ही लगा हूँ,
अपरिचित बिम्ब और चिन्ह अपने आप को बनाते हैं
मेरी पलकों के पीछे वाली अँधेरी दीवार पर.
सोने और जागने के बीच के समय में 
एक बड़ा-सा अक्षर अन्दर आने की कोशिश करता है
पूरी तरह सफल हुए बिना.



-- तोमास त्रांसत्रोमर 



                               
तोमास त्रांसत्रोमर ( Tomas Tranströmer )स्वीडन के लेखक, कवि व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में, बल्कि दुनिया भर में सराही गयीं हैं. उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक  कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओँ में अनूदित की गईं हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए है जिनमे इंटरनैशनल पोएट्री फोरम का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए नामित भी किये गए हैं. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पड़ा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता है, मगर दूसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन ' द हाफ -फिनिश्ड हेवन ' से है.

इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट ब्लाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, जुलाई 28, 2011

एक गुंजायमान अकेलापन

स्टारी नाईट ओवर द रोन, विन्सेंट वान गोग
Starry Night Over The Rhone, Vincent Van Gogh

रात खींच कर ले गयी उसको 
प्यार के अकेलेपन में उठाये आनंद 
के शिखर तक, आत्मा मुक्त, 
सारी समझदारी जलती हुई
एक समर्पित खोज की आग में.
आँखें एक जीवित महासागर से लबालब,
वह अपनी यात्रा की भोर तक जा पाया. 
वह जानता था रात होना
और गहराईयों तक सहना.
उसकी प्रार्थना पर्वतों में 
सितारों की गूढ़ नि:शब्दता को 
खुली हुई थी.
उसके दिनों का बीतना 
बस एक सामंजस्य था,
एक चपल ज्योति की अनंत उड़ान-सा.
उसने सागर पार किया: 
जब पागल पवन पूरी तरह उन्मुक्त थी, 
और किनारे एक गुंजायमान अकेलेपन 
में पाए गए.
देह उसका घर थी, 
और भोर जिए-गए प्यार कि नई देहरी.
दिन एक छाया था, 
घड़ियाँ जैसे गेहूं की बालियों से,
रेगिस्तान में सोई चुप्पी से कढ़ी हुई:
हर पल में उसे उम्मीद थी 
एक जलते-हुए जोश की,
उसे उम्मीद थी कि आग रात बन जाएगी,
वह झरना गाएगी जिसे वह सुनता है.

उसकी आँख की पुतली में अब दूरी नहीं थी.
वह जानता था रात होना
और गहराईयों तक सहना.


-- कार्लोस ओबरेगोन


Photo Carlos  Obregón © Image:







कार्लोस ओबरेगोन ( Carlos Obregón ) कोलम्बिया के कवि थे. उन्हें कोलम्बियन कविता का सबसे अच्छी तरह छुपाया राज़ कहा जा सकता है. हालाँकि उनका  कृतित्व अधिक नहीं है, ( 33 वर्ष की आयु में उन्होंने आत्महत्या कर ली थी ), मगर अब उन्हें महान लातिन-अमरीकी कवियों में गिना जाने लगा है. भौतिकी और दर्शन पढने-पढ़ाने के इलावा उन्होंने अनेक यात्राएँ की. उनके अन्दर एक असंतोष, एक अधीरता थी. उन्होंने स्पेन में काफी समय बिताया और वहीँ पर उनकी दो किताबें प्रकाशित हुईं, जो उनके छोटे लेकिन गहन जीवन का  दस्तावेज़ हैं.
इस कविता का मूल स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद निकोलास सुएस्कून ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, जुलाई 26, 2011

हवा में ऐसे डोलता है

फील्ड ऑफ़ स्टब्बल विद थंडरक्लाउड ओवरहेड, विन्सेंट वान गोग  
Field Of Stubble With Thunderclouds Overhead,Vincent Van Gogh


हवा में ऐसे डोलता है मेरा जीवन 
जैसे जाली-से लिपटा पत्ता झूलता है 
पतझड़ की तेज़ तूफानी हवा में.
और जैसे एक लहर टकराती है किनारे से
तूफ़ान में एक पियानो सुनाई देता है.
काले-घने बादल
जल्दी-जल्दी चलते हुए हवा के संग.
एक मलिन आईना है मेरे मन में.
जब भी मैं उसे देखता हूँ
मेरा चेहरा काला हो जाता है,
जलने लगता है, दुखने लगता है,
जैसा कि केवल मैं ही 
अपने एकांत में जान पाता हूँ.
मेरा जीवन हवा में डोलता है 
इस तूफानी पतझड़ में 
जब हवा तेज़ी से बहती है खेत के पार.


-- स्रेच्को कोसोवेल 




  स्रेच्को कोसोवेल ( Srečko Kosovel ) स्लोवीनिया के कवि थे जिन्हें स्लोवीनिया का 'रिम्बो' भी कहा जाता है. 22 साल की अल्पायु में ही उनका देहांत हो गया था, मगर अपने पीछे वे लगभग एक हज़ार सुन्दर कविताएँ छोड़ गए. अब वे मध्य-यूरोपीय माडर्नस्ट कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं. उनकी कविताएँ प्रथम विश्व युद्ध के बाद की हताशा व खलबली दर्शाती हैं.हैरानी की बात है की मध्य-यूरोप के छोटे कसबे में रहते कोसोवेल ने, टैगोर की लेखन में, वह शान्ति व दर्शन पाया जो वे खोज रहे थे. उनकी कविताओं में पचास से भी अधिक बार टैगोर का उल्लेख होता है.
इस कविता का मूल स्लोवीनियन से अंग्रेजी में अनुवाद नीके कोफिजान्सिच पोकोर्न ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, जुलाई 24, 2011

तुम अभी भी जीवित हो...

पोर्ट्रेट ऑफ़ अ यंग पेजेंट, विन्सेंट वान गोग
Portrait Of A Young Peasant, Vincent Van Gogh

तुम अभी भी जीवित हो, और अभी तक अकेले नहीं हुए --
अपने खाली हाथ लिए, वह अभी भी तुम्हारे पास है,
और एक आनंद पहुंचा देता है तुम दोनों को
धुंध और भूख और तेज़ गिरती बर्फ के बीच से 
अपरिमित मैदानों के पार.

भव्य निर्धनता, राजसी गरीबी!
चैन से रहो उसमें, शांत रहो.
धन्य हैं ये दिन, ये रातें,
और मासूम है यह मेहनत का मीठा संगीत.

दयनीय है वह आदमी 
जो अपनी छाया के कुत्ते से डर कर भागता है,
जिसे एक हवा घुटनों से काट लेती है,
और गरीब है वह जो अपने जीवन का चिथड़ा 
फैलाता है एक छाया से क्षमा की भीख मांगने के लिए.


-- ओसिप मंदेलश्ताम 


Osip Mandelstam ओसिप मंदेलश्ताम ( Osip Mandelstam ) रूसी कवि व निबंधकार थे और विश्व साहित्य में भी उनकी गीतात्मक कविताओं का विशिष्ट स्थान है. वे यहूदी थे और उनका परिवार पोलिश मूल का था, मगर वे सेंट पीटर्सबर्ग में बड़े हुए. स्कूल के समय से ही वे कविता लिखने लगे थे. उन्होंने अपने समकालीन रूसी कवियों के साथ मिल कर 'एक्मेइज़म'  ( Acmeism ) की स्थापना की. 22 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित हुआ -- द स्टोन. जब उनकी कविताओं में रूसी क्रांति के दिग्भ्रमित होने का दुःख छलकने लगा, तो स्तालिन ने उन्हें निर्वासित कर दिया. उनके अनेक कविता व निबंध संग्रह प्रकाशित हुए व उनकी कविताओं का खूब अनुवाद भी किया गया है.
इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद क्लेरन्स ब्राउन व डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, जुलाई 22, 2011

क्योंकि

द स्क्रीम, एडवर्ड मंच
The Scream, Edvard Munch

क्योंकि जंगले के सामने ही बसों को रोक दिया गया था 
क्योंकि दुकान की रोशन खिडकियों में खड़ी गुड़ियों ने इशारे किये थे 
क्योंकि साइकिल वाली लड़की बहुत देर तक रुकी रही थी 
दवा की दुकान के सामने 
क्योंकि बढई ने शराबखाने का शीशे का दरवाज़ा तोड़ दिया था 
क्योंकि बच्चा अपनी चुराई हुई पेंसिल के साथ अकेला था लिफ्ट में 
क्योंकि कुत्तों ने समुद्र-किनारे के बंगलों को छोड़ दिया था 
क्योंकि नाली की जंग-लगी जाली पर बिच्छू-बूटी उग आई थी 
क्योंकि आकाश एक लाल मछली के कारण पीला पड़ गया था
क्योंकि पहाड़ पर घोडा सितारे से भी अधिक अकेला था 
क्योंकि ये और वे सब शिकार थे 
क्योंकि ऐसा था इसीलिए, सिर्फ इसीलिए, मैंने तुम से झूठ बोला था 


--- ज्यानिस रीत्ज़ोज़ 


 ज्यानिस रीत्ज़ोज़ ( Yannis Ritsos ) एक युनानी कवि और वामपंथी ऐक्टिविस्ट थे. टी बी और दुखद पारिवारिक समस्याओं से त्रस्त, अपने वामपंथी विचारों के लिए उत्पीड़ित, उन्होंने ने कई वर्ष सैनटोरीअमों, जेलों व निर्वासन में बिताये मगर पूरा समय वे लिखते रहे और अनेक कविताएँ, गीत, नाटक लिख डाले, कई अनुवाद भी कर डाले. अपने दुखों के बावजूद, समय के साथ उनके अन्दर ऐसा बदलाव आया कि वे अत्यंत मानवीय हो गए और उनके लेखन में उम्मीद, करुणा और जीवन के प्रति प्रेम झलकने लगा. उनकी 117किताबे प्रकाशित हुई जिनमे नाटक व निबंध-संकलन भी थे.


इस कविता का मूल ग्रीक से अंग्रेजी में अनुवाद एडमंड कीली ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, जुलाई 20, 2011

बंजारन बांसुरी

द बॉय विद द विलो फ्लूट, क्रिस्तियाँ स्क्रेडज़विग
The Boy With The Willow Flute, Christian Skredsvig

तुम 
जो पहले कभी गीत सुनाती थे मुझे 
अब भी सुनाओ ना
सुनने दो मुझे 
तुम्हारा वही लम्बा आरोही स्वर  
जियो मेरे साथ
तारा डूब रहा है 
मैं उससे आगे सोच सकता हूँ 
मगर मैं भूल रहा हूँ
सुन पा रही हो मुझे 

अब भी सुन पा रही हो मुझे 
क्या तुम्हारी हवा 
तुम्हें याद रखती है 
ओ सुबह की सांस 
रात का गीत सुबह का गीत 
जो कुछ भी मुझे नहीं पता है 
वो सब मेरे पास है 
मैंने उसमे से कुछ भी नहीं खोया है 

मगर अब मैं ठीक नहीं समझता 
तुमसे पूछना 
कि तुमने यह संगीत कहाँ से सीखा 
कि वह थोडा-सा भी आया कहाँ से 
कभी चीन में शेर होते थे 

जब तक बांसुरी रुक ना जाए
और रोशनी पुरानी न पड़ जाए 
मैं सुनता रहूँगा 



-- डब्ल्यू एस मर्विन


W.S. Merwinडब्ल्यू एस मर्विन ( W S Merwin )अमरीकी कवि हैं व इन दिनों अमरीका के पोएट लॉरीअट भी हैं.उनकी कविताओं, अनुवादों व लेखों के 30 से अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं .उन्होंने दूसरी भाषाओँ से अंग्रेजी में बहुत अनुवाद किया है व अपनी कविताओं का भी स्वयं ही दूसरी भाषाओँ में अनुवाद किया है.अपनी कविताओं के लिए उन्हें अन्य सम्मानों सहित पुलित्ज़र प्राइज़ भी मिल चुका है.वे अधिकतर बिना विराम आदि चिन्हों के मुक्त छंद में कविता लिखते हैं.यह कविता उनके संकलन 'द शैडो ऑफ़ सिरिअस ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

सोमवार, जुलाई 18, 2011

सर्वनाम

प्रियेर, मार्क शगाल 
Prière, Marc Chagall


खेल-खेल में
वह बनता है रेल. 
वह सीटी बनती है. 
वे निकल पड़ते हैं.

वह बनता है रस्सी. 
वह पेड़ बनती है. 
वे झूल जाते हैं. 

वह बनता है सपना.
वह पंख बनती है.
वे उड़ जाते हैं. 

वह बनता है सेनापति.
वह सेना बनती है.
खेल-खेल में
वे कर देते हैं युद्ध की घोषणा.


-- दून्या मिखाइल 


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 दून्या मिखाइल ( Dunya Mikhail )एक इराकी-अमरीकी कवयित्री हैं. वे अरबी में लिखतीं हैं व उनकी कविताएँ इराक के हालात , युद्ध, युद्ध से प्रभावित जीवन व विस्थापन के बारे में हैं. अरबी में उनकी कविताओं के पांच संकलन प्रकाशित हुए हैं. उनकी अंग्रेजी में अनूदित कविताओं के दो संकलन प्रकाशित हुए हैं, जिन में 'द वार वर्क्स हार्ड' को PEN ट्रांसलेशन अवार्ड मिला व 'डायरी ऑफ़ अ वेव आउटसाइड द सी' को अरब अमेरिकेन बुक अवार्ड मिला है. 2001 में उन्हें यू एन ह्यूमन राइट्स अवार्ड फॉर फ्रीडम ऑफ़ राइटिंग प्राप्त हुआ.
वे 1996 से अमरीका में रहती हैं व अरबी पढ़ाती हैं.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद इलीज़ाबेथ विन्ज्लो ने किया है.    
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़